ऑनलाइन गेमिंग पर 28 प्रतिशत जीएसटी को लेकर क्यों मचा है हंगामा

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- Author, हिमांशु भयाणी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
मंगलवार को जीएसटी काउंसिल की 50वीं बैठक थी और इस बैठक के दौरान ही ऑनलाइन गेमिंग को लग्ज़री कैटिगरी यानी 28 प्रतिशत कर के दायरे में लाया गया.
इस बैठक में कुछ चीज़ों मसलन बिना पैक किए हुए तले हुए पापड़, चिप्स, नाश्ते, एंब्रोइडरी में इस्तेमाल होने वाली ज़री, मछली का पाउडर, भट्ठियों में इस्तेमाल होने वाले पदार्थ, सेटेलाइट उपकरण और कैंसर की कुछ जीवनरक्षक दवाइयों को जीएसटी में पूरी तरह से छूट दी गई है.
लेकिन सबसे ज़्यादा चर्चा ऑनलाइन गेमिंग को लेकर हो रही है. इस पर बात करने से पहले हमें यह देखना होगा कि नए प्रावधान से क्या कुछ होगा?
पहले कोई व्यक्ति अगर सौ रुपये की बाज़ी किसी ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर लगता था तो प्लेटफॉर्म को करीब 1.8 रुपया टैक्स चुकाना होता था, वहीं अब उन्हें 16 गुना ज़्यादा यानी कि 28 रुपया कर अदा करना होगा.
गेमिंग उद्योग का हिस्सा रह चुके निवेशक, शार्क टेंक और भारत पे के संस्थापकों में एक स्टार्ट-अप आइकन अश्निर ग्रोवर को लगता है कि ऑनलाइन गेमिंग उद्योग का अब सत्यानाश हो चुका है और भारत के एक हज़ार करोड़ डॉलर वाली ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री का राम नाम सत्य हो चुका है.
ग्रोवर ने इसको लेकर एक ट्वीट किया है.
उन्होंने लिखा है, "अगर कोई ऑनलाइन गेमर 100 रुपया लगाता है तो उसमें कर के तौर पर 28 रुपये सरकार ले जाएगी. यानी गेमर का 72 रुपया दांव पर होगा. अगर वे प्लेटफॉर्म का शुल्क चुकाने के बाद 54 रुपया जीतते हैं तो उनमें से उन्हें 30 प्रतिशत राशि टीडीएस का भुगतान करना होगा."
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हालांकि जनता की ओर से ग्रोवर को ट्विटर पर सरकार के इस निर्णय का समर्थन करने वाली प्रतिक्रियाएं भी मिली हैं.
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वित्तीय मायाजाल
कई बड़ी वैश्विक एजेंसियों के मुताबिक़ वैश्विक गेमिंग उद्योग साल 2022 के अंत तक क़रीब 25,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था.
इसके 2023 तक 28, 200 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है.
2030 तक इसके 66,600 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है यानी 2023 से 2030 तक गेमिंग उद्योग औसतन 13.1 प्रतिशत की रफ़्तार से बढ़ रहा है.
वहीं, भारत में 2022 के अंत तक यह 13,500 करोड़ रुपये का था, जिसके 2030 तक 16,700 करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है और साल 2025 के अंत तक इसके 23,100 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.
वैश्विक ऑनलाइन गेमिंग उद्योग में भारत की हिस्सेदारी करीब 0.7 प्रतिशत है जो नहीं के बराबर है.
हालांकि, भारतीय ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री के विकास की गति 32 प्रतिशत सालाना है, जो वैश्विक ऑनलाइन गेमिंग से ढाई गुना ज़्यादा है.
ऐसे में संभव है कि सरकार ने भारतीय ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री की रफ़्तार को धीमा करने के लिए जीएसटी का स्पीड-ब्रेकर्स लगाना उचित समझा हो.
गेमिंग का बाज़ार और भारतीय परिप्रेक्ष्य

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हालांकि ऑनलाइन गेमिंग, केसिनो और घोड़े की रेस पर भारतीय सरकार ने एक सामान कर दर थोप दिए हैं. ज़्यादातर विशेषज्ञों का ये मानना है कि आप जुए के खेल और ऑनलाइन गेमिंग की तुलना नहीं कर सकते.
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लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि चाहे जुआ हो या ऑनलाइन गेमिंग दोनों में सम्भावनाओं का गणित होता है, इसलिए ज़्यादा कर उचित ही है.
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लेकिन सरकार के इस फ़ैसले का सबसे ज़्यादा असर कहां दिखा?
बुधवार को भारतीय शेयर बाज़ार में गेमिंग सेक्टर के शेयर्स बाज़ार खुलते ही धड़ाम से गिरे.
डेल्टा कॉर्प, नज़ारा टेक्नोलॉजीज़, जेनसार टेक्नोलॉजीज़, टाटा कंसल्टेंसी, इनफ़ोसिस, टेक महिंद्रा जैसी कम्पनियों के शेयर पर इसका सबसे ज़्यादा असर देखने को मिला.
इन कंपनियों की आमदनी में गेमिंग सेक्टर का अहम योगदान है.
हालांकि बाज़ार का एक तबका ये भी मानता है कि भारत सरकार के इस फ़ैसले से माल्टा और साइप्रस जैसे टैक्स हेवन देशों की ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को बहुत फ़ायदा होगा.
ये आशंका भी जताई जा रही है कि भारतीय गेमिंग कंपनियां अपने धंधे को समेट सकती हैं और यही काम वह टैक्स हेवन समझे जाने वाले देशों से कर सकते हैं.
कोविड संकट के दौरान बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े थे.
साल 2022 तक करीब 42 करोड़ लोग ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े थे, जिनकी संख्या 2023 में 45 और 2025 में 50 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है.
तो आगे क्या हो सकता है?

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राम गोपाल वर्मा की अजय देवगन, मनीषा कोइराला और विवेक ओबरॉय जैसे किरदारों वाली फिल्म कंपनी का एक गाना, "सब गंदा है, पर धंधा है ये ..." यहां फ़िट बैठता है.
एक ज़माने में भारत में सोने-चांदी के ऊपर भी वेट लगाया गया था, हॉलमार्किंग के लिए दिशा निर्देश ज़ारी किए गए थे, तब शर्राफ़ा बाज़ार में हर एक व्यापारी यही कहता हुआ सुनाई देता था कि "धंधा ख़त्म" पर उलटा हुआ, ब्रैंडेड जूलरी स्टोर्स बाज़ार में आए और धंधा और भी आगे बढ़ा.
वैसा ही कुछ ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया में भी हो सकता है, लेकिन अब एक बात तय है कि आप हारे या जीते पर जब दांव लगाएंगे तब आपको सरकार को आपके हर एक रुपये के दांव पर 28 पैसा देना होगा.
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