पोर्न देखने के लिए क्या उम्र सही है, इस पर यहां क्यों छिड़ी हुई है बहस

    • Author, थॉमस जर्मेन
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

अमेरिका के टेक्सास में अगर आज आप पोर्नहब की वेबसाइट पर जाएंगे तो आप निराश हो सकते हैं. यहां रहने वाले लाखों लोगों को अब पोर्न देखने के लिए सरकारी आईडी की ज़रूरत होगी.

ऐसा माना जा रहा है कि इस फ़ैसले के वैश्विक प्रभाव हो सकते हैं

आमतौर पर एक पोर्न वेबसाइट पर दिखने वाले वीडियोज़ के मुकाबले अब आपको सिर्फ़ एक वीडियो दिखेगा. इस वीडियो में आपको पूरे कपड़ों में एक एडल्ट फ़िल्म स्टार चेरी डे विले पब्लिक पॉलिसी पर बात करती हुई दिखेंगी.

वीडियो में चेरी डे विले कहती हैं, "आपने जिन नेताओं को चुना है, वे वेबसाइट के एक्सेस से पहले आपकी उम्र का सत्यापन चाहते हैं."

वीडियो में एक्टर आगे बताती हैं, "वेबसाइट पर विज़िटर्स से हर बार उनकी फ़ोटो आईडी मांगने के बजाय पोर्नहब और इसकी सहयोगी साइट्स ने टेक्सास में हर विज़िटर को ब्लॉक करने का फ़ैसला किया है."

टेक्सास अकेला राज्य नहीं है, इस क़ानून को अब पूरे अमेरिका में लागू किया जा रहा है.

अरकन्सास, मिसीसिपी, यूटा और वर्जीनिया ने भी साल 2023 में ऐसे ही क़ानून पास किए, जिसमें पोर्न वेबसाइट एक्सेस के लिए उम्र का सत्यापन ज़रूरी कर दिया गया.

नॉर्थ कैरोलाइना और मोन्टाना ने साल 2024 की शुरुआत में इस क़ानून को लागू किया.

पिछले कुछ हफ्तों में आइडहौ, कन्सास, केंटकी और नेब्रास्का में भी इस क़ानून को मान्यता मिली.

अमेरिका के जिन राज्यों में इस क़ानून को लागू किया गया, पोर्नहब ने वहां के यूज़र्स को ब्लॉक कर दिया.

नए क़ानून होते ही अगले साल इस समय तक दक्षिणी अमेरिका के अधिकांश भागों में पोर्न साइट्स ब्लॉक हो जाएंगे.

ऐसा ही रहा तो बहुत जल्द दुनिया की चौथी सबसे मशहूर वेबसाइट पोर्नहब, अमेरिका के तीन में एक व्यक्ति के लिए बैन हो चुकी होगी.

अमेरिका के कई राज्यों ने पास किए क़ानून

इन क़ानून का मक़सद बच्चों को पोर्नोग्राफिक कंटेंट से दूर रखना है. क्योंकि चिंताएं हैं कि ऐसे कंटेंट में हिंसक यौन व्यवहार को सामान्य दिखाया जाता है, जिससे बच्चों पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है.

साथ ही इससे अवास्तविक यौन अपेक्षाओं को बढ़ावा मिलता और बच्चों को नुक़सान पहुंच सकता है.

अब तक अमेरिका के 19 राज्यों ने ऐसे क़ानून पास किए हैं.

इस क़ानून के अनुसार पोर्नोग्राफिक वेबसाइट्स के लिए साल 2022 से यह ज़रूरी कर दिया गया है कि हर विज़िटर की आयु का सत्यापन किया जाए.

क़ानून बनाने वाले वालों ने ये प्रस्ताव रखा है कि पोर्नोग्राफिक वेबसाइट्स पर विज़िटर्स का आयु-सत्यापन राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाए.

आयु-सत्यापन के लिए आईडी की ज़रूरत सिर्फ एडल्ट साइट्स के लिए ही नहीं है.

अमेरिका, यूके, यूरोपियन यूनियन, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के कुछ हिस्सों में सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी इसी तरह के आयु सत्यापन प्रस्तावित हैं.

इस नियम के समर्थकों का कहना है कि सिगरेट ख़रीदने के लिए आईडी की जांच करने जैसा ही ये नियम है.

आयु सत्यापन की वकालत करने वाले प्रमुख संस्थानों में से एक, अमेरिकन प्रिंसिपल्स प्रोजेक्ट के अध्यक्ष टेरी शिलिंग का कहना है, "पोर्न देखना बहुत ही आसान है. जिस तरह से बच्चे आज पोर्नोग्राफी एक्सेस करते हैं, हमें नहीं लगता उन्हें ऐसा करना चाहिए."

वहीं नए क़ानून की आलोचना करने वालों का कहना है कि ये क़ानून ठीक से नहीं बनाए गए हैं. इसकी वजह से बच्चे और वयस्क दोनों और ज़्यादा ख़तरे में पड़ सकते हैं.

उनका यह भी कहना है कि इस नए क़ानून के बड़े भारी दुष्परिणाम हो सकते हैं, जो इंटरनेट के भविष्य और इससे मिलने वाली आज़ादी पर असर डाल सकता है.

अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन (एसीएलयू) के वरिष्ठ स्टाफ टेक्नोलॉजिस्ट डेनियल कहन गिलमोर कहते हैं, "ईमानदारी से बात की जाए तो सोशल मीडिया और पोर्नोग्राफी हर किसी की ऑनलाइन गतिविधि का बड़ा हिस्सा है."

कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इन क़ानून के तहत बच्चों को ऑनलाइन पोर्नोग्राफी के एक्सेस से रोकना एक अच्छा आइडिया नहीं मानते हैं.

इनका मानना है कि नए क़ानून को सख्ती से लागू करने से बेहतर कई और तरीके हो सकते हैं.

पोर्न पर अलग-अलग है राय

आयु सत्यापन के इन क़ानूनों पर चर्चा के बीच अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इन क़ानूनों की समीक्षा करने पर सहमति दी है.

इन क़ानूनों की सहमति की बात सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल पोर्नहब की मूल कंपनी आयलो और एसीएलयू द्वारा फाइल किए गए एक केस में सुनवाई के दौरान कही है.

हालांकि, अभी यह नहीं पता कि अदालत का फ़ैसला क्या होगा.

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में भी यह एक बड़ा मुद्दा बन गया है.

रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से उप-राष्ट्रपति के लिए डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चुने गए जेडी वेंस भी इस मुद्दे पर पहले कह चुके हैं कि पोर्नोग्राफी को गैर-क़ानूनी घोषित कर देना चाहिए.

प्रभावशाली रूढ़िवादी थिंक टैंक्स के सदस्यों का कहना है कि अगर ट्रंप चुनाव जीतते हैं तो उन्हें पोर्न पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा देना चाहिए.

गिलमोर कहते हैं कि अगर आयु सत्यापन की मुहिम आगे चलकर अनियंत्रित हो जाती है, तो ऐसी स्थिति में आपको अपनी हर ऑनलाइन गतिविधियों के लिए अपनी सरकारी पहचान पत्र को दिखाने के लिए बाध्य किया जा सकता है.

कुछ सिविल राइट्स समूहों को यह डर है कि ये नए क़ानून कहीं राज्य और कॉर्पोरेट निगरानी के नए युग की शुरुआत न कर दें. यह हमारे ऑनलाइन व्यवहार को भी बदल सकता है.

डिजिटल अधिकारों की तरफदारी करने वाले समूहों में से एक “फाइट फॉर द फ्यूचर” की डायरेक्टर इवान ग्रीर कहती हैं, “यह सिर्फ पोर्न के बारे में नहीं है, ये ख़तरे का संकेत है."

ग्रीर आगे कहती हैं कि आयु सत्यापन के लिए नए क़ानूनों एक तरह से पूरे वेब पर सेंसरशिप लगाने की छिपी साजिश है.

डिजिटल अधिकारों की तरफदारी के प्रचार अभियान में शामिल कई लोगों का कहना है कि ये क़ानून ने केवल पोर्नोग्राफी को सीमित कर सकते हैं साथ ही कला, साहित्य, सेक्स एजुकेशन और एलजीबीटीक्यू+ से जुड़े तथ्यों तक पहुंच को भी सीमित कर सकते हैं.

ग्रीर कहती हैं, "हम इन क़ानूनों का विरोध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बारे में किसी विचार के कारण नहीं करते हैं. हमारा मानना है कि यह बच्चों को उनके जीवन के कुछ सबसे महत्वपूर्ण विषयों के बारे में जानकारी से दूर करके उन्हें असुरक्षित बना देगा."

ग्रीर का मानना है कि नए क़ानूनों इंटरनेट के लिए जल्दबाज़ी में ढूंढे गए समाधान हैं. वो कहती हैं, ''पोर्न का समाज पर क्या असर होता है और पोर्न प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा को कैसे सुनिश्चित की जाए, इस पर महत्वपूर्ण और वैध चर्चा होनी चाहिए.''

अपनी बात को और आगे बढ़ाते ग्रीर तर्क देती हैं, "वेब ब्राउज़ के लिए जैसे ही आप अपनी आईडी स्कैन करते हैं, तो इससे अभिव्यक्ति की आज़ादी में रुकावट आती है. ये लोगों तक जानकारी की पहुँच को सीमित करता है."

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क़ानून का समर्थन करने वाले क्या कह रहे हैं?

वहीं, आयु सत्यापन का समर्थन करने वाले समूहों के प्रतिनिधियों का कहना है कि ये नए क़ानून सही हैं. ये नए क़ानून बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण तो हैं ही और इन्हें लागू करना भी आसान है.

शिलिंग कहते हैं, ''पोर्न इंडस्ट्री आपसे झूठ बोल रही है और उन्मादी है.''

नए क़ानून के समर्थन में शिलिंग तर्क देते हैं कि विज़िटर की आईडी जांचने के लिए कहना एक आसान काम है. सस्ता और किफायती होने के साथ साथ यह दशकों से चलाया जा रहा है.

यह भी एक सच है कि बच्चों की पहुँच पोर्नोग्राफ़ी तक नहीं होनी चाहिए. कुछ शोध यह भी बताते हैं कि पोर्नोग्राफ़ी के शुरुआती संपर्क बच्चों के लिए बहुत हानिकारक हैं.

एक दर्जन से भी अधिक राज्यों ने एक प्रस्ताव पारित करके माना है कि पोर्नोग्राफी एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है. पारित प्रस्ताव बच्चों के लिए होने वाले खतरों की विशेष चर्चा करता है.

प्रस्ताव में व्यक्त की गई चिंताएं इस विषय पर कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों जैसे यूनिसेफ़ और ब्रिटेन के बाल आयुक्त द्वारा व्यक्त की गई चिन्ताओं से मेल खाती हैं. अभी हाल में एक हज़ार युवाओं पर एक रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि पोर्नोग्राफी बच्चों में यौन हिंसा और हानिकारक दृष्टिकोण को सामान्य बना सकती है.

हालांकि, इसके वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं.

ऐसी कई स्टडीज़ हैं जो इस बात की तरफ़ इशारा करती हैं कि पोर्न युवाओं के यौन व्यवहार और दृष्टिकोण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. यह कितना प्रभवित कर सकता है - इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं है.

एक मेटा विश्लेषण के मुताबिक, इस विषय पर कई अध्ययनों में पूर्वाग्रह और मज़बूत वैज्ञानिक आधार के अभाव के कारण किशोरों में पोर्नोग्राफी के प्रभावों के बारे में वैध निष्कर्ष पर पहुंचना मुश्किल लगता है.

व्यापक मान्यताओं के बाद भी अध्ययनों में बहुत ही कम सबूत मिले हैं जो इस तथ्य को सही साबित करते हैं कि पोर्नोग्राफी बच्चों और वयस्कों में आदत का रूप ले लेती है.

क़ानून के विरोध में क्या कहा जा रहा है?

आयु सत्यापन क़ानून के विरोधियों के मुताबिक़, जिस तरह से इन कानूनों का समर्थन कर आगे बढ़ाया जा रहा है यह रूढ़िवादी अजेंडा का नतीजा है.

नेब्रास्का यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र की प्रोफ़ेसर और 'द पोर्नोग्राफी वार्स' की लेखिका केलसी बुर्के आयु सत्यापन कानून के बारे में कहती हैं, "ये क़ानून अभी पूरी दुनिया में चल रही एक बड़ी व्यापक नैतिक लड़ाई का हिस्सा है."

बुर्के आगे कहती हैं, "बच्चों की सुरक्षा एक ऐसा मुद्दा है जिस पर हम सभी एकमत हो सकते हैं. लेकिन यह सहमति बच्चों या पोर्नोग्राफी के विषय पर नहीं हो सकती. दरअसल, यह एक तरीका है नैतिक मान्यताओं को सेक्सुअलिटी और लिंग के बारे में कोडिफाइ करने का जिससे शायद अधिकांश अमेरिकी सहमत न हों.''

