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भारत और अमेरिका के कमज़ोर रिश्तों से पाकिस्तान को ये बड़े फ़ायदे - द लेंस
अमेरिका में 2019 में 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम में डोनाल्ड ट्रंप को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने अबकी बार ट्रंप सरकार का नारा दिया था.
अगले साल जब ट्रंप भारत आए तो अहमदाबाद में उनके स्वागत में नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम आयोजित हुआ.
मीडिया में दोनों के रिश्तों के लेंस से भारत-अमेरिका संबंधों को देखा जाने लगा. मगर पिछले लगभग छह महीनों से ऐसा लग रहा है कि इस रिश्ते की गाड़ी को बैक गियर लग चुका है.
ट्रंप भारत समेत कई देशों पर टैरिफ़ का ऐलान कर चुके हैं.
पहले उन्होंने 90 दिनों की छूट दी, मगर 30 जुलाई को भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ़ लगा दिया, साथ ही रूस से तेल ख़रीद को लेकर पेनल्टी भी लगाई.
और कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान के साथ मिलकर वहाँ के 'तेल भंडारों को डेवेलप' करने का सौदा पूरा कर लिया. इन दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता भी हो चुका है.
अब सवाल केवल भारत-अमेरिका संबंधों का नहीं बल्कि भारत के व्यापारिक रिश्तों का भी है.
सवाल ये भी हैं कि रूस से भारत के ऊर्जा रिश्ते कितने अहम हैं? पाकिस्तान और अमेरिका के बीच हुआ तेल से जुड़ा समझौता भारत के लिए क्या मायने रखता है?
द लेंस के आज के एपिसोड में इन सभी मुद्दों पर चर्चा की गई.
इस चर्चा में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा के साथ शामिल हुए इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस की विज़िटिंग प्रोफ़ेसर शॉन रे, हिंदू बिज़नेस लाइन की रेज़िडेंट एडिटर पूर्णिमा जोशी, पत्रकार ज़ुबैर अहमद, बीबीसी उर्दू के सीनियर न्यूज़ एडिटर आसिफ़ फ़ारूक़ी और दिल्ली से इंडिपेंडेंट एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के चेयरमैन नरेंद्र तनेजा.
प्रोड्यूसरः सईदुज़्जमान
गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव
वीडियो एडिटिंगः सुमित वैद्य
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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