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टॉयलेट ना होने के कारण परेशानियों से जूझतीं युवा लड़कियों ने सुनाई आपबीती
19 साल की आयशा मुंबई में 10x10 के एक कमरे में रहती हैं, उनके घर में शौचालय नहीं है.
वो अपने इलाक़े के पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल करती हैं.
लेकिन इसके साथ उनकी सुरक्षा का मुद्दा भी जुड़ा है.
वो इस साल पहली बार लोकसभा चुनाव में वोट डालेंगी.
उनका परिवार क़रीब 15 हज़ार रुपये महीना कमाता है.
ऐसे में पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल उनके परिवार का आर्थिक बोझ बढ़ाता है. साथ ही सुरक्षा एक दूसरा मुद्दा है.
आयशा जैसी कई लड़िकयां हैं जिन्हें अपना दिन टॉयलेट की सुविधा के अनुसार तय करना होता है.
भारत, संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को लेकर प्रतिबद्द है.साल 2030 तक भारत को उन्हें हासिल करना है, इनमें से एक लक्ष्य स्वच्छता भी है.
नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे-5 के मुताबिक भारत की 70 फ़ीसदी आबादी बेहतर स्वच्छता सुविधा वाले घरों में रहती है.
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ़ शौचालय बनवा देना काफ़ी नहीं है. देखिए यह रिपोर्ट.
रिपोर्ट - अनघा पाठक
शूट- मंगेश सोनावणे
एडिट- सदफ़ ख़ान
प्रोड्यूसर- सुशीला सिंह
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