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गीज़ा का पिरामिड: दुनिया के इस अजूबे पर क्यों मंडराया ख़तरा? - दुनिया जहान
मिस्त्र के गीज़ा का ग्रेट पिरामिड, जिसे लगभग साढ़े चार हज़ार साल पहले बनाया गया था, काहिरा के दक्षिण पश्चिम में फैले रेगिस्तान में यह ग्रेट पिरामिड एक महान सभ्यता की काबीलियत और जीवटता के प्रतीक के रूप में खड़ा है.
लेकिन ग्रेट पिरामिड और उसके पास ही बने दो अन्य पिरामिड अब वैसे नहीं रहे जैसे पहले थे. पिछली कुछ सदियों के दौरान उन्हें काफ़ी क्षति पहुंची है.
उनके भीतर रखे ख़जाने लूट लिए गए और ढांचे की बाहरी परत को भी नुकसान पहुंचाया गया. गीज़ा क मेनकौरे पिरामिड को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है क्यों कि मिस्त्र का एंटीक्वीटीज़ डिपार्टमेंट या पुरातन विभाग इस पिरामिड का जीर्णोद्धार करना चाहता है यानि उसकी मरम्मत और रेनोवेशन करना चाहता है.
मिस्त्र के पुरातन विभाग के प्रमुख इस योजना को सदी का एक सबसे बड़ा प्रोजेक्ट बताते हुए कह रहे हैं कि यह मिस्त्र की ओर से विश्व को दिया जाने वाला तोहफ़ा होगा.
लेकिन कई लोग मानते हैं कि जीर्णोद्धार का यह प्रोजेक्ट पुरातत्वीय संरक्षण के नियम और सिद्धांतों के अनुसार नहीं है.
देश के भीतर और बाहर इस योजना का विरोध हो रहा है जिसकी वजह से शायद प्रशासन इस विषय में दोबार सोचने को मजबूर हो सकता है.
इस हफ़्ते दुनिया जहान में हम यही जानने की कोशिश करेंगे कि मिस्त्र के पिरामिड के साथ क्या हो रहा है?
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