इन क़ानूनों के समर्थन में आवाज़ उठाने वाले संगठन एलजीबीटीक्यू+ के मुद्दे पर काफी लंबे समय से मुखर रहे हैं.

उदाहरण के लिए, अमेरिकन प्रिंसिपल्स प्रोजेक्ट का शुरुआती फोकस ट्रांसजेंडर पहचान के सामान्यीकरण का विरोध करना है.

एक रूढ़िवादी एंटी-पोर्नोग्राफी समूह “द नेशनल सेंटर ऑन सेक्शुअल एक्सप्लॉइटेशन” (एनसीओएसई) भी आयु सत्यापन क़ानूनों को आगे बढ़ाने के लिए दबाव डाला था.

इस संस्था का एलजीबीटीक्यू+ अधिकारों का विरोध करने का लंबा इतिहास रहा है. इसे ही पहले ''मोरलिटी इन मीडिया'' के नाम से जाना जाता था.

अभी हाल के दिनों में ही संस्था ने अपने पहले के बयानों से दूरी बनाते हुए खेद व्यक्त किया और अब इस बात पर ज़ोर दिया है कि एलजीबीटीक्यू+ समुदाय का समर्थन और संरक्षण अब इस संस्था एनसीओएसई की प्राथमिकता में है.

अमेरिकन प्रिंसिपल्स प्रोजेक्ट और एनसीओएसई दोनों का कहना है कि नए आयु सत्यापन क़ानूनों को उनका समर्थन बच्चों को पोर्न से बचाने के लिए है और इससे ज़्यादा कुछ नहीं.

ये बच्चों की सुरक्षा है या उन्हें अंधकार में धकेलना?

बात जब बच्चों की सुरक्षा की होती है तो पोर्न इंडस्ट्री के लीडर्स भी कहते हैं कि वो उनके बड़े से बड़े आलोचकों से भी सहमत हैं.

पोर्नहब की स्वामित्व वाली कंपनी आयलो में ब्रांड और कम्युनिटी की वाइस-प्रेसीडेंट अलेक्स केकेसी कहती हैं, “हमारी कंपनी आयु सत्यापन के नियम के पूरे तौर से पक्ष में है. हम अपने प्लेटफ़ॉर्म पर बच्चों को नहीं चाहते हैं. और हम ऐसे किसी भी नियम का स्वागत करते हैं जो बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से अनुचित कंटेन्ट से दूर रखता हो.”

हालांकि, वो आगे ये भी कहती हैं कि अभी के आयु सत्यापन के क़ानून बच्चों की सुरक्षा के लिहाज़ से अप्रभावी हैं.

जबकि इंटरनेट विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे, वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPNs) की मदद से यूज़र्स अपनी लोकेशन को छिपाकर जिस राज्य में ये नियम अभी लागू नहीं हैं वहां की लोकेशन सेट करके या फिर नियम नहीं मानने वाली वेबसाइट्स पर जाकर वो कंटेंट देख सकते हैं.

इस मसले पर सिर्फ एडल्ट इंडस्ट्री के लोग ही आवाज़ नहीं उठा रहे.

आधा दर्जन से भी अधिक इंटरनेट और बाल सुरक्षा विशेषज्ञ जिनसे बीबीसी ने बात की उनका मानना है कि आयु सत्यापन का मौजूदा क़ानून बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर ग़लत तरीके से प्रभाव डाल सकता है.

एक बयान में इंटरनेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (आईसीएमईसी) के चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव बॉब कनिंघम ने कहा इन आयु सत्यापन क़ानून के कारण अनजाने में बच्चों के अधिक खतरनाक ऑनलाइन माहौल में जाने का खतरा है.

कितनी सुरक्षित हैं ये वेबसाइट्स

जहां एक तरफ कुछ मेनस्ट्रीम पॉर्न साइट्स नए क़ानूनों का पालन करने के लिए आयु-सत्यापन कर रही है. तो वहीं लाखों ऐसी वेबसाइट्स भी हैं जिन्हें इन क़ानूनों की कोई परवाह नहीं है.

इस पर कई बाल सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि खतरनाक और अवैध कंटेन्ट के निगरानी के लिहाज़ से मेनस्ट्रीम की पॉर्न वेबसाइट्स बेहतर काम करती हैं. वो वेबसाइट जो नए क़ानून का पालन नहीं करतीं वहां सुरक्षा भी कम होती है.

