तिरुपति लड्डू विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- 'धर्म और राजनीति को मत मिलाइए'

- Author, उमंग पोद्दार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में प्रसाद के लड्डू में कथित तौर पर 'जानवरों की चर्बी' होने के मामले में 30 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू की उस टिप्पणी पर नाराज़गी ज़ाहिर की, जिसके बाद से लड्डू विवाद शुरू हुआ.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ''राजनीति और धर्म को मिलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती.''
कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर जांच चल रही थी तो मीडिया में जाने की ज़रूरत क्या थी?
सुप्रीम कोर्ट ने चंद्रबाबू नायडू के लिए कहा, ''आप संवैधानिक पद पर हैं. हम उम्मीद करते हैं कि भगवान को राजनीति से दूर रखा जाए. अगर आपने पहले ही जांच के आदेश दे दिए थे तो मीडिया में जाने की क्या ज़रूरत थी? लैब रिपोर्ट जुलाई में आई. आपका बयान सितंबर में आया. रिपोर्ट में भी सब कुछ साफ़ नहीं है.''
चंद्रबाबू नायडू ने 19 सितंबर को दावा किया था, ''पिछली सरकार के दौरान तिरुमला लड्डू को बनाने में शुद्ध घी की बजाय जानवरों की चर्बी वाला घी इस्तेमाल किया जाता था.''
इस मामले में विवाद काफी बढ़ गया है और सुप्रीम कोर्ट में तीन से ज़्यादा याचिकाएं दाखिल की गईं. याचिका दाखिल करने वालों में सुब्रमण्यम स्वामी, राज्यसभा सांसद वाईवी सुब्बा रेड्डी और इतिहासकार विक्रम संपत भी शामिल हैं.
याचिकाओं में लड्डू तैयार किए जाने और मंदिर के संचालन को लेकर दिशा निर्देश देने की बात भी कही गई.
इस मामले में सुनवाई जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने की.

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान और क्या कहा
सुनवाई शुरू होने से पहले जस्टिस गवई ने मज़ाकिया लहज़े में कहा- उम्मीद है कि हमें लंच में लड्डू नहीं खाने होंगे.
सुनवाई के दौरान जस्टिस गवई ने कहा, ''आपने स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाई. जांच की रिपोर्ट आने से पहले ही आप मीडिया में क्यों गए?''
जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा, ''इस मसले पर अगर आप पूरी तरह से पुख़्ता नहीं थे तो आप जनता के बीच क्यों गए. जांच का मकसद क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि अब तक ये भी साबित नहीं हुआ है कि जिस घी के बारे में बात हो रही है, वो लड्डू बनाने में इस्तेमाल हुआ भी है या नहीं.
आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि घी की गुणवत्ता की जांच की जा रही है.
इस पर जस्टिस गवई ने कहा, ''तो आपको फौरन मीडिया में क्यों जाना था? आपको धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए.''
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि इस बात का सबूत कहां है कि यही वो घी है, जिसका लड्डू बनाने में इस्तेमाल हुआ.
आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से मुकुल रोहतगी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए. रोहतगी ने कहा कि हमारे पास रिपोर्ट्स हैं.
इस पर जस्टिस विश्वनाथन ने कहा, ''रिपोर्ट साफ नहीं है. पहली नज़र में ऐसे संकेत मिलते हैं कि ये वो सामग्री नहीं है, जिसे लड्डू बनाने में इस्तेमाल किया गया.''
कोर्ट ने आंध्र सरकार से ये भी कहा- आप कह सकते हैं कि टेंडर गलत तरीके से दिए गए, मगर ये कहना कि मिलावट वाला घी इस्तेमाल किया गया... इसके सबूत कहां हैं?
टीटीडी बोर्ड की ओर से पेश हुए वकील सिद्धार्थ लूथरा बोले, ''लोगों ने लड्डू के ख़राब स्वाद की शिकायत की थी.''
इस पर जस्टिस गवई ने कहा- ''आपके हिसाब से जिन लड्डू का स्वाद अलग था, क्या वही लड्डू नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) में जांच के लिए भेजे गए थे?''
इस मामले में अब तीन अक्तूबर की दोपहर सुनवाई होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर यानी सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कहा कि अच्छा ये होगा कि सॉलिस्टर जनरल इस मामले में सहयोग करें कि क्या एसआईटी जांच को ही जारी रहने दिया जाए या फिर किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाए?

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कहां से शुरू हुआ विवाद?
तिरुमला तिरुपति देवस्थानम यानी टीटीडी के कार्यकारी अधिकारी श्यामला राव ने 23 जुलाई को कहा था कि घी में वनस्पति तेल की मिलावट हुई है.
मगर 19 सितंबर को श्यामला राव घी में जानवर की चर्बी होने की बात कहते हैं.
19 सितंबर को ही आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया था, ''कोई ये सोच भी नहीं सकता कि तिरुमला लड्डू को इस तरह अपवित्र किया जाएगा. पिछले पाँच सालों में वाईएसआर ने तिरुमला की पवित्रता को अपवित्र कर दिया है.''
नायडू ने दावा किया था, ''इस बात की पुष्टि हो गई है कि तिरुमला लड्डू के घी में जानवर की चर्बी का इस्तेमाल किया गया. इस मामले में जांच चल रही है. इसके लिए जो भी दोषी होंगे, उन्हें सज़ा दी जाएगी.”
टीडीपी के महासचिव नारा लोकेश ने दावा किया था, ''पिछली सरकार में प्रसाद के लड्डू के घी में जानवरों की चर्बी और मछली के तेल का इस्तेमाल हुआ. प्रसाद के नमूनों के परीक्षण में पाया गया है कि इन लड्डुओं में मछली का तेल और बीफ़ चर्बी का इस्तेमाल हुआ है.''
टीडीपी की ओर से ये दावे एक रिपोर्ट के हवाले से किया गया था. बीबीसी इस रिपोर्ट में किए दावों की पुष्टि नहीं करता है.
ये रिपोर्ट गुजरात के नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की बताई गई थी. इस रिपोर्ट में कई चीज़ों का ज़िक्र था. इनमें जिन चीज़ों पर सबसे ज़्यादा आपत्ति जताई गई थी, वो थीं- लार्ड, बीफ टेलो और फिश ऑयल.
लार्ड यानी किसी चरबी को पिघलाने पर निकलने वाला सफेद सा पदार्थ. फिश ऑयल यानी मछली का तेल और बीफ टेलो यानी बीफ की चर्बी को गर्म करके निकाले जाने वाला तेल.
बीबीसी ने एनडीडीबी से संपर्क किया था.
बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा, ''हमें मिले नमूनों की जानकारी गोपनीय है. भेजने वाले की जानकारी और शहर का नाम नहीं है. हमें केवल नमूने मिले. लेकिन जांच के नतीजों पर हम कुछ नहीं कहेंगे. कोई नहीं जानता कि नमूने कहां से आए.''

