उत्तरकाशी में फंसे मज़दूरों को निकालने के लिए तेज़ हुआ अभियान, कब तक पूरा होगा ऑपरेशन?

    • Author, अनंत झणाणें
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, उत्तरकाशी से

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में स्थित सिल्क्यारा सुरंग में पिछले 12 दिन से फंसे 41 मजदूरों को निकालने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए गए हैं.

बुधवार रात भर ड्रिलिंग के बाद आज किसी अच्छे समाचार की उम्मीद जताई जा रही है.

गुरुवार को प्रधानमंत्री के पूर्व सलाहकार और उत्तराखंड सरकार के विशेष कार्याधिकारी भास्कर खुल्बे ने गुरुवार को बीबीसी को बताया कि "हम पूरे भारत की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे."

"हम कोशिश कर रहे हैं कि जिस सुरंग में 45 मीटर तक जहाँ हम (बीते दिन बुधवार शाम तक) काम कर चुके थे, उससे आगे का काम करें."

उन्होंने बताया, "रात में ड्रिलिंग के दौरान मलबे में सरिया आने की वजह से थोड़ी दिक्कत आई थी. लेकिन उसे लगातार छह घंटे तक कोशिश करने के बाद सुलभ ढंग से काटकर बाहर निकाल दिया गया है.'

उन्होंने कहा, "अब वेल्डिंग की प्रक्रिया जारी है जिसमें अब 6 मीटर का पाइप पहले ही ड्रिल किए जा चुके 45 मीटर लंबे पाइप के साथ जोड़ा जाएगा, और उसके बाद ऑगर से पुश किया जाएगा."

भास्कर खुल्बे ने बताया, "जो सावधानियाँ बरती जानी हैं उनको हम बरत रहे हैं. विशेषज्ञों की एक टीम भी अभी यहां आयी है. ये टीम साइट पर वाइब्रेशन रिकॉर्ड करके बताएंगी कि यहां सुरक्षा मानकों का किस हद तक पालन किया गया है."

उन्होंने जानकारी देते हुए बताया, "मज़दूरों का धैर्य बहुत अच्छा है. बीती रात भी जब कटिंग का कार्य चल रहा था, तो मजदूरों ने उस तरफ़ से बताया कि उन्हें क्या महसूस हो रहा था. क्योंकि कटिंग करते हुए गैस इस्तेमाल होती है जिसका धुआँ होता है. उस धुएँ को मज़दूर दूसरी तरफ़ महसूस कर रहे थे."

वे कहते हैं, "इसके बाद उन्होंने हमें पाइप के ज़रिये बताया कि, 'हमें यह महसूस हो रहा है कि आप हमारे बहुत नज़दीक' हो."

लेकिन ये मजदूर कितनी देर में बाहर निकल सकेंगे, इस पर अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं है.

भास्कर खुल्बे बताते हैं, "इस समय सीमा निर्धारित करना सही नहीं होगा, लेकिन पूरे देश की आशाओं के अनुरूप हम कोशिश करेंगे कि वह जल्द से जल्द बाहर निकले."

"हर 6 मीटर के पाइप को दूसरे पाइप से जोड़ने में वेल्डिंग, उसके बाद उसको चालू करना और फिर उसे पुश करने में क़रीब 4 घंटे लगते हैं. अगर अब हम यह सोचकर चल रहे हैं कि अब 18 मीटर और काम करना बाक़ी है, तो इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इस प्रक्रिया में 12 घंटे ओर लग सकते हैं."

बचाव दल सुरंग के अंदर पहुंचकर क्या करेगा?

सिल्क्यारा टनल में बचाव कार्यों में लगे अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि आज ही ये ऑपरेशन पूरा हो जाएगा.

लेकिन एक बार रेस्क्यू टीम सुरंग में फंसे मज़दूरों तक पहुंच गयी तो फिर क्या होगा?

इस सवाल का जवाब ये है कि सुरंग तक रेस्क्यू पाइप पहुंचने के बाद पहले डॉक्टर मज़दूरों के पास जाएंगे.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डॉक्टर लोगों को टनल से बाहर निकलने में मदद करेंगे क्योंकि रास्ते में कई नुकीले पत्थर हैं.

एक चिंता का कारण ये भी है कि ये मज़दूर बीते 12 दिनों से टनल के भीतर हैं वो फलों को खाकर जी रहे थे, दो दिन पहले ही उन्हें पहली बार गर्म खिचड़ी दी गयी है. ये भी संभव है कि उन्हें कमज़ोरी हो.

अधिकारियों ने बीबीसी को बताया है कि टनल के भीतर तापमान बाहर के मुकाबले गर्म है और बचाव कर रही टीम इस बात को भी ध्यान में रख रही है.

मशीन ऑपरेटर ने क्या बताया

बचावकर्मियों के लिए बुधवार की रात संघर्ष भरी रही लेकिन उन्हें उम्मीद है कि उनकी कोशिशें अब आख़िरी चरण में हैं.

