चंद्र सिंह गढ़वाली: वो क्रांतिकारी जिन्होंने आज़ाद भारत में भी दो बार काटी जेल- विवेचना

वीडियो कैप्शन, विवेचना में इस बार रेहान फ़ज़ल बता रहे हैं चंद्र सिंह गढ़वाली की कहानी.
चंद्र सिंह गढ़वाली: वो क्रांतिकारी जिन्होंने आज़ाद भारत में भी दो बार काटी जेल- विवेचना

सन 1891 में रौणीसेरा मासो, गढ़वाल में जन्मे चंद्र सिंह गढ़वाली 3 सितंबर, 1914 को भारतीय सेना में शामिल हुए थे.

पहले विश्व युद्ध में सबसे पहले उन्हें फ़्रांस भेजा गया.

इसके बाद उन्होंने अंग्रेज़ों की तरफ़ से मेसोपोटामिया की लड़ाई में हिस्सा लिया जिसमें उनकी जीत हुई. उसके बाद उन्हें सन 1918 में बग़दाद की लड़ाई में हिस्सा लेने भी भेजा गया.

विश्व युद्ध से लौटने के बाद सन 1920 में उन्हें वज़ीरिस्तान भेजा गया.

जब पेशावर से ब्रिटिश सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन की ख़बरें आने लगीं तो उन्हें वहाँ भेजा गया.

इस फ़ौजी बग़ावत की ख़बर जंगल में आग की तरह पूरे भारत में फैल गई.

24 अप्रैल को सुबह आठ बजे गढ़वाली सैनिकों को फिर से शहर जाने का आदेश दिया गया लेकिन उन्होंने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया.

विवेचना में इस बार रेहान फ़ज़ल बता रहे हैं चंद्र सिंह गढ़वाली की कहानी.

वीडियो: सदफ़ ख़ान

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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