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लड्डू पर शुरू हुई सियासत
आंध्र प्रदेश के सेशाचालम पर्वत पर स्थित तिरुमला तिरुपति देवस्थान दुनिया के सबसे अमीर तीर्थस्थलों में से एक है. यहां हर रोज़ हज़ारों की संख्या में लोग दर्शन करने जाते हैं.
तिरुमाला मंदिर को हर साल लगभग एक टन सोना दान में मिलता है. मुख्य मंदिर परिसर मज़बूत दीवारों से घिरा है और मंदिर के अंदर किसी तरह की फोटोग्राफ़ी की इजाज़त नहीं है.
अब जो लड्डू चर्चा में हैं, उसे मंदिर के गुप्त रसोईघर में तैयार किया जाता है. ये रसोईघर पोटू कहलाता है.
माना जाता है कि यहां हर रोज़ हज़ारों लड्डू तैयार किए जाते हैं. ये लड्डू दर्शन करने वाले लोगों को दिया जाता है. ऐसे में इस लड्डू से लाखों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है.
चंद्रबाबू नायडू ने जब लड्डू को लेकर आंध्र प्रदेश की पिछली जगनमोहन रेड्डी की सरकार को घेरा तो इस पर दूसरे राजनीतिक दलों की ओर से भी टिप्पणी की गईं.
20 सितंबर को ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा था, "मैंने चंद्रबाबू नायडू से बात की है. मैंने उनसे कहा है कि वो मुझे जो भी उपलब्ध जानकारी है उसकी रिपोर्ट भेज दें. मैं स्टेट रेगुलेटरों से भी बात करुंगा. जिस सोर्स से रिपोर्ट आई है उनसे भी बात करुंगा. सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए एक उचित कार्रवाई की जाएगी."
आंध्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शर्मिला रेड्डी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर इस सारे मामले की जांच सीबीआई से करवाने का आग्रह किया था.
जगन मोहन रेड्डी ने इस मामले पर कहा था, ''चंद्रबाबू नायडू को राजनीति के लिए भगवान का इस्तेमाल करने की आदत है. वे ऐसे व्यक्ति हैं जो अपने राजनीतिक लाभ के लिए ईश्वर का इस्तेमाल करते हैं. घी में मिलावट के आरोप चंद्रबाबू के 100 दिनों की सरकार के कामों से ध्यान हटाने के लिए लगाए गए हैं."
वाईएसआर नेता और तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट के चेयरमैन रहे वाई वी सुब्बारेड्डी ने सोशल मीडिया पर लिखा था, ''नायडू ने तिरुमला मंदिर की पवित्रता को नुक़सान पहुंचाकर और करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाकर पाप किया है. कोई भी व्यक्ति ऐसे आरोप नहीं लगा सकता.''
बीजेपी सांसद लक्ष्मण बोले थे, ''लड्डुओं में जानवर की चर्बी का इस्तेमाल दुर्भाग्यपूर्ण है. पूरा हिंदू समाज इस घटना की निंदा कर रहा है.''

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लड्डू पहले भी विवाद में रहे
सितंबर 2024 की शुरुआत में लड्डू पाने के लिए टोकन दिखाने की व्यवस्था की गई थी.
एक लड्डू सबको फ्री में दिया जाता है. हां, अगर आपको एक लड्डू और हासिल करना है तो 50 रुपये चुकाने होंगे.
श्रद्धालुओं के लिए आधार कार्ड दिखाने की भी व्यवस्था की गई. जिन लोगों ने दर्शन नहीं किए, वो आधार कार्ड दिखाकर लड्डू हासिल कर सकते हैं.
मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए 7500 बड़े लड्डू और 3500 वड़ा बनाए जाते थे.
2008 तक एक लड्डू के अलावा अगर किसी को प्रसाद चाहिए होता तो 25 रुपये में दो लड्डू दिए जाते थे. इसके बाद क़ीमत बढ़ाकर 50 रुपये कर दी गई.
2023 में इन लड्डुओं को ब्राह्मणों से बनवाए जाने से जुड़े एक नोटिफिकेशन पर भी विवाद हुआ था.
इतिहासकार गोपी कृष्णा रेड्डी ने बीबीसी से कहा था, ''शुरू से ही ऐसा कोई ज़िक्र नहीं मिलता है कि लड्डू किस जाति के लोगों को बनाना चाहिए और किसे नहीं. शुरू में ईसाई और मुसलमान भी टीटीडी में थे. अब भी हो सकते हैं. सब तरह के लोगों को शामिल करना चाहिए.''
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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