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तुर्की की सरकारी एयरोस्पेस कंपनी पर हमला, चार की मौत और कई ज़ख़्मी
- टर्किश एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ के मुख्यालय के बाहर धमाका और गोलीबारी की ख़बर
- तुर्की के अधिकारियों ने इसे 'आतंकवादी हमला' बताया
- अधिकारियों के मुताबिक दो हथियारबंद हमलावर थे, एक पुरुष और एक महिला
तुर्की के अंकारा में बुधवार को एक सरकारी विमानन कंपनी के बाहर धमाका हुआ है. स्थानीय मीडिया के मुताबिक़ टर्किश एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ के बाहर धमाके के साथ गोलीबारी भी हुई है.
इस हमले में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 14 लोग घायल हुए हैं. यह कंपनी उत्तर-पश्चिम अंकारा से 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.
तुर्की के गृह मंत्री अली यर्लिकया ने अपने एक्स अकाउंट पर इस हमले को आतंकवादी हमला बताया है. उन्होंने लिखा है, ''इस हमले में कुछ शहीद हुए हैं और कई ज़ख़्मी हुए हैं.''
सोशल मीडिया पर चल रहे सीसीटीवी के फुटेज में देखा जा सकता है कि विमानन कंपनी के भीतर दो हथियारबंद आदमी हैं.
बीबीसी के कूटनीतिक संवाददाता पॉल एडम्स का कहना है कि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि हमलावर कितने थे.
हालाँकि तुर्की के गृह मंत्री ने दो हमलावरों के होने की बात कही है.
तुर्की के लिए अहम है यह एयरोस्पेस कंपनी
ये हथियारों और एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़ी सरकारी कंपनी है, जिसका मुख्यालय राजधानी अंकारा के नजदीक है.
ये कंपनी सैन्य, नागरिक विमान और हेलिकॉप्टर बनाती है.
इसके अलावा कंपनी तुर्की के सेना के लिए ड्रोन सिस्टम भी बनाती है. ये कंपनी दुनिया के कई देशों को हथियार और ड्रोन का निर्यात भी करती है.
तुर्की ने दुनिया के दूसरे देशों पर हथियारों की निर्भरता कम करने के लिए ये कंपनी बनाई थी. इस कंपनी के निर्माण में नेटो के एक सदस्य देश की अहम भूमिका रही है और यहां अमेरिका के एफ़-16 लड़ाकू विमानों का निर्माण भी होता है. साथ ही इस कंपनी में पुराने लड़ाकू विमानों को आधुनिक बनाने का काम भी होता है.
बीबीसी के रक्षा संवाददाता फ़्रैंक गार्डनर का कहना है कि तुर्की में आतंकवादी हमला कोई नई बात नहीं है.
ऐतिहासिक रूप से ऐसे हमलों के लिए कुर्दिश अलगाववादियों को ज़िम्मेदार ठहराया जाता रहा है. कुर्दिश अलगाववादियों का कैंप उत्तरी सीरिया में है. इन इलाक़ों में तुर्की की वायु सेना लगातार एयर स्ट्राइक करती रही है.
लेकिन तुर्की में इस्लामिक स्टेट (आईएस) की भी मौजूदगी है.
जिस टर्किश एयरोस्पेस कंपनी पर हमला हुआ है, उसके बनाए ड्रोन से आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच युद्ध का पूरा समीकरण बदल गया है.
रूस ने जब यूक्रेन पर हमला किया था तब शुरुआती दिनों में तुर्की में बने ड्रोन से ही रूसी टैंक्स को निशाने पर लिया जाता था. बाद में यूक्रेन ने ख़ुद ही ड्रोन बनाना शुरू कर दिया.
अब इस मामले की जांच शुरू हो गई है. जाँच से ही पता चलेगा कि इस हमले से किसे फ़ायदा होगा और ये हमला क्यों किया गया.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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