बेंगलुरु में फ़िल्मी अंदाज़ में 7 करोड़ रुपये की लूट, पुलिस ने इस तरह अभियुक्तों को पकड़ा

कैश

इमेज स्रोत, Imran Qureshi

इमेज कैप्शन, पुलिस ने लूटी गई रक़म का बड़ा हिस्सा बरामद करने की बात भी कही है
    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बेंगलुरु से बीबीसी हिन्दी के लिए

बेंगलुरु पुलिस ने कहा है कि उसने एक बैंक से दूसरे बैंक तक नकदी ले जाने वाली गाड़ी से सिनेमाई अंदाज़ में 7.11 करोड़ रुपये की लूट के मामले को सुलझा लिया है. साथ ही इससे जुड़े नौ अभियुक्तों को गिरफ़्तार भी कर लिया गया है.

पुलिस ने बताया है कि लूट के पैसों में से 6.85 करोड़ रुपये बरामद भी कर लिए गए हैं.

बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जाँच सही दिशा में है और बाक़ी राशि के साथ ही इस अपराध में शामिल अन्य लोगों को भी जल्द पकड़ लिया जाएगा.

जिन नौ लोगों को गिरफ़्तार किया गया है उनमें गोपाल प्रसाद गाड़ी की सुरक्षा करते थे, ज़ेवियर कैश मैनेजमेंट सर्विसेज़ (सीएमएस) में रह चुके थे और अन्नप्पा नाइक बेंगलुरु के पश्चिमी इलाक़े के एक पुलिस थाने में तैनात थे.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

पुलिस ने इस मामले को सुलझाने के लिए कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और गोवा सहित दक्षिण भारत के सभी राज्यों में अपने 200 अधिकारियों और जवानों को लगाया था.

कमीश्नर पुलिस

इमेज स्रोत, Imran Qureshi

इमेज कैप्शन, बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर सीमांत सिंह (बाएं से दूसरे) ने घटना के बारे में विस्तृत जानकारी दी है

लुटेरों ने पैसे लूटने के बाद अपनी गाड़ी बदली, फ़र्ज़ी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया और ऐसी जगहों पर रुककर नकदी के बक्से बदले जहां सीसीटीवी कैमरे की निगरानी या तो नहीं थी या फिर न के बराबर थी.

यह वारदात बुधवार दोपहर क़रीब 12 बजकर 48 मिनट पर हुई, लेकिन पुलिस आयुक्त के मुताबिक़ सीएमएस नाम की एजेंसी ने घटना की सूचना पुलिस को दोपहर क़रीब 1 बजकर 20 मिनट पर दी.

पुलिस आयुक्त ने बताया कि गैंग के सदस्यों ने वैन चालक को बंदूक़ दिखाकर कैश लूटा था.

पुलिस के अनुसार, यह लूट बेंगलुरु शहर के बीचोंबीच दिनदहाड़े हुई, जिसके बाद लुटेरों को पकड़ने के लिए एक बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया गया.

बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने बीबीसी को बताया कि बुधवार दोपहर एक एसयूवी में सवार छह लोगों ने एक कैश ट्रांसपोर्ट वैन को एक व्यस्त सड़क पर रोक लिया.

उस समय वह ट्रांस्पोर्ट वैन एक बैंक शाखा से दूसरी बैंक शाखा तक कैश ले जा रही थी.

वैन में एक ड्राइवर, एक कैश कस्टोडियन और दो हथियारबंद सुरक्षा गार्ड मौजूद थे.

लुटेरों ने ख़ुद को बताया रिज़र्व बैंक के अधिकारी

एक पुलिस वैन की छत पर लगे पुलिस सायरन की तस्वीर

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, बेंगलुरु पुलिस के मुताबिक़, लुटेरों को पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर एक अभियान शुरू किया गया है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पुलिस कमिश्नर के अनुसार लुटेरों ने वैन में मौजूद लोगों से कहा कि वे भारतीय रिज़र्व बैंक के अधिकारी हैं और उन्होंने यह देखने के लिए वैन को रोका है कि इतनी बड़ी रक़म ले जाने के लिए उनके पास सही दस्तावेज़ हैं या नहीं.

शुरुआती जानकारी के मुताबिक़ इस गिरोह ने कैश कस्टोडियन और गार्ड्स को कहा कि वे अपने हथियार वैन में छोड़ दें और एसयूवी में बैठ जाएं. और ड्राइवर को कहा गया कि वह नकदी के साथ वैन चलाता रहे.

पुलिस के मुताबिक़, लुटेरों ने ख़ुद को भारतीय रिज़र्व बैंक के अधिकारी बताकर लालबाग से सटे अशोक पिलर रोड पर गाड़ी रोकी. उन्होंने दो सुरक्षा गार्डों और गाड़ी के संरक्षक को उतरने और अपनी एसयूवी में बैठने के लिए कहा.

गैंग के एक सदस्य को नकदी ले जाने वाले वाहन में बैठा दिया गया. एसयूवी आगे बढ़ी और फिर तीनों कर्मचारियों को निम्हांस बस स्टॉप के पास उतार दिया. इसके बाद गैंग एसयूवी को बेंगलुरु डेयरी सर्कल के फ्लाईओवर की ओर ले गया जहां बहुत कम सीसीटीवी कैमरे थे.

'गाड़ियां बदलीं, कैश ट्रांसफ़र किया'

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने कहा कि सीएमएस एजेंसी ने लोकेशन डीजे हल्ली बताई थी जो शहर के पूर्वी हिस्से में है, जबकि घटना अशोक पिलर पर हुई थी जो दक्षिणी हिस्से में है.

उनका कहना है, "इस मामले में एजेंसी की भूमिका की जांच की जा रही है. नकदी ट्रांसफ़र के दौरान आरबीआई के कई नियमों का उल्लंघन हुआ है. उन्हें क्लीन चिट नहीं दी जा सकती."

सीमांत सिंह ने आरबीआई सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि कैश वैन में नकदी के बक्सों और कर्मचारियों के लिए दो अलग-अलग कंपार्टमेंट होने चाहिए. पैसेंजर कंपार्टमेंट में दो संरक्षक, दो सशस्त्र गार्ड और चालक के लिए जगह होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि दोनों कंपार्टमेंट में सीसीटीवी होना चाहिए. हर कैश वैन में जीपीएस होना चाहिए जिसे जियो-फेंसिंग के साथ लाइव मॉनिटर किया जाए और रास्ते में पड़ने वाले नज़दीकी पुलिस स्टेशन का संकेत भी हो. वैन को एक ही रास्ते पर और एक ही समय पर बार-बार नहीं चलना चाहिए क्योंकि इससे उनकी आवाजाही का अंदाज़ा लग जाता है.

इस मामले में बीबीसी की ओर से सीएमएस एजेंसी के अधिकारियों की प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की जा रही है, उनसे प्रतिक्रिया मिलने पर यह रिपोर्ट अपडेट की जाएगी.

जी परमेश्वर

इससे पहले एक पुलिस अधिकारी ने नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि लूट में इस्तेमाल की गई एसयूवी पर नकली नंबर प्लेट और 'भारत सरकार' का स्टिकर लगा था.

इस अधिकारी ने यह भी बताया था कि पुलिस इसकी भी जांच कर रही है कि क्या कंपनी के कर्मचारियों का इस लूट से कोई लेना-देना हो सकता है?

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पत्रकारों को बताया था कि पुलिस ने लूट में इस्तेमाल की गई एसयूवी बरामद कर ली है.

लेकिन गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि संदिग्धों ने भाग निकलने के लिए किस वाहन का इस्तेमाल किया.

उन्होंने पत्रकारों को कहा, "यह पुष्टि हो गई है कि उन्होंने गाड़ियां बदलीं और कैश को ट्रांसफ़र किया."

उन्होंने भरोसा जताया कि पुलिस इस मामले को जल्द सुलझा लेगी, जैसे उसने हाल ही में कर्नाटक में अन्य हाई-प्रोफाइल बैंक डकैतियों को सुलझाया है.

इससे पहले मई में विजयपुरा ज़िले के एक बैंक से 59 किलो सोना चोरी हुआ था, जिसकी क़ीमत 53.26 करोड़ रुपये थी. इस मामले में पुलिस ने अब तक 39 किलो सोना और कुछ नकदी बरामद कर ली है. इस केस में 15 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है, जिनमें दो पूर्व कर्मचारी भी शामिल हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)