ऑगर मशीन के ऑपरेटर नौशाद अली मलबे में ड्रिलिंग के काम में लगे हुए हैं.

उन्होंने गुरुवार सुबह बीबीसी को बताया था कि सुरंग के भीतर ड्रिलिंग का 80 फ़ीसदी काम पूरा हो चुका है.

इससे पहले ड्रिलिंग कर रहे बचावकर्मियों को लोहे की छड़ों और पाइपों का सामना करना पड़ रहा था जिससे ड्रिलिंग होने में दिक्कतें हो रही थीं.

इससे बचाव कार्य पर असर पड़ा.

नौशाद अली ने बताया कि कर्मचारी लोहे की छड़ों को काटने में कामयाब रहे हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि ड्रिलिंग का काम जल्द शुरू हो सकेगा.

उन्होंने सुबह कहा था, "ड्रिलिंग का केवल 20 फ़ीसदी काम रह गया है और उम्मीद है कि इसे हम जल्द ही पूरा कर लेंगे."

आज ख़त्म होगा इंतज़ार?

उम्मीद की जा रही है 12 दिन की कोशिश आज रंग लाएगी और आज ही ऑपरेशन पूरा हो जाएगा.

आज सुबह उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी भी मौके पर पहुंचे. यहां अधिकारियों और ग्राउंड वर्करों की एक बड़ी टीम मौजूद है.

आज सुबह ही एंबुलेंस और स्वास्थ सुविधाओं को टनल के और करीब लाया गया है.

गुरुवार की सुबह थोड़ी देर के लिए ड्रिलिंग रोकी गयी थी.

प्रोजेक्ट इंचार्ज हरपाल सिंह ने बताया था कि ड्रिलिंग के बीच में लोहे की छड़ें आ गई हैं जिसे मशीन नहीं काट सकती थी, इसलिए ये ड्रिलिंग रोकी गई. इस सरिया को एनडीआरएफ़ की टीम ने काटा.

ड्रिलिंग करके रेस्क्यू पाइप जब डाली जाएगी तो डॉक्टर अंदर जा कर फंसे लोगों के स्वास्थ्य की जांच करेंगे और फिर उन्हें बाहर लाया जाएगा.

बुधवार रात क्या हुआ?

बुधवार को रात में चले ड्रिलिंग के बाद जोजिला टनल के प्रोजेक्ट इंचार्ज हरपाल सिंह ने नई जानकारी देते हुए कहा है कि अभी ड्रिलिंग रोकी गई है लेकिन एक अनुमान के अनुसार आज रात आठ बजे तक ऑपरेशन पूरा हो जाएगा.

प्रोजेक्ट इंचार्ज हरपाल सिंह ने बताया, “हॉरिज़ोंटल ड्रिलिंग के तहत मलबे में 44 मीटर पाइप डाला जा चुका है. उसके आगे जब ड्रिलिंग की तो आगे मलबे में कुछ सरिये के टुकड़े आ गये. ड्रिल करते वक़्त चार सरिया मशीन के सामने आ गयी.”

“ये मशीन सरिया को नहीं काट पाई, जिसके बाद ड्रिलिंग रोकनी पड़ी और मशीन को बाहर निकाला गया.”

“अब उस पाइप के अंदर जाकर एनडीआरफ़ के लोग सरिया काटेंगे.”

उन्होंने बताया, “सरिया कटने के बाद ही मशीन आगे जाएगी. हो सकता है कि एक डेड़ घण्टे में सरिया को काट लिया जाए.”

“एनडीआरफ़ की टीम को पूरा भरोसा है कि वो इन्हें जल्द काट लेगी और फिर जल्द ही मशीन अपना काम करेगी.”

उन्होंने बताया कि 6-6 मीटर की अभी दो पाइप को मलबे में अंदर डालना है.

बुधवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व सलाहकार और उत्तराखंड सरकार के विशेष कार्याधिकारी भास्कर खुल्बे ने बताया था कि कुल 45 मीटर तक ड्रिलिंग पूरी कर ली गई है.

सरकार कराएगी सभी सुरंगों की जांच

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने दुर्घटनाओं से बचाव के लिए देश में बन रही 29 सुरंगों का सेफ़्टी ऑडिट कराने का फ़ैसला लिया है.

सेफ़्टी ऑडिट के इस कार्य में एनएचएआई के अधिकारियों के साथ दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के अधिकारी सहयोग करेंगे.

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ये दोनों संस्थाएं मिलकर जांच कर के एक हफ़्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट जमा करेंगी.

सरकार के बयान के अनुसार, ''निर्माण के दौरान सुरक्षा और उच्चतम गुणवत्ता मानकों का पालन तय करने की ख़ातिर एनएचएआई देश के सभी 29 निर्माणाधीन सुरंगों का सेफ़्टी ऑडिट करेगी.''

इनमें से 12 सुरंगें हिमाचल प्रदेश में हैं, जबकि जम्मू और कश्मीर में छह और शेष सुरंगें उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में हैं.

(आसिफ़ अली के इनपुट्स के साथ)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)