'भूतहा गांव' कैसे बन गई उत्तराखंड के इन गांवों की पहचान?
'भूतहा गांव' कैसे बन गई उत्तराखंड के इन गांवों की पहचान?
उत्तराखंड के पहाड़, जहां कभी हर घर में चूल्हा जलता था और बच्चों की आवाज़ें दूर तक गूंजती थीं, आज यहां के कई गांवों में ख़ामोशी पसरी रहती है.
पलायन ने यहां के कई गांवों को 'भूतहा गांव' बना दिया. करीब दो दर्जन परिवारों वाला धूर गांव, आज सिर्फ़ 6 परिवारों तक सिमट चुका है.
बडोली गांव, जहां कभी 60 परिवार रहते थे. यहां सिर्फ़ 20 परिवार बचे हैं और उनमें भी ज़्यादातर बुज़ुर्ग हैं. कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां कोई नहीं रहता.
हालांकि, पिछले कुछ समय से पलायन कर चुके लोगों को वापस लाने की कोशिशें भी हुई हैं. कुछ लोग वापस भी लौट रहे हैं और पांव जमाने की कोशिश कर रहे हैं.
रिपोर्ट: आसिफ़ अली, बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए
आवाज़: नवीन नेगी
वीडियो एडिट: सुखमन दीप सिंह
(बीबीसी के लिए कलेक्विट न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित)