एडल्ट इंडस्ट्री के लोगों का तर्क है कि मेनस्ट्रीम की पॉर्न वेबसाइट्स पॉर्न देखने के लिए ज़्यादा सुरक्षित है.

बच्चों और वयस्कों के सुरक्षा के मुद्दे पर पॉर्नहब को पहले काफी आलोचनाएं झेलनी पड़ी थी. उदाहरण के लिए 2020 में न्यूयॉर्क टाइम्स की जांच रिपोर्ट में पॉर्नहब की वेबसाइट पर बाल यौन शोषण, बलात्कार से जुड़े अन्य अवैध कंटेंट मिले थे.

हालांकि, उस समय आयलो का कहना था कि इन कहानियों ने पूरी इंडस्ट्री की समस्या को गलत तरीके से पेश किया. ये समस्या सिर्फ पॉर्न इंडस्ट्री की नहीं बल्कि सोशल मीडिया और अन्य बड़े प्लेटफॉर्म्स समेत पूरी इंडस्ट्री की थी.

अब पॉर्नहब और उसकी सहयोगी वेबसाइट्स को नए मालिक ने खरीद लिया है. अब आयलो का कहना है कि तब से कंपनी ने सिस्टम को और सख्त कर दिया है.

अलेक्स केकेसी का कहना है कि पोर्नहब पर अपलोड की गई हर एक सामग्री की अब मैनुअली जांच की जाती है. पोर्नहब मानती है कि नियमित उपयोगकर्ता उच्च स्तरीय गोपनीयता के हकदार हैं जिसके लिए कंपनी प्लेटफ़ॉर्म पर सामग्री अपलोड करने या उसमें दिखाई देने वाले सभी लोगों से उनकी उम्र, पहचान और सहमति सत्यापित करने की मांग करती है.

मई 2024 में, बच्चों के ऑनलाइन शोषण को रोकने के लिए काम करने वाली एक संस्था इंटरनेट वॉच ऑनलाइन (आईडब्ल्यूएफ़) के साथ आयलो ने भागीदारी की थी.

एडल्ट साइट पर जाने वाले यूज़र्स में आएगी कमी?

आईडब्ल्यूएफ़ की मुख्य कार्यकारी सूसी हर ग्रीवस कहती हैं, "आयलो ने अपने प्लेटफ़ॉर्म को सुरक्षित बनाने का प्रयास किया है और हमें उम्मीद है कि दूसरी एडल्ड मनोरंजन साइटें उनका पालन करेंगी.”

वेबसाइट्स जो आयु-सत्यापन के क़ानूनों का पालन करती हैं, उनके अनुसार उनकी साइट पर रहने वाले उपयोगकर्ताओं में पहले से ही भारी कमी आई है.

एक लीडिंग एडल्ट वीडियो प्लेटफॉर्म एक्सहैमस्टर जो ये दावा करता है कि वो आईडी चेक के साथ सभी अमेरिकी क़ानूनों का पालन करता है.

इस प्लेटफॉर्म का कहना है कि उनके साइट पर आने वाले सिर्फ़ 6 फ़ीसदी यूज़र्स ही आयु-सत्यापन को चुनते हैं.

“फाइट फॉर फ्यूचर” की ग्रीर कहती हैं, “उनमें से केवल आधे ही सफल होते हैं. बेशक, इसकी वजह से कुछ यूज़र्स सर्च करना छोड़ देते हैं तो कुछ कहीं और सर्च करने लगते हैं.”

एक्सहैमस्टर के प्रवक्ता का इस पर कहना है कि "इसके कारण इंडस्ट्री में सबसे अधिक ज़िम्मेदार वेबसाइट्स का दमन हो रहा है जिससे उन साइट्स को फ़ायदा मिल रहा है जो न तो सामग्री अपलोड करने वाले का सत्यापन करते हैं और न ही आयु सत्यापन क़ानून का पालन करते हैं. ये साइट्स अपने अधिकार क्षेत्र को भी छिपाती हैं."

कुछ लोग तर्क देते हैं कि इन क़ानूनों का प्रभाव क्या पड़ेगा यह जानना अभी जल्दबाज़ी होगी.

छिपा हुआ ख़तरा

आयु सत्यापन को लेकर चिंताएं कई तरह की हैं.

