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बूढ़ा पहाड़: वो इलाक़ा जहां इस बात का डर था कि सुरक्षित लौट पाएंगे या नहीं
झारखंड के नक्सल प्रभावित ज़िले लातेहार का दुर्दांत बूढ़ा पहाड़ इलाका साल 2022 तक माओवादियों का सबसे सुरक्षित ठिकाना था.
बूढ़ा पहाड़ के कुल 27 गांवों पर माओवादियों का ही शासन चलता और उन्हीं के फ़ैसले सुने जाते.
माओवादियों ने यहां रहने वाले ग्रामीणों को अब तक देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था से दूर रखा था.
उनके डर के कारण यहां के लोगों ने कभी वोटिंग प्रक्रिया में भी हिस्सा नहीं लिया.
साल 2023 में नक्सल मुक्त घोषित होने के बाद बूढ़ा पहाड़ पर रहने वाले ग्रामीण पहली बार बिना ख़ौफ़ मतदान करने के लिए तैयार हैं.
वीडियो: प्रेरणा और शाद मिद्हत
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