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माओवादियों की पहली महिला 'मिलिट्री' कमांडर की कहानी
माओवादियों की पहली महिला 'मिलिट्री' कमांडर की कहानी
भारत सरकार ने एलान किया है कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को जड़ से समाप्त कर दिया जाएगा.
देवक्का- वो पहली महिला हैं जो माओवादियों की मिलिट्री कमांडर बनीं.
13 साल की उम्र में माओवादियों से जुड़ने के बाद उन्होंने 25 साल जंगलों में बिताए, और फिर सरकार की नीति के तहत आत्म-समर्पण कर दिया.
वो अब शम्बाला देवी नाम के साथ रह रही हैं.
छत्तीसगढ़ की इस महिला ने क्यों आम आदिवासी जीवन छोड़ कर हिंसा और राजनीति का खतरनाक रास्ता चुना और फिर छोड़ भी दिया?
इस ख़ास ग्राउंड रिपोर्ट में देखिए शम्बाला की कहानी.
रिपोर्ट: दिव्या आर्य
शूट, एडिट: प्रेम भूमिनाथन
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित