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बिल्डिंग मैटेरियल की दुनिया बदल देगा बांस, सिर्फ चांस देने की है बात
- Author, सुज़ेन बेर्यनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
एक के बाद एक बांस की छोटी मेहराबों से बनी 19 मीटर लंबी एक मेहराब इंडोनेशिया में बाली के एक स्कूल में सजी हुई है.
बाली के इस ग्रीन स्कूल में इस मेहराब को यहां अब तक के सबसे अहम स्ट्रक्चर में से एक माना जा रहा है.
इसे आर्किटेक्चर स्टूडियो इबुकू ने डिजाइन किया है. इसमें 12.4 टन डेंड्रोकेलमस एस्पर लगा है. इसे रफ या जायंट बैम्बू भी कहा जाता है. यह बेहद हल्का स्ट्रक्चर अप्रैल 2021 में बन कर तैयार हो चुका था.
पहली ही नजर में आकर्षित करने वाली ये 'ब्लिडिंग बांस' की ताकत और इसके लचीलेपन के बारे में बताती है. यह भी कि इसका किस तरह से इस्तेमाल हो सकता है. बांस से पर्यावरण को नुकसान न पहुंचने की वजह से यह ऐसा मैटेरियल है जो कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री के कार्बन फुटप्रिंट को घटा सकता है.
पेड़ों की तरह बांस के पौधे बड़े होने के साथ ही कार्बन सिंक की तरह काम करने लगते हैं. पेड़ों की प्रजातियों से कहीं ज्यादा ये ज्यादा कार्बन सोखता है.
इंटरनेशनल बैम्बू एंड रट्टन ऑर्गेनाइजेशन (आईएनबीएआर) और नीदरलैंड की डेफ्ट टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ बांस की एक नर्सरी प्रति हेक्टेयर 401 टन कार्बन का भंडारण कर सकती है.
इसके मुकाबले चाइनीज फर ट्री प्रति की एक नर्सरी प्रति हेक्टेयर सिर्फ सिर्फ 237 टन कार्बन का भंडारण करता है.
दुनिया का सबसे तेज बढ़ने वाला पौधा
बांस दुनिया का सबसे ज्यादा बढ़ने वाला पौधा है. इसकी कुछ किस्में तो हर दिन एक मीटर तक बढ़ जाती है. दूसरी अहम बात ये है कि बांस एक घास है.
इसलिए एक बार इसकी फसल ले भी जाए तो कटे हुए बांस में फिर कोंपलें फूट जाती है और ये बढ़ने लगता है. जबकि दूसरे पौधों के साथ ऐसा नहीं है.
एशिया में कंस्ट्रक्शन के काम में बांस का इस्तेमाल का इतिहास का पुराना इतिहास रहा है.
लेकिन यूरोप और अमेरिका में इसका इस्तेमाल बहुत आम नहीं है. इन देशों के बाजारों में हिट और केमिकल से ट्रीट किए बांस फ्लोरिंग,किचन टॉप और चॉपिंग बोर्ड के तौर पर इस्तेमाल होते हैं.
लेकिन मकान या इमारत का ढांचा बनाने में शायद ही इसका इस्तेमाल होता है.
लंदन के स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स एटलायर वन के क्रिस्टोफर मैथ्यूज़ कहते हैं कम इस्तेमाल की एक वजह है इससे परिचय न होना.
बैम्बू इंजीनियरिंग
बाली के स्कूल प्रोजेक्ट पर काम कर चुके मैथ्यूज कहते हैं,’’सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक ये है किसी को पता नहीं बांस को ढाला कैसे जाए. यानी बैम्बू इंजीनियरिंग कैसे हो, ये लोगों को पता नहीं है.’’
वो कहते हैं, इसलिए हमें लोगों को सुबूत देना पड़ा. हम वहां थे और हमने बालू की बोरियां चढ़ा कर लोगों को बताया कि ये कितना मजबूत है.’’
मैथ्यूज कहते हैं कि बांस की मांग बढ़ रही है. उनकी कंपनी के 30 फीसदी क्लाइंट्स अब इस मैटेरियल का इस्तेमाल कर रहे हैं. और अब इसने ज्यादा से ज्यादा बैम्बू स्ट्रक्चर बनाने शुरू कर दिए हैं.’’
वो मैक्सिको के एक स्कूल कैंपस की ओर इशारा करते हैं जो पूरी तरह बैम्बू से बना है. कोस्टारिका के योगा स्टूडियो और फिलीपींस में ब्रिज और पैवेलियन के बारे में बताते हैं.
वो कहते हैं,’’जिन देशों में इसका इस्तेमाल हो रहा है वो वहां काफी सस्ता और भरपूर मात्रा में मौजूद है. यहां इससे काम करने लोग इसमें दक्ष भी हैं. शुरू में यूरोप में इसका इस्तेमाल महंगा था. लेकिन जैसे-जैसे इस्तेमाल बढ़ना शुरू हुआ है, उसमें कोई कारण नहीं कि लागतें आग चल कर कम होंगी.’’
वो बताते हैं कि उनकी कंपनी ब्रिटेन में जल्दी है बांस से निर्माण के के लिए बातचीत के अंतिम दौर में है.
यूरोप में बांस की खेती
अगर यूरोप में बांस की खेती हो सके तो यह काफी मददगार साबित हो सकता है. लेकिन उत्तरी ठंडे इलाक में बांस की बड़ी प्रजातियां अच्छी तरह से नहीं बढ़ पाती हैं.
बैम्बूलॉजिक अब इसे बदलना चाहती है. यह यूरोप की पहले ऐसी कंपनी है जो बड़े पैमाने पर बांस उगाती है.
पुर्तगाल में बांस के बागान खड़े करने वाली इस कंपनी के कंस्लटेंट जेन डेटावर्नियर कहते हैं कि बांस को काफी अधिक धूप और थोड़े पानी की जरूरत पड़ती है.
वो कहते हैं.’’दक्षिण में काफी अधिक धूप आती है. बांस में भूमि क्षरण को रोकने की क्षमता है. पुर्तगाल में जहां हम बांस उगाते हैं वहां की मिट्टी काफी खराब है. चूंकि बांस कार्बन डाइक्साइड को सोखता है और इस जमीन में छोड़ देता है इसलिए ये जमीन को बेहतर बना देता है.’’
डेटावर्नियर कहते हैं कि उनकी कंपनी ऐसी सहयोगी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं जो यूरोपियन मार्केट के लिए नए प्रोडेक्ट बना रही हैं. लेकिन इसमें बाधा ये है कि ऐसे उत्पादों मानकीकरण नहीं हो सका है. प्रोडक्ट स्टैंडर्ड न होन से मुश्किल आती है.
वो कहते हैं, ‘’यूरोप में हमें बांस को एक मैटेरियल समझ कर इससे काम करने की आदत नहीं है. एशिया में इसकी मजबूती और एक मैटेरियल के तौर पर इस्तेमाल होने के काफी आंकड़े हैं. लेकिन यूरोप में आंकड़ों की कमी है.’’
बैम्बू प्रोडक्ट के मानकीकरण का सवाल
डॉ. भावना शर्मा सदर्न कैलोफोर्निया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर में असिस्टेंट प्रोफेसर और बैम्बू के इंटरनेशनल स्टैंडर्ड विकसित करने वाली टास्कफोर्स की सदस्य हैं. वो भी डेटावर्नियर की राय से इत्तेफाक रखती हैं.
वो कहती हैं,’’ कंस्ट्रक्शन के काम में बांस का इस्तेमाल अभी भी एक चुनौती है. अभी भी ये गैर पारंपरिक मैटेरियल है.’’
डॉ. भावना शर्मा कहती हैं,’’हम बांस के बारे में अपने ज्ञान में अभी इजाफा ही कर रहे हैं. हम ये समझने की कोशिश कर रहे हैं अलग-अलग वातावरण में ये कैसे काम करेगा. मतलब ये कि अगर आप एम्सटर्डम में निर्माण कर रहे हैं तो बिल्डिंग कितनी टिकाऊ होगी. उस मौसम में बांस कैसा काम करेगा. इसी तरह इंडोनेशिया में बिल्डिंग की इंडोनेशिया में कैसी परफॉरमेंस करेगी. तो अभी इस बारे में हम समझ बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.’’
वो कहती हैं कि इस तरह अहम अलग-अलग तरह की बिल्डिंग बनाने की ओर से बढ़ सकते हैं.
डॉ. शर्मा कहती हैं कि पिछली गर्मियों में इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन की ओर से पहली बार इंजीनियर्ड बैम्बू टेस्टिंग से जुड़े मानक प्रकाशित किए गए. इससे बैम्बू इंजीनियरिंग, डिजाइनिंग से जुड़े लोगों को मदद मिलेगी. जो लोग किसी बिल्डिंग प्रोजेक्ट के लिए बांस का इस्तेमाल करना चाहेंगे उन्हें इससे काफी सहूलियत होगी.
अमेरिका में बढ़ रहा है बांस का इस्तेमाल
कैलिफोर्निया में टिकाऊ बिल्डिंग मैटेरियल बनाने वाली वाली कंपनी बामकोर की स्थापना 2019 में की गई थी. ये कंपनी बांस और लकड़ी से पैनल वाले फ्रेमिंग सिस्टम बनाती है. ये पैनल यूकेलिप्टस और लकटड़ी से भी बनते हैं. ये पैनल पांच मंजिल तक की बिल्डिंग बनाने में इस्तेमाल होते हैं.
बामकोर के चीफ सस्टेनिबिलिटी ऑफिसर केट चिलटन कहती हैं, ‘’ हमारे ग्राहक तो एक मकान खरीदने वाले लोग हैं. या फिर वे आर्किटेक्ट जो ज्यादा टिकाऊपन की तलाश में हैं.’’
‘’लेकिन जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं हमने डेवलपर्स को ग्राहकों के तौर पर शामिल करना शुरू किया है. वो डी.आर. होरटोन के बारे में बताती हैं जो अमेरिका में सबसे बड़ी होम बिल्डर कंपनी है. ये कंपनी कई जगह बैम्बू बिल्डिंग विकसित करने की कोशिश कर रही है.’’
बांस की 1600 प्रजातियां हैं और बामकोर की सबसे ज्यादा पसंदीदा प्रजाति डेंड्रोक्लेमस एस्पर है. इसे विशाल आकार वाले कलम्पिंग बैंबू के नाम से जाना जाता है. ये कंपनी इस बांस को दक्षिण अमेरिका और एशिया से मंगाती है.
हालांकि चिल्टन कंपनी फ्लोरिडा में बांस उगाने वाले लोगों से बात कर रही है. यहां डेंड्रोक्लेस एस्पर पर ट्रायल चल रहा है.
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