A Guide to Hindi - 10 facts about the Hindi language in Hindi

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हिंदी भारत में बोली जानेवाली एक भाषा है. ये भारत सरकार की आधिकारिक भाषा है. अंग्रेज़ी भारत की दूसरी आधिकारिक भाषा है.
हिन्दी 42 करोड़ 50 लाख लोगों की पहली भाषा है. लगभग 12 करोड़ अन्य लोगों ने इसे दूसरी भाषा के रूप में अपनाया है.
भारत में कई अन्य क्षेत्रीय भाषाएँ बोली जाती हैं, जैसे बांग्ला, तमिल, तेुलुगू, कन्नड़, मलयालम, उड़िया, गुजराती, मराठी, पंजाबी, असमिया इत्यादि. मगर हिन्दी बोलनेवाले लोगों की संख्या सबसे अधिक है.
हिंदी उत्तर भारत के राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजधानी दिल्ली; पूर्वी भारत के राज्यों बिहार और झारखंड; मध्य भारत के राज्यों मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तथा पश्चिमी भारत के राज्य राजस्थान की मुख्य भाषा है. भारत के अधिकतर दूसरे राज्यों में भी हिन्दी को समझा जाता है.
हिन्दी भारत के बाहर भी कुछ देशों में बोली जाती है, जैसे मॉरीशस, फ़िजी, सूरीनाम, गयाना, त्रिनिदाद और टोबैगो तथा नेपाल.
अंग्रेज़ी में हिंदी के या हिंदी से विकसित हुए कई शब्दों का व्यवहार होता है. जैसे – गुरू (guru), जंगल (jungle), कर्म (karma), योग (yoga), बंगला (bungalow), चीता (cheetah), लूट (loot), ठग (thug), अवतार (avatar), इत्यादि
वहीं हिंदी में भी अंग्रेज़ी के कई शब्द प्रचलित हैं. उन्हें लिखा हिन्दी में जाता है मगर उन्हें बोला उनके अंग्रेज़ी उच्चारण की ही तरह जाता है. जैसे doctor का उच्चारणडॉक्टर होता है, station का उच्चारण स्टेशन.
हिन्दी में व्यवहार होनेवाले कुछ अन्य अंग्रेज़ी शब्द हैं – हॉस्पिटल (hospital), रेलवे (railway), ट्रेन (train), साइकिल (cycle), मोटर (motor), बस (bus), कार (car), क्रिकेट (cricket), फ़ुटबॉल (football), टेनिस (tennis), कोर्ट (court), इत्यादि.
अन्य यूरोपीय भाषाओं की तरह हिन्दी भी बाएँ से दाएँ लिखी जानेवाली भाषा है.
हिन्दी को पढ़ना आसान है. दूसरी यूरोपीय भाषाओं से अलग, हिन्दी में शब्दों का उच्चारण ठीक उसी तरह होता है जैसे वो लिखे जाते हैं क्योंकि हर अक्षर की अपनी अलग ध्वनि है.
हिन्दी में अंग्रेज़ी शब्दों के आर्टिकल (article)– ए, ऐन, द, दी(a, an the)– का चलन नहीं है.
मगर हिन्दी में वाक्यों की संरचना अंग्रेज़ी से अलग है. हिन्दी में क्रियाएँ सदा वाक्यों के अंतिम हिस्से में रखी जाती हैं और है, हूँ, हो, था जैसी सहायक क्रियाओं से वाक्य पूरे होते हैं.
उदाहरण के लिए, हिन्दी में अंग्रेज़ी के वाक्य - हाउ आर यू (How are you) - के लिए बोला जाता है – आप कैसे हैं. मगर यदि इस क्रम से इसका अंग्रेज़ी वाक्य बनाया जाए तो वो वाक्य ऐसा बनेगा – यू हाउ आर (You how are)
इसी प्रकार - मैं अच्छा हूँ - (I am fine) – ये वाक्य हिन्दी संरचना के हिसाब से बन जाएगा – आई फ़ाइन ऐम (I fine am).
अंग्रेज़ी से अलग, हिन्दी में हर संज्ञा (noun) का अपना लिंग(gender) होता है. विशेषण और क्रियाएँ लिंग के हिसाब से बदला करते हैं. हिंदी भाषा सीखने के क्रम में लिंग के व्यवहार की समझ होना आम तौर पर एक कठिन विषय माना जाता है.उदाहरण के लिए –He is a good boy की हिन्दी होगी – वह अच्छा लड़का है. वहीं She is a good girl की हिन्दी होगी – वह अच्छी लड़की है.
किम्कर्तव्यविमूढ़– अर्थात् उलझन में पड़ना, भ्रमित होना, अनिर्णय की स्थिति
लौहपथगामिनी– ये ट्रेन का एक हिन्दी में बनाया हुआ शब्द है जिसका मतलब हुआ - लोहे के रास्ते पर चलनेवाली चीज़. मगर इसका प्रयोग हल्के-फ़ुल्के रूप से होता है, अक्सर हँसी-मज़ाक में. ट्रेन के लिए हिन्दी शब्द है रेलगाड़ी, अर्थात् रेल पर चलनेवाली गाड़ी.
