नफ़रती पोस्टरों से लेकर दूसरे धर्म में मोहब्बत तक का सफ़र
नफ़रती पोस्टरों से लेकर दूसरे धर्म में मोहब्बत तक का सफ़र
मिलिए ऐसी महिला से जिन्हें जैसे-जैसे ज़िंदगी में नई जानकारी और अनुभव मिलते चले गए, वैसे-वैसे उन्होंने अपने हिंदू होने का तरीक़ा और मतलब बदला.
बचपन में आरएसएस की शाखा जाने, कॉलेज में हिंदूवादी पोस्टर्स लगाने से लेकर एक मुसलमान से प्यार और शादी के बाद समानता और मानवता के मूल्यों पर नाटक बनाने तक.
रसिका का जीवन सफ़र क्या बताता है?

देखिए हमारी ख़ास सिरीज़ हिंदू धर्मः मेरा मर्म की पांचवी और आख़िरी कड़ी- एक तरीक़ा हो सकता है हिंदू होने का?
रिपोर्टर – दिव्या आर्य
कैमरा-एडिटिंग – प्रेम बूमिनाथन
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