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ग्लेन मैक्सवेलः 'हमने घायल शेर को अपना क़िला बचाते देखा...'
हर क्रिकेट फ़ैन की एक ज़िंदगी होती है. वो जन्म लेता है कुछ अनदेखी कहानियों के साथ.
कैसे कपिल देव ने अकेले ज़िम्बाब्वे से लोहा लिया था. कैसे विव रिचर्ड्स का ख़ौफ़ था.
लेकिन करोड़ों युवाओं ने ये सब कहानियां सिर्फ़ सुनी थी, कभी देखी नहीं.
लेकिन शायद हमारी ज़िंदगी के लिए ऊपर वाले ने कोई और कहानी सोच रखी थी.
एक ऐसी कहानी जिसे हम आने वाली हर पीढ़ी को सुनाएँगे.
हम बताएँगे की हमने अफ़ग़ानों का जलवा देखा, 5 बार की विश्व चैम्पियन को ज़मीन में धंसते देखा और उसी ज़मीन से एक घायल शेर को उठ खड़े होकर अपना क़िला बचाते देखा.
हम बताएँगे की कोई मैक्स्वेल था, जिसे दुनिया सनकी बल्लेबाज़ बुलाती थी.
जो स्कोरबोर्ड की तरफ़ देखता तक नहीं था. जो गेंदबाज़ों की तरफ़ नहीं देखता था. जो अपने जिस्म में उठ रहे असहनीय दर्द की तरफ़ भी नहीं देखता था.
उसकी नज़र थी तो एक सफ़ेद गेंद की तरफ़ और जितना दर्द उसके भीतर उठ रहा था उतने ही दर्दनाक तरीक़े से वो उस सफ़ेद गेंद पर प्रहार करता था.
वो मैदान पर लेटकर झटपटाता, लेकिन सामने खड़े कप्तान को भरोसा दिलाता कि ये झटपटाहट उसे मैदान से हटने को मजबूर नहीं कर सकती.
वो दूर खड़े खिलाड़ी को बताता कि तुम लौट जाओ, मेरे पैर भले ना चल रहे हों, पर बाज़ुओं में इतना दम है कि वो किसी भी सीमारेखा को लांघ सकती हैं.
हर जंग में एक पल ऐसा आता है जब विरोधी भी ऐसे लड़ाके के क़ायल हो जाते हैं.
मैच के अंतिम पलों में अफ़ग़ान खिलाड़ी भी उन्हीं पलों में डूबे नज़र आए.
वो हार भले ही गए पर गर्व से कह सकेंगे कि हमें हराने के लिए इतिहास की शायद सर्वश्रेष्ठ पारी को अंजाम तक पहुँचाना पड़ा. और एक घायल शेर ने हमसे अपना क़िला बचाया.
स्क्रिप्ट और आवाज़ः नवीन नेगी
वीडियो एडिटिंगः केंज़
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