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हिंडनबर्ग के दावों पर सेबी चीफ़ माधबी पुरी और उनके पति ने जारी किया बयान, राहुल गांधी भी बोले
अदानी ग्रुप के ख़िलाफ़ रिपोर्ट जारी करने वाली हिंडनबर्ग रिसर्च ने अब बाज़ार नियामक सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच पर आरोप लगाया है.
अमेरिकी शॉर्ट सेलर फ़ंड हिंडनबर्ग ने शनिवार को व्हिसलब्लोअर दस्तावेज़ों का हवाला देते हुए कहा कि सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच की उन ऑफ़शोर कंपनियों में हिस्सेदारी रही है, जो अदानी समूह की वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी हुई थीं.
रविवार शाम सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच ने दो पन्नों का एक बयान जारी कर हिंडनबर्ग के दावों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा है कि रिपोर्ट में जिस फ़ंड का ज़िक्र किया गया है, उसमें 2015 में निवेश किया गया था और ये माधबी के सेबी का सदस्य बनने से दो साल पहले का मामला है.
इससे पहले रविवार सवेरे ‘इंडियन एक्सप्रेस’ और समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, सेबी चेयरपर्सन और उनके पति धवल बुच ने एक बयान जारी कर इन आरोपों का खंडन किया है.
दोनों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा है, ''इन आरोपों में कोई सचाई नहीं है. हमारी ज़िंदगी और वित्तीय लेनदेन खुली किताब हैं.''
सेबी ने जारी किया बयान
सेबी ने 10 अगस्त, 2024 को हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट पर एक बयान जारी कर अपनी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है.
सेबी ने कहा है कि निवेशकों को शांति बनाए रखनी चाहिए और ऐसी रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देने से पहले उस जानकारी का सही से आकलन कर लेना चाहिए.
सेबी के मुताबिक़, “निवेशकों को पता होना चाहिए कि हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट में एक डिस्क्लेमर शामिल है, जिसमें कहा गया है कि कंपनी जिन बॉन्ड्स की चर्चा कर रही है, उनमें शॉर्ट पोज़िशन रख सकती है.”
सेबी ने कहा है कि अदानी समूह के मामले में सेबी ने 24 में से 23 जाचों को पूरा कर लिया है और आखिरी जांच भी लगभग पूरी होने वाली है.
सेबी के अनुसार उसने अदानी समूह को 100 से ज़्यादा समन्स लगभग 1,100 पत्र और ईमेल जारी किए हैं. इसके अलावा सेबी ने घरेलू और विदेशी नियामकों से 300 से ज़्यादा बार बातचीत की गई है. साथ ही 12,000 पन्नों के दस्तावेज़ों की समीक्षा भी की गई है.
माधबी पुरी और उनके पति ने क्या बयान दिया
रविवार शाम को सेबी चीफ़ माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच ने दो पन्नों का एय बयान जारी किया जिसमें उन्होंनें विस्तार से हिंडनबर्ग के लगाए आरोपों पर अपनी राय रखी.
उन्होंने हिंडनबर्ग के आरोपों का खंडन करते हुए लिखा, "हिंडनबर्ग के लगाए आरोपों पर सेबी अलग से अपनी प्रतिक्रिया देगी, लेकिन हम पर लगे आरोपों को लेकर हम जवाब दे रहे हैं."
बयान के मुताबिक़, माधबी ने आईआईएम अहमदाबाद से पढ़ाई की है और दो दशक से भी अधिक वक्त तक बैंकिग और वित्तीय संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है. वहीं धवल बुच ने आईआईटी दिल्ली से अपनी पढ़ाई है और 35 साल तक एक बड़ी कंपनी में सीनियर मैनेजन्ट में काम किया है.
बयान के अनुसार, "अपने काम के दौरान दोनों ने पैसे जोड़े और निवेश किया है. माधबी पुरी के मौजूदा पद को देखते हुए उनकी वित्तीय स्थिति का आकलन करना ग़लत है और दुर्भावना से प्रेरित है."
