इन नए नियमों से आपकी इन हैंड सैलरी घटेगी या बढ़ेगी- पैसा वसूल
केंद्र सरकार ने हाल ही में नए श्रम कानून लागू किए हैं. अभी तक कामगारों के लिए केंद्र सरकार की तरफ़ दे दो दर्जन से अधिक क़ानून प्रभाव में थे.
सरकार का दावा है ये क़ानून बहुत ज़्यादा थे और कन्फ्यूजन पैदा करने वाले भी. इन्हें आसान बनाने के लिए ही चार नए लेबर कोड अमल में लाए गए हैं. अब देखते हैं इन क़ानूनों का आपकी जेब पर क्या और कितना असर होगा.
टेकहोम सैलरी घटेगी, मगर...
नया लेबर कोड कहता है कि कर्मचारी की बेसिक सैलरी टोटल पैकेज की कम से कम 50 परसेंट होनी ज़रूरी है. यानी अगर आपका टोटल पैकेज 10 लाख रुपये है तो आपकी बेसिक सैलरी कम से कम 5 लाख रुपये होगी.
अगर आपकी बेसिक सैलरी अभी 50 फ़ीसदी से कम है तो आपकी टेकहोम सैलरी घट जाएगी. इसका फ़ायदा आपको सोशल सिक्योरिटी में मिलेगा. बेसिक सैलरी बढ़ेगी तो प्रोविडेंट फंड भी बढ़ जाएगा.
इसे ऐसे समझिए. माना आपकी मंथली सैलरी एक लाख रुपये है, जिसमें से अभी आपकी कंपनी सिर्फ़ 35 फ़ीसदी यानी 35 हज़ार ही बेसिक सैलरी के रूप में देती है.
अब नए कोड के मुताबिक आपकी बेसिक सैलरी कम से कम 50 हज़ार रुपये हो जाएगी. इस हिसाब से पहले आपका पीएफ़ 35 हज़ार का 12 परसेंट यानी 4,200 रुपये कटता था, लेकिन नई बेसिक सैलरी यानी 50 हज़ार के हिसाब से आपका पीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन बढ़कर 6,000 रुपये हो जाएगा.
अभी तो आपके पर्स में पैसे कम आएंगे, लेकिन भविष्य के लिए पीएफ़ के रूप में रकम बढ़ जाएगी. इसका एक और फ़ायदा मिलेगा, ग्रेच्युटी में.
क्योंकि ग्रेच्युटी भी बेसिक सैलरी के बेस पर ही कैलकुलेट होती है इसलिए अगर बेसिक सैलरी बढ़ती है तो ग्रेच्युटी की रकम भी बढ़ जाएगी.
मिनिमम वेज की गारंटी
फिर चाहे आप ऑर्गनाइज़्ड सेक्टर में काम करते हों या फिर अनऑर्गनाइज़्ड सेक्टर में. सरकार का दावा है कि अब हर कामगार को मिनिमम वेज की गारंटी दी जाएगी.
समय पर मिलेगी सैलरी
लेबर कोड के ज़रिये मजदूरी या सैलरी को समय पर देना अनिवार्य किया गया है. डेली वर्कर को उनकी शिफ्ट खत्म होने पर पैसा देना ज़रूरी है और इसी तरह दूसरे कर्मचारियों को अगले महीने के दिनों के भीतर मंथली सैलरी देनी होगी
काम के घंटे तय
अब आप दिन में आठ से लेकर 12 घंटे तक काम कर सकते हैं, लेकिन एक हफ्ते में काम के घंटों की सीमा अधिकतम 48 घंटे तय की गई है. यानी अगर शिफ्ट 12 घंटों की है तो एम्प्लॉयर हफ्ते में सिर्फ़ चार दिन ही काम ले पाएंगे.
ओवरटाइम के लिए भी नियम तय किए गए हैं. इसके मुताबिक, ओवरटाइम के लिए कर्मचारी की सहमति को ज़रूरी किया गया है. अगर आप ओवरटाइम करते हैं तो एक्स्ट्रा घंटों के बदले डबल पेमेंट मिलेगी.
महिलाओं के लिए नियम
नए लेबर कोड में महिलाओं के लिए भी कई प्रावधान किए गए हैं. जेंडर के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होगा. न ही रिक्रूटमेंट में, न सैलरी में और ना ही वर्किंग कंडीशंस में.
महिलाएं हर सेक्टर में नाइट शिफ्ट भी कर सकेंगी. बशर्ते इसके लिए महिला कर्मचारी से लिखित में सहमति लेनी होगी और दूसरा उनकी सेफ्टी, ट्रांसपोर्टेशन और सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम हों.
हालाँकि लेबर कोड में हायर एंड फायर के कुछ नियमों को लेकर श्रम संगठन भारी विरोध कर रहे हैं और इनके ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरने की चेतावनी भी दे रहे हैं.
प्रेजेंटर- प्रेरणा
प्रोड्यूर- दिनेश उप्रेती
एडिटर- अदीब अनवर
(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.)