हिन्दी में टंग ट्विस्टर (tongue twister) यानी बार-बार एक साथ बोलने में मुश्किल में डालनेवाला एक कठिन पद है कच्चा पापड़-पक्का पापड़.
हिन्दी में दो चरित्रों – संता-बंता – के चुटकुले काफ़ी लोकप्रिय हैं. दो चुटकुले – पहला चुटकुला
पहला चुटकुला
संताःकेला कितने में?
फल वालाःएक रूपए.
संताः60 पैसे में दोगे?
फलवालाःइतने में तो बस छिलका मिलेगा.
संताःये लो 40 पैसे, मुझे बस केला चाहिए.
दूसरा चुटकुला
संताःपता है बचपन में मुझे एक बस ने धक्का मार दिया था.
बंताःबाप रे, तू मर गया कि बचा?
संताःयाद नहीं, मैं तब केवल चार साल का था.
हिन्दी में शिक्षक-छात्र के चुटकुले भी काफ़ी लोकप्रिय हैं. एक चुटकुला –
टीचरः क्रिकेट मैच पर लेख लिखो.
सब लिख रहे थे. मगर एक छात्र बैठा था.
टीचरः क्यों बैठे हो?
छात्रः लिख लिया.
टीचरः क्या?
छात्रः बारिश हो गई, मैच रद्द.
हिन्दी भाषा प्राचीन भारतीय भाषा संस्कृति से जन्मी है. हिन्दी अपने वर्तमान स्वरूप में प्राकृत और अपभ्रंश भाषाओं के चरणों से होते हुए विकसित हुई है.
हिन्दी भाषा भारत-यूरोपीय भाषा परिवार की उपशाखा भारत-ईरान के भारत समूह की सदस्य है. हिन्दी भाषा को तुर्क, फ़ारसी, अरबी, पुर्तगाली, अंग्रेज़ी और दक्षिण भारतीय द्रविड़ भाषाओं ने प्रभावित और समृद्ध किया है.
हिन्दी जानने से संस्कृत, उर्दू, नेपाली, बांग्ला और गुजराती भाषा को समझने में मदद मिल सकती है क्योंकि उनमें हिन्दी से काफ़ी समानता है.
हिन्दी से भारत के पड़ोसी देश नेपाल में बातचीत करने में सहायता मिल सकती है. ये एक दिलचस्प बात है कि हिन्दी बोलनेवाले एक व्यक्ति के लिए नेपाल की राष्ट्रीय भाषा नेपाली भाषा को बोलना मुश्किल है, मगर वो नेपाली भाषा को पढ़ आसानी से सकता है क्योंकि दोनों भाषाओं की लिपि एक ही है – देवनागरी लिपि.
इसके विपरीत, हिन्दी जाननेवालों के लिए पाकिस्तान की राष्ट्रीय भाषा उर्दू में बातचीत करना आसान है, मगर उर्दू को पढ़ना कठिन, क्योंकि उर्दू की लिपि अरबी है.
एक और दिलचस्प ध्यानयोग्य बात ये है कि हिन्दीभाषियों के लिए स्वयं भारत के कई लोगों के साथ बातचीत कर पाना मुश्किल है, विशेष रूप से दक्षिण भारतीय राज्यों के लोगों के साथ, जहाँ तमिल, तेुलुगू, कन्नड़, मलयालय आदि भाषाएँ बोली जाती हैं. हिन्दी में सैकड़ों देसी बोलियाँ हैं जो अलग-अलग हिस्सों में बोली जाती हैं मगर वे लिखी हिन्दी की ही तरह जाती हैं, यानी देवनागरी लिपि में.
दक्षिण भारतीय भाषाएँ द्रविड़ लिपि में लिखी जाती हैं.
हिन्दी में औपचारिक और अनौपचारिक शब्दों के प्रयोग में सावधानी महत्वपूर्ण है.
उदाहरण के लिए, पिता के लिए हिन्दी में दो शब्द हैं – औपचारिक शब्द ‘पिता’ और अनौपचारिक शब्द ‘बाप’.
ऐसे में यदि आप किसी पार्टी में अपने दोस्त ये पूछते हैं कि – तुम्हारा ‘बाप’ कैसा है – तो आप अपने और अपने दोस्त के लिए एक शर्मिंदा करनेवाली स्थिति पैदा कर सकते हैं. सही प्रयोग औपचारिक शब्द ‘पिता’के साथ होना चाहिेए – तुम्हारे ‘पिता’ कैसे हैं.
इसी तरह, हिन्दी में तुम के लिए तीन तरह के शब्द हैं –‘तुम’, ‘तू’ और ‘आप’.
मगर औपचारिक बातचीत में ‘तुम’ और ‘तू’ का प्रयोग नहीं करना चाहिए, विशेष रूप से बड़े लोगों के साथ क्योंकि इसे बदतमीज़ी समझी जाएगी.
