बचपन से लेकर सिनेमा तक, शबाना आज़मी ने साझा कीं कई बातें- इंटरव्यू

बचपन से लेकर सिनेमा तक, शबाना आज़मी ने साझा कीं कई बातें- इंटरव्यू

भारतीय सिनेमा में शबाना आज़मी का 50 साल का लंबा सफर रहा है. उन्होंने साल 1974 में फिल्म 'अंकुर' के लिए नेशनल अवॉर्ड जीता.

वहीं उन्हें साल 2023 में रॉकी और रानी की प्रेम कहानी के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. इसके अलावा भी उन्हें कई पुरस्कारों से नवाज़ा गया है.

मगर शबाना आज़मी के सफर के अहम पड़ाव सिनेमा तक ही सीमित नहीं हैं.

वो बताती हैं कि उनके पिता कैफी आज़मी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य थे. वो 9 साल की उम्र तक एक कम्यून में रहीं, जहां आठ परिवार रहा करते थे.

शबाना आज़मी ने बताया कि औरतों की बराबरी और धार्मिक सदभाव पर उनके नज़रिए और काम की नींव कहां पड़ी?

साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि 'अर्थ' और 'फायर' जैसी फिल्में कैसे चुनीं? उन्होंने बहुत सी दिलचस्प बातें साझा कीं.

देखिए शबाना आज़मी के साथ बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्य की ये विशेष बातचीत.

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