ये कहानी अलग है, इसमें बीमारी है पर बेचारगी नहीं
ये कहानी अलग है, इसमें बीमारी है पर बेचारगी नहीं
डॉक्टरों ने इस मां से कहा था, आपकी बेटी 'कांच की गुड़िया' है. एक ऐसा सच, जो किसी भी मां को तोड़ सकता था. लेकिन इस मां ने टूटना नहीं चुना. उसने उस सच को स्वीकारा और डर को प्यार में बदल दिया.
29 साल की गिरिजा को ऑस्टियोजेनेसिस इम्परफेक्टा है. इस वजह से वह न तो चल सकती हैं और न ही ठीक से बैठ पाती हैं.
मां-बेटी की बहुत सी कहानियां आपने सुनी होंगी, लेकिन ये कहानी अलग है. क्योंकि इसमें बीमारी है, पर बेचारगी नहीं. इसमें दर्द है, पर शिकवा नहीं. ये कहानी सहानुभूति नहीं मांगती, ये कहानी हिम्मत सिखाती है.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी ने गिरिजा और उनकी मां से बात की और उनके सफ़र के बारे में जाना.
रिपोर्ट: शिल्पा ठाकुर
वीडियो जर्नलिस्ट: अरीबा अंसारी
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित



