भारत में रहते तिब्बती लोगों के मन में अपने वतन की यादें- ग्राउंड रिपोर्ट
हाल ही में दलाई लामा का 90वां जन्मदिन हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में मनाया गया.
ये मौक़ा भारत में निर्वासन में रह रहे उन हज़ारों तिब्बती लोगों के लिए उन ज़रूरी मुद्दों के बारे में विचार करने का था जो उनकी ज़िंदगियों पर गहरा असर डालते हैं.
अपने वतन से दूर होने का दर्द, नागरिकता का न होना और दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर चिंता.
ये सभी बातें इन हज़ारों तिब्बती लोगों के ज़हन में फिर एक बार ताज़ा हो गईं.
जहां बुज़ुर्ग पीढ़ी के लिए वो यादें आज भी ताज़ा हैं जब उन्होंने तिब्बत से भागकर जान बचाई थी.
वहीं जो तिब्बती युवा भारत में ही पैदा हुए उनकी ज़िंदगी अपनी पहचान और नागरिकता जैसे मुद्दों के बीच संतुलन बनाने का लगातार चलता आ रहा संघर्ष बन गई है.
देखिए धर्मशाला से ये ख़ास ग्राउंड रिपोर्ट.
रिपोर्टः राघवेंद्र राव
शूट और एडिटः संदीप यादव
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां कर सकते हैं. आप हमें एक्स, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)