बयान के मुताबिक़, "हिन्डनबर्ग की रिपोर्ट में जिस फ़ंड का ज़िक्र है उसमें निवेश करने का फ़ैसला साल 2015 में किया गया था. दोनों उस वक्त आम नागरिक थे और सिंगापुर में रहते थे. ये माधबी पुरी के सेबी में काम करने के क़रीब दो साल पहले की बात है."
"इस फ़ंड में निवेश करने का फै़सला इसलिए किया गया क्योंकि फ़ंड के चीफ़ इनवेस्टमेंट ऑफ़िसर अनिल आहूजा, धवल के बचपन के दोस्त हैं और वे दोनों एक दूसरे को स्कूल और आईआईटी दिल्ली के समय से जानते हैं. जब आहूजा ने 2018 में उस फ़ंड हाउस को छोड़ दिया तो हमने भी अपने निवेश को भुना लिया."
बयान में कहा गया है कि "अनिल आहूजा ने ये स्पष्ट किया है कि किसी भी समय फ़ंड हाउस ने किसी भी अदानी समूह की कंपनी के किसी भी बॉन्ड, इक्विटी या डेरिवेटिव में निवेश नहीं किया था."
"भारत में कई नियमों का उल्लंघन करने के लिए हिंन्डनबर्ग को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि नोटिस का जवाब देने की बजाय उसने सेबी की विश्वसनीयता पर हमला करने और सेबी की चेयरपर्सन के चरित्र हनन करने का रास्ता चुना."
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, माधबी बुच और उनके पति ने रविवार सवेरे एक बयान में कहा, ''हम यह बताना चाहते हैं कि हमारे ऊपर लगाए गए निराधार आरापों का हम खंडन करते हैं.''
उन्होंने कहा है, ''हमारी ज़िंदगी और हमारा वित्तीय लेखा-जोखा खुली किताब की तरह है और पिछले कुछ वर्षों में सेबी को सभी आवश्यक जानकारियां दी गई हैं.''
माधबी पुरी बुच और उनके पति ने कहा है, "हमें किसी भी और वित्तीय दस्तावेज़ों का खुलासा करने में कोई झिझक नहीं है, इनमें वो दस्तावेज़ भी शामिल हैं जो उस समय के हैं जब हम एक आम नागरिक हुआ करते थे.''
उन्होंने कहा है कि मामले की पूरी पारदर्शिता के लिए हम उचित समय पर पूरा बयान जारी करेंगे.
उन्होंने कहा है, "हिंडनबर्ग रिसर्च के ख़िलाफ़ सेबी ने प्रवर्तन कार्रवाई की थी और कारण बताओ नोटिस जारी किया था. उसी के जवाब में हिंडनबर्ग रिसर्च ने नाम ख़राब करने की कोशिश की है."
राहुल गांधी बोले, गंभीर आरोप लगाए गए हैं
इस पूरे मामले में रविवार शाम को कांग्रेस नेता और विपक्ष के नेता राहुल गांधी की भी प्रतिक्रिया आई है.
उन्होंने 2 मिनट 19 सेकंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किय और कहा कि हाल के वक्त में अधिक से अधिक लोग भारतीय शेयर मार्केट में अपनी कमाई लगा रहे हैं, और विपक्ष के नेता के तौर पर मेरी ये ज़िम्मेदारी है कि मैं उनके इसमें निवेश करने के जोखिम के बारे में बताऊं.
उन्होंने कहा, "ऐसा इसलिए क्योंकि स्टॉक मार्केट का नियमन करने वाली भारत की संस्थ्या सेबी पर आरोप लग रहे हैं."
उन्होंने कहा "लाखों लोगों की जमापूंजी ख़तरे में है इसलिए इस मामले की जांच की जानी चाहिए."
उन्होंने कहा कि "इससे तीन बड़े सवाल उठते हैं. पहले ये कि आरोप लगने के बाद भी माधबी पुरी ने इस्तीफ़ा क्यों नहीं दिया."
"दूसरा, ईश्वर न करे अगर बाज़ार में कुछ गड़बड़ हुई और निवेशों को अपना पैसा खोना पड़े तो इसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा, सेबी चीफ़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या फिर अदानी."
"तीसरा, ये मामला पहले ही सुप्रीम कोर्ट में है, अब गंभीर आरोप लगने के बाद क्या सुप्रीम कोर्ट इस मामले में भी स्वत: संज्ञान लेगी."