उदाहरण के तौर पर, ब्रिटेन के ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट के तहत पोर्न, सोशल मीडिया और कई बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आयु से जुड़े प्रतिबंध लग जाएंगे.

जबकि हाल ही में विकिपीडिया ने कहा कि वो ब्रिटेन के आयु सत्यापन के नियमों का पालन नहीं करेगा.

विकिपीडिया का कहना है कि ब्रिटेन के आयु सत्यापन नियम के पालन से विकिपीडिया के पाठकों और योगदानकर्ताओं के साथ उनकी प्रतिबद्धता का उल्लंघन होगा.

हालांकि अभी तक नियामकों की तरफ से आयु सत्यापन के तरीके पर कुछ भी नहीं किया गया है.

आयु सत्यापन के लिए नियामकों के प्रस्ताव में विवादास्पद आईडी जाँच शामिल हैं.

उधर अमेरिका में भी इसी तरह के एक बिल पर चर्चा हो रही है.

अमेरिकी सांसद किड्स ऑन लाइन सेफ़्टी एक्ट (केओएसए) नाम के बिल पर बहस कर रहे हैं जो पूरे अमेरिका में इसी तरह के प्रतिबंध लगाएगा.

हालांकि आयु सत्यापन के मसले पर विरोध के बाद केओएसए में कुछ संशोधन किए गए हैं लेकिन विरोधियों का अभी भी कहना है कि बिल गैर-निर्वाचित अधिकारियों को वेब को सेंसर करने का व्यापक अधिकार देगा.

नेब्रास्का यूनिवर्सिटी की केल्सी बुर्के और अन्य आलोचकों का कहना है कि कई आयु सत्यापन क़ानून अभी स्पष्ट नहीं हैं.

आयु सत्यापन को अनिवार्य करने वाला क़ानून आमतौर पर किसी भी वेबसाइट पर लागू होता है जहाँ 25 फ़ीसदी से 33 फ़ीसदी कंटेंट नाबालिगों के लिए हानिकारक होते हैं. उदाहरण के लिए, कंसास में, नाबालिगों के लिए हानिकारक कंटेंट को परिभाषित करने वाले क़ानून में "समलैंगिकता के कृत्य" शामिल हैं.”

कंसास राज्य के सीनेटर जेरेमी रयान क्लेयस, जिन्होंने राज्य के आयु सत्यापन कानून को प्रस्तावित किया था, उन्होंने इस पर मांगी गई प्रतिक्रिया का जवाब नहीं दिया.

यौन स्वतंत्रता की पक्षधर एक गैर-लाभकारी संस्था वुडहुल फ्रीडम फाउंडेशन की अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिक्की लेवी कहती हैं कि पोर्नोग्राफी की कभी कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं रही है. यह सिर्फ़ एक सुविधाजनक, अपमानजनक लेबल है जिसे राजनेताओं और धार्मिक नेताओं ने अपनी पसंद और नापसंद के हिसाब से उस कंटेंट पर लगाया है जो उन्हें पसंद नहीं है.

रिक्की लेवी आगे कहती हैं, “हम यूके और यूएस में सेक्स और कामुकता को लेकर भारी विरोध के बीच हैं, और हमें ऑनलाइन कामुकता पर निगरानी रखने के बारे में बेहद सतर्क रहना चाहिए."

आगे का रास्ता?

तो क्या गोपनीयता और बच्चे, दोनों की सुरक्षा का कोई तरीका हो सकता है?

इसका एक और समाधान है जो आयु सत्यापन क़ानून के कई विरोधियों को पसंद है. एक सिस्टम जिसे "डिवाइस-आधारित" आयु सत्यापन के रूप में जाना जाता है.

कानून निर्माता प्रौद्योगिकी कंपनियों से स्मार्टफोन और कंप्यूटर पर चलने वाले उनके ऑपरेटिंग सिस्टम में आयु सत्यापन सुविधाओं का निर्माण करने के लिए कह सकते हैं.

इंटरनेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन के कनिंघम कहते हैं, "हम मानते हैं कि डिवाइस के स्तर पर आयु सत्यापन एक व्यापक समाधान प्रदान करता है.''

आयु सत्यापन क़ानून के अनुसार वर्तमान में वेबसाइट्स थर्ड पार्टी टूल्स की मदद से खुद जांच करती है जो एक समस्या है.

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