राहुल गांधी को पीछे बैठाने पर उठे सवाल, कांग्रेस बोली- मोदी ने दिखाई कुंठा

राहुल गांधी

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इमेज कैप्शन, स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी को पांचवीं पंक्ति में सीट दी गई

देश के 78वें स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान लाल क़िले पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की सीट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.

सफेद कुर्ता पायजामा पहने राहुल गांधी को ओलंपिक खिलाड़ियों के बीच पांचवीं पंक्ति में सीट दी गई थी.

यह पहली बार था जब राहुल गांधी बतौर नेता प्रतिपक्ष लाल किले पर आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में पहुंचे थे.

न सिर्फ सोशल मीडिया यूज़र्स बल्कि कांग्रेस पार्टी ने भी अपने नेता को पिछली पंक्ति में बिठाए जाने पर सवाल उठाए हैं.

कांग्रेस-बीजेपी ने क्या कहा?

राहुल गांधी

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कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "नरेंद्र मोदी एक छोटी मानसिकता के और छोटे दिल के आदमी हैं और इसका प्रमाण वो खुद ही बार-बार दे देते हैं. एक बात और भी है कि छोटे मन के लोगों से बड़ी बातों की उम्मीद नहीं करनी चाहिए."

उन्होंने कहा, "स्वतंत्रता दिवस समारोह पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पांचवीं लाइन में बिठाकर नरेंद्र मोदी आप ने अपनी कुंठा तो दिखा दी, लेकिन राहुल गांधी को कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे पांचवीं पंक्ति में बैठे या पचासवीं में बैठें."

"वह जननायक हैं. वह उसी शिद्दत से जनता के मुद्दे उठाएंगे जैसे वो उठा रहे हैं."

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श्रीनेत ने कहा, "पहली पंक्ति में सारे कैबिनेट मंत्री बैठे हुए थे, लेकिन नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ही पांचवीं पंक्ति में नहीं बैठाया गया, खड़गे जी के लिए भी सीट पांचवीं पंक्ति में ही थी."

उन्होंने कहा, "एक बेवकूफी का बयान रक्षा मंत्रालय की तरफ से आया है. ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि हम ओलंपियंस को इज्जत और सम्मान देना चाहते थे. बिल्कुल देना चाहिए. ओलंपियंस को सम्मान दीजिए."

"विनेश फोगाट को भी सम्मान दीजिए, लेकिन क्या ये सम्मान अमित शाह, जेपी नड्डा, निर्मला सीतारमण और जयशंकर नहीं देना चाहते थे. आपके बयान आपकी कलई और खोल रहे हैं."

सुप्रिया श्रीनेत
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समाचार चैनल न्यूज़ 24 पर एक डिबेट के दौरान बीजेपी प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस को इस बात की तो चिंता है कि राहुल गांधी कहां बैठे, लेकिन पश्चिम बंगाल में जो हुआ, उस पर एक शब्द नहीं बोलेंगे.

उन्होंने कहा, "जब राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष नहीं थे. 2019 से भी पहले, वो नितिन गडकरी के साथ पहली पंक्ति में बैठे हैं...राहुल गांधी को हमेशा सम्मान दिया गया है. पिछली बार खड़गे जी पहली पंक्ति में बैठे थे."

पूनावाला ने श्रीनेत से पूछा कि क्या डिफेंस मंत्रालय ने राहुल गांधी को अगली पंक्ति में सीट ऑफर नहीं की थी? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि ये 'सरासर झूठ' है.

श्रीनेत ने कहा, "सबकी सीट नामांकित होती है और राहुल गांधी की सीट पांचवी पंक्ति में थी. जब वो अपने सीट पर बैठ चुके थे. तब शायद आधे पौने घंटे बाद उनसे किसी ने कहा कि आप आगे आ जाइये."

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने लिखा, "उन्हें लगता है कि वो बादलों की ओट में सूरज को छुपा देंगे, उन्हें लगता है कि पांचवीं पंक्ति में बैठा देने से राहुल गांधी के वकार में कमी आ जाएगी, तो ये उनकी गलतफ़हमी है.”

वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सवाल किया है कि क्या राजनाथ सिंह बदला ले रहे हैं?