"अब से साफ़ हो रहा है कि पीएम मोदी इस पूरे मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति से कराने को लेकर क्यों डर रहे हैं."
क्या है हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में
हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि सेबी के चेयरपर्सन की उन ऑफ़शोर कंपनियों में हिस्सेदारी रही है जिनका इस्तेमाल अदानी ग्रुप की कथित वित्तीय अनियमतताओं में हुआ था.
इसमें कहा गया है कि आज तक सेबी ने अदानी की दूसरी संदिग्ध शेयरहोल्डर कंपनियों पर कोई कार्रवाई नहीं की है जो इंडिया इन्फोलाइन की ईएम रिसर्जेंट फ़ंड और इंडिया फोकस फ़ंड की ओर से संचालित की जाती है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि सेबी चेयरपर्सन के हितों के इस संघर्ष की वजह से बाज़ार नियामक की पारदर्शिता संदिग्ध हो गई है. सेबी की लीडरशिप को लेकर रिपोर्ट में चिंता जताई जा रही है.
हिंडनबर्ग ने कहा है कि अदानी समूह की वित्तीय अनियमितताओं में जिन ऑफशोर फ़ंड्स की संलिप्तता रही है वो काफी अस्पष्ट और जटिल स्ट्रक्चर वाले हैं.
रिपोर्ट में माधबी पुरी बुच के निजी हितों और बाजार नियामक प्रमुख के तौर पर उनकी भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं. हिंडनबर्ग रिसर्च ने कहा है अदानी ग्रुप को लेकर सेबी ने जो जांच की है उसकी व्यापक जांच होनी चाहिए.
हिंडनबर्ग रिसर्च ने कहा है कि व्हिसलब्लोअर से उसे जो दस्तावेज़ हासिल हुए हैं उनके मुताबिक़ सेबी में नियुक्ति से कुछ सप्ताह पहले माधबी पुरी बुच के पति धवल बुच ने मॉरीशस के फ़ंड प्रशासक ट्रिडेंट ट्रस्ट को ईमेल किया था. इसमें उनके और उनकी पत्नी के ग्लोबल डायनेमिक ऑप्चर्यूनिटीज फ़ंड में निवेश का ज़िक्र था.
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है माधबी बुच के सेबी अध्यक्ष बनने से पहले उनके पति ने अनुरोध किया था कि संयुक्त खाते को वही ऑपरेट करेंगे. इसका मतलब ये कि वो माधबी बुच के सेबी अध्यक्ष बनने से पहले पत्नी के खाते से सभी एसेट्स हटा देना चाहते थे.
चूंकि सेबी अध्यक्ष का पद राजनीतिक तौर पर काफी संवेदनशील होता है इसलिए उनके पति ने ये कदम उठाया होगा.
हिंडनबर्ग की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है,'' माधबी बुच के निजी ईमेल को एड्रेस किए गए 26 फरवरी 2018 के अकाउंट में उनके फ़ंड का पूरा स्ट्रक्चर बताया गया है. फ़ंड का नाम है "जीडीओएफ सेल 90 (आईपीईप्लस फंड 1)". ये माॉरीशस में रजिस्टर्ड फ़ंड ‘सेल’ है जो विनोद अदानी की ओर से इस्तेमाल किए गए फ़ंड की जटिल संरचना में शामिल था.''
हिंडनबर्ग ने बताया है कि उस समय उस फ़ंड में बुच की कुल हिस्सेदारी 872762.65 डॉलर की थी.
कौन हैं धवल बुच
माधबी पुरी बुच के पति धवल बुच फिलहाल मशहूर इनवेस्टमेंट कंपनी ब्लैकस्टोन और अल्वारेज़ एंड मार्शल में सलाहकार हैं. वो गिल्डेन के बोर्ड में नॉन एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर भी हैं.
उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक़ उन्होंने आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई की है. उन्होंने यहां से 1984 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग से ग्रेजुएशन की थी.
धवल बुच यूनिलीवर में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर भी थे और बाद में कंपनी के चीफ प्रॉक्यूरमेंट ऑफिसर बने.
