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आम दलित क्या तेज़ी से उभरती हिंदू पहचान का हिस्सा बन पा रहे हैं?
हमारी पांच भाग की सीरीज़ 'हिंदू धर्म: मेरा मर्म' के इस तीसरे भाग में हिंदू धर्म में दलितों के अपनी जगह बनाने और ना बना पाने पर धर्म को छोड़ने का विरोधाभासी अनुभव है.
भारत के चुनावी साल में पहचान एक बड़ा मुद्दा है.
धर्म की जातिगत सीढ़ी में सबसे निचले पायदान पर खड़े आम दलित क्या तेज़ी से उभरती हिंदू पहचान का हिस्सा बन पा रहा हैं?
जाति के फासले पाटने का कोई अलग ज़रिया हो सकता है?
क्या कोई एक तरीक़ा हो सकता है हिंदू होने का?
देखिए हमारी तीसरी कड़ी - दलित पहचान: स्वीकार और तिरस्कार
सीरीज़ की दूसरी कहानी यहां देखिए.
सीरीज़ की पहली कहानी यहां देखिए.
रिपोर्ट: दिव्या आर्य
शूट एडिट: प्रेम भूमिनाथन
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