‘तुम’ और ‘तू’ का प्रयोग मुख्यतः दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ किया जाता है.
‘आप’ का इस्तेमाल सबसे सुरक्षित है क्योंकि इसे किसी के भी साथ प्रयोग किया जा सकता है.
हिन्दी में कई मुहावरे हैं जिनका आम बोलचाल में काफ़ी प्रयोग होता है. जैसे –
कर भला हो भला [kar bhala ho bhala]
जैसा करोगे वैसा भरोगे [jaisa karoge waisa bharoge]
जैसे को तैसा [jaise ko taisa]
बंदर क्या जाने अदरख का स्वाद [bandar kya jane adrakh ka swad]
थोथा चना बाजे घना [thotha chana baje ghana]
बहती गंगा में हाथ धोना [bahti ganga me hath dhona]
नौ सौ चूहे खाके बिल्ली हज को चली [900 (nau sau) choohe khake billi haj ko chali]
हिन्दी भाषा अपने वर्तमान स्वरूप में अलग-अलग चरणों से होती हुई विकसित हुई है. अपभ्रंश पुरानी हिन्दी का पहला चरण था. प्रख्यात भारतीय रचनाकार कालिदास ने अपभ्रंश में वर्ष 400 ईसा पूर्व में एक प्रेम कथा पर आधारित नाटक विक्रमौर्वशीयम लिखा था.
आधुनिक देवनागरी लिपि 11वीं शताब्दी में अस्तित्व में आई.
हिंदी के पहले प्रकाशन का प्रमाण जॉन गिलक्रिस्ट की किताब ग्रामर ऑफ़ द हिन्दुस्तानी लैंग्वेज में मिलता है जिसे 1796 में कलकत्ता से प्रकाशित किया गया था. इसमें हिन्दुस्तानी भाषा के व्याकरण के बारे में लिखा गया है जो हिन्दी और उर्दू भाषाओं के शब्दों से बनी एक साझा तरह की भाषा है जो मुख्यतः बोली जानेवाली भाषा है. इस किताब में कहीं-कहीं हिन्दी और देवनागरी की झलक मिलती है, मगर ये किताब मुख्यतः उर्दू-अंग्रेज़ी की किताब है ना कि हिन्दी की किताब.
1805 में लल्लू लाल की किताब प्रेम सागर का प्रकाशन हुआ. इसे हिन्दी की पहली किताब माना जाता है जिसमें हिन्दू धर्म के एक प्रमुख देवता भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन है.
हिन्दी में अभिवादन के लिए प्रयोग किया जानेवाला सबसे सामान्यशब्द है नमस्ते [namaste].
नमस्ते शब्द संस्कृत के दो शब्दों –नमस [namas] मतलब ‘झुकना’ और ते [te] यानी ‘आपके’ से बना है. एक-दूसरे से मिलते समय लोग आमतौर पर आगे की तरफ़ थोड़ा झुककर अपने दोनों हाथों को सीने के आगे लाकर, हथेलियों को मिलाकर, उंगलियों को ऊपर की ओर रखे हुए नमस्ते कहते हैं.
भारत में हाथ मिलाने का भी चलन है मगर ऐसा मुख्यतः पश्चिमी वातावरण में, जैसे मीटिंग या पार्टी आदि में, या फिर लोगों की औपचारिक मुलाक़ातों में होता है. मगर रोज़ाना के जीवन में ये अभिवादन का सबसे प्रचलित तरीक़ा नहीं है.
सामान्य रूप से हिन्दू और सिख अपने से बड़ों के पाँव छूते हैं. मुसलमान अभिवादन के लिए एक-दूसरे को अस्सलाम-वालेकुम[assalam-wale-kum] कहते हैं.
विनम्रता और आदर प्रकट करने के लिए एक और महत्वपूर्ण शब्द है –‘जी’[jee]
इसे लोगों के नामों के पहले या अंतिम नाम के साथ लगाया जाता है.
जैसे यदि किसी व्यक्ति – राम सिंह – से बातचीत के लिए अभिवादन के रूप में कहा जा सकता है –
नमस्ते राम जी [namaste Ram jee]
नमस्ते सिंह जी [namaste Singh jee]
औपचारिक बातचीत में ‘जी’का प्रयोग किसी व्यक्ति के नाम के साथ भी किया जा सकता है. जैसे
राम जी [Ram jee] पुरूष नाम
सीता जी [Sita jee] महिला नाम
आम बातचीत में, विशेष रूप से जब कोई औपचारिक स्थिति हो, या बातचीत दो अलग-अलग उम्र के लोगों के बीच हो रही हो, तो भी ‘जी’[jee] का प्रयोग हो सकता है. बातचीत में विनम्रता या आदर प्रकट करने के लिए हाँ के स्थान पर अक्सर ‘जी’ का प्रयोग किया जाता है. जैसे –
यदि शिक्षक छात्र से कुछ पूछते हैं तो छात्र को ‘हाँ’ के स्थान पर ‘जी’ कहना चाहिए.
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