बुच ने खुद को प्रॉक्यूरमेंट और सप्लाई चेन के सभी पहलुओं का विशेषज्ञ भी बताया है.
विपक्षी दलों ने क्या कहा
कांग्रेस ने हिंडनबर्ग रिसर्च की इस नई रिपोर्ट के बाद कहा है कि 'अदानी मेगा स्कैम की व्यापकता की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति बननी चाहिए.'
वहीं तृणमूल कांग्रेस ने सेबी प्रमुख माधबी बुच के इस्तीफे की मांग की है.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, ''ये सेबी चेयरपर्सन बनने के तुरंत बाद बुच के साथ गौतम अदानी की 2022 में दो बैठकों के बारे में सवाल पैदा करता है. याद करें सेबी उस समय अदानी लेनदेन की जांच कर रहा था.''
वहीं टीएमसी प्रवक्ता ने कहा, ''सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में लंबित जांच को देखते हुए सेबी चेयरमैन को तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए और उन्हें और उनके पति को देश छोड़ने से रोकने के लिए सभी हवाई अड्डों और इंटरपोल पर लुकआउट नोटिस जारी किया जाना चाहिए.''
टीएसी नेता महुआ मोइत्रा ने लिखा, '' सेबी के चेयरपर्सन का अदानी समूह में निवेशक होना सेबी के लिए टकराव और सेबी पर कब्ज़ा दोनों है. समधी सिरिल श्रॉफ कॉपरेट गर्वनेंस कमिटी में हैं. कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि सेबी को भेजी गई सारी शिकायतें अनसुनी हो जाती हैं.''
महुआ मोइत्रा ने अपने एक और ट्वीट में लिखा है कि इस चेयरपर्सन के नेतृत्व में सेबी की ओर से अदानी पर की जा रही किसी भी जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता है. यह सूचना सार्वजनिक होने के बाद सुप्रीम कोर्ट को अपने निर्णय पर दोबारा विचार करना चाहिए.
महुआ ने कहा है कि यहां तक कि सेबी की चेयरपर्सन भी अदानी के समूह में निवेशक हैं. उन्होंने सीबीआई और ईडी को टैग करते हुए लिखा है कि क्या आप लोग पीओसीए और पीएमएलए के मामलों को दायर करेंगे या नहीं.
हिंडनबर्ग रिसर्च की यह रिपोर्ट लगभग उस रिपोर्ट के 18 महीने बाद आई है, जब इसने पहली बार अदानी समूह पर आरोप लगाए थे.
जनवरी 2023 में आई इस रिपोर्ट से भारत में राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया था.
रिपोर्ट में अदानी समूह पर "शेयर बाज़ार में हेरफेर" और "अकाउंटिंग धोखाधड़ी" का आरोप लगाया गया था.
हालांकि बंदरगाहों से लेकर ऊर्जा कारोबार में शामिल अदानी समूह ने इन सभी आरोपों से इनकार किया था. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई या कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग खारिज कर दी थी.
उसके बाद अदानी समूह ने कहा था कि सच की जीत हुई है.
अदानी समूह ने क्या कहा
माधबी पुरी बुच को घेरने वाली हिंडनबर्ग की इस रिपोर्ट पर अदानी समूह ने भी प्रतिक्रिया दी है. समूह ने एक बयान जारी कर कहा है कि हिंडनबर्ग की ओर से लगाए गए ताजा आरोप में दुर्भावना और शरारत पूर्ण तरीके से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी का चयन किया गया है. ताकि निजी लाभ के लिए पहले से तय निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके. यह तथ्यों और कानूनों का पूरी तरह उल्लंघन है.
बयान में कहा गया है, '' हम अदानी समूह पर लगाए गए आरापों को पूर्ण रूप से खारिज करते हैं. यह आरोप उन बेबुनियाद दावों की री-साइकलिंग है जिनकी पूरी तरह से जांच की जा चुकी है. इन आरोपों को जनवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से पहले ही खारिज़ किया जा चुका है.''
इससे पहले कांग्रेस ने एक बयान जारी कर अदानी मामले में उच्च अधिकारियों की कथित मिलीभगत उजागर करने के लिए जेपीसी गठित करने की मांग की थी.
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