उन्होंने ट्वीट किया,"क्या राजनाथ सिंह अग्निवीर पर अपने झूठों के लिए राहुल गांधी से घिरने का बदला ले रहे हैं? या फिर ये भारत के प्रधानमंत्री की वही छोटी मानसिकता है? मुझे स्पष्ट तौर पर याद है कि जब यूपीए सत्ता में थी तो बीजेपी के नेताओं को पहली या फिर दूसरी पंक्ति में बैठाया जाता था.खैर, आप राहुल जी के प्रति जितनी तुच्छता दिखाएंगे, वो लोगों के दिलों में उतनी ही बड़ी जगह बनाते जाएंगे."

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सोशल मीडिया पर क्या कह रहे हैं लोग

कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी

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बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने लिखा, "राहुल गांधी जी को पीछे बैठाना केंद्र सरकार की मजबूरी थी. सच को सामने देखकर झूठ का आत्मविश्वास हिल जाता है."

निधि सिंह राठौर नाम की एक यूजर ने लिखा, "मोदी ने राहुल जी का अपमान करने के चक्कर में खुद की मानसिकता दर्शा दी कि वो गांधी परिवार से कितनी नफ़रत करते हैं, लेकिन राहुल गांधी जी को फर्क नहीं पड़ता. मेहनत से मुकाम हासिल करने वालों को पूरा देश सलाम करता है."

उन्होंने कहा, "नेता प्रतिपक्ष का प्रोटोकॉल है कि उन्हें मंत्रियों की पंक्ति में बैठाया जाए लेकिन मोदी सरकार ने राहुल गांधी से फिर अपनी खुन्नस दिखा दी. सरकार बहादुर, देश देख रहा है."

संतोष त्रिपाठी नाम के यूजर ने लिखा, "नेता प्रतिपक्ष को आप लोग इस तरह से पीछे जगह देते हो बैठने के लिए, ऊपर से मजाक भी बनाते हो. यह राहुल गांधी नहीं, लोकतंत्र का मजाक बनाया जा रहा है."

शिवम यादव नाम के एक यूजर ने लिखा, "नेता विपक्ष राहुल गांधी जो को इस तरह से सबसे पीछे बैठाना, क्या ये सही है? अगर उनको सम्मान नहीं देना था, तो आमंत्रित ही नहीं करना चाहिए था."

नेता प्रतिपक्ष के विशेषाधिकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राहुल गांधी

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद 2014 के बाद से खाली पड़ा था, क्योंकि किसी भी पार्टी के पास इसके लिए पर्याप्त सांसद मौजूद नहीं थे.

नेता प्रतिपक्ष के बनने के लिए किसी भी पार्टी के पास संसद की 10 फीसदी यानी 55 सीटें होनी चाहिए. 2014 में कांग्रेस को 44 और 2019 में 52 सीटें मिली थीं. यह वजह थी कि कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष के लिए दावेदारी पेश नहीं कर सकी थी.

2024 के आम चुनावों में कांग्रेस को 99 सीटें मिलीं, जिसके बाद राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष बने. पहली बार राहुल गांधी ने संसद में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर संवैधानिक पद लिया है.

संसद में विपक्ष के नेता का भूमिका काफ़ी अहम होती है. वो संसद में सभी विपक्षी दलों की आवाज़ तो बनते ही हैं साथ ही उनके पास अपनी शक्ति और विशेषाधिकार होते हैं.

विपक्ष का नेता कई प्रमुख समितियों जैसे पब्लिक अकाउंट, पब्लिक अंडरटेकिंग और एस्टिमेट पर बनाई गई कमिटी का हिस्सा होता है.

विपक्ष के नेता की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका संयुक्त संसदीय समितियों और चयन समितियों में होती है.

ये चयन समितियां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), केंद्रीय सतर्कता आयोग, केंद्रीय सूचना आयोग, लोकपाल, साथ ही चुनाव आयुक्तों और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष जैसे काफ़ी महत्वपूर्ण पदों की नियुक्ति करती हैं.

विपक्ष का नेता एक कैबिनेट रैंक का पद है, जिसके अपने भत्ते हैं. इस पद पर जो भी व्यक्ति होता है, उसे संसद सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन अधिनियम 1954 की धारा तीन में दर्ज वेतन और हर दिन के भत्ते दिए जाते हैं.

(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित)

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