दुनिया की सबसे तगड़ी दुलत्ती किसकी?

ज़ेबरा

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, एला डेविस
    • पदनाम, बीबीसी अर्थ

'मार-मार कर तुम्हारी चटनी बना दूंगी', 'पीट-पीट कर तुम्हारा भुर्ता बना दूंगा', 'मेरे एक ही मुक्के में ढेर हो जाओगे'. आप ने ऐसे जुमले बहुत सुने होंगे. हो सकता है कि कभी ख़ुद भी ऐसी धमकियां झेली हों. यूं तो मुहम्मद अली का मुक्का मशहूर है. और फिल्मी दुनिया में हॉलीवुड के रॉकी बॉल्बोआ का मुक्का बेमिसाल रहा.

पर, कभी आप ने सोचा है कि क़ुदरत में सबसे ताक़तवर मुक्का मारने वाला जानवर कौन है? इस सवाल का जवाब सुनेंगे तो हैरान रह जाएंगे.

एक झींगा है जिसका मुक्का वैज्ञानिक सभी जानवरों से ताक़तवर मानते हैं. इस झींगे को अंग्रेज़ी में पीकॉक मैंतिस श्रिंप या मोर जैसा दिखने वाला झींगा कहते हैं. इस झींगे के पैर इतने ताक़कवर होते हैं कि पूछिए मत. पलक झपकाते ही इसके वार से शिकार ढेर हो जाता है. ये झींगा इतनी तेज़ी से आगे का पैर चलाता है कि सामने वाले को संभलने का मौक़ा तक नहीं मिलता. मुक्का मारने के लिए ये झींगा, पहले ताक़त को अपने पैरों में जमा करता है.

पीकॉक मैंतिस श्रिंप

इमेज स्रोत, Georgette Douwma/naturepl.com

इमेज कैप्शन, पीकॉक मैंतिस श्रिंप

पैरों की बनावट मशीनी

मैंतिस झींगे पर रिसर्च करने वाली अमरीका की शीला पटेक बताती हैं कि इसके आगे के पैरों की बनावट बिल्कुल मशीनी होती है. जिसमें स्प्रिंग, लीवर और धनुष जैसा लोच होता है. ये झींगे अपने वज़न से ढाई हज़ार गुनी ज़्यादा ताक़त से शिकार पर वार करते हैं. इससे पानी में आग पैदा हो जाती है.

दिलचस्प बात ये है कि मैंतिस झींगे आपस में भी लड़ते हैं. ये मुक़ाबला अपने-अपने इलाक़े और हद के लिए होता है. शीला पटेक बताती हैं कि ये झींगे, पहले सामने वाले को नज़रों से तौलते हैं. अगर बात सिर्फ़ धमकाने से बन जाए तो ये अपनी ज़ात के झींगों से नहीं भिड़ते. और अगर लड़ाई की नौबत आ ही जाती है, तो फिर ये सब से पहले अपने पेट को मोड़कर छुपाते हैं. फिर वार करते हैं. जो झींगा ज़्यादा मुक्के झेल लेता है, वही इस लड़ाई में जीतता है.

ट्रैप-जॉ

इमेज स्रोत, Solvin Zankl/naturepl.com

इमेज कैप्शन, ट्रैप-जॉ

अमरीकी चींटियां

झींगों की ही तरह अमरीका में पाई जाने वाली चींटियां होती हैं. ये अपने डंक से वार किया करती हैं. इनके जबड़ों में इतनी ताक़त होती है कि एक ही वार में शिकार का ख़ात्मा हो जाता है.

इन्हें ट्रैप-जॉ यानी पिंजरे जैसे जबड़ों वाली चींटियां कहा जाता है. मैंतिस झींगे की तरह ये चींटियां भी आपस में लड़ती देखी गई हैं. इनकी लड़ाई घोंसले में अपनी दादागीरी जमाने के लिए होती है. इन चींटियों का एक वीडियो रिकॉर्ड किया गया था. जिसमें एक चींटी ने एक सेकेंड में 41 बार दूसरी चींटी पर वार किया था.

ऐसे बहुत से जीव होते हैं जो अपने डंक या एंटीना से लड़ाई लड़ते हैं. इनमें चींटियां, ततैया और मधुमक्खियां शामिल हैं. मधुमक्खियों के बीच भी दादागीरी साबित करने के लिए मुक्केबाज़ी का मुक़ाबला होता है.

भूरे खरहे

इमेज स्रोत, Andy Rouse/naturepl.com

इमेज कैप्शन, भूरे खरहे

सबसे तगड़ा मुक्केबाज़ कौन

मुक्केबाज़ी की बात करें तो भूरे खरहे (एक तरह का खरगोश) ग़ज़ब के मुक्केबाज़ होते हैं. ये बसंत के मौसम में अक्सर एक-दूसरे पर मुक्के बरसाते देखे जा सकते हैं. लड़ाई गर्लफ्रेंड को रिझाने और हासिल करने की होती है.

पहले ये माना जाता था कि सिर्फ़ नर खरहे आपस में लड़ते हैं. मुक्केबाज़ी करते हैं. मगर, सच्चाई ये है कि मादा खरहे ज़्यादा लड़ती हैं. और ये लड़ाई भी सेक्स को लेकर ही होती है. असल में मादा बहुत कम वक़्त के लिए यौन संबंध बनाने को तैयार होती हैं. ऐसे में नर खरहों के बीच मादा को लुभाने की ज़बरदस्त होड़ चलती है. इसी दौरान अगर मादा को छेड़ा जाता है, तो वो भड़ककर मुक्केबाज़ी शुरू कर देती है.

कंगारू भी ग़ज़ब के मुक्केबाज़ होते हैं. नर कंगारुओं के बीच अक्सर मादा को लेकर मुक्केबाज़ी होती है. इनके आगे के पैर बेहद ताक़तवर और ख़तरनाक होते हैं. ये अपने खुर से बहुत गहरी चोट कर देते हैं.

कंगारू सिर्फ़ मुक्के नहीं मारते. वो अपनी हिफ़ाज़त के लिए दुलत्ती भी मारते हैं. और कंगारुओं की दुलत्ती भी बहुत ताक़तवर और ख़तरनाक होती है. ऑस्ट्रेलिया में तो अक्सर लोग कंगारुओं की दुलत्ती के शिकार होते हैं.

घोड़े

इमेज स्रोत, Getty Images

और दुलत्ती तो गधों-घोड़ों की मशहूर

मगर, दुनिया की सबसे ताक़तवर दुलत्ती ज़ेब्रा की होती है. अमरीका की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के टिम कैरो ने ज़ेब्रा पर काफ़ी रिसर्च की है. वो ज़ेब्रा जैसा लिबास पहनकर भी उनके बीच रहे थे. टिम बताते हैं कि कई बार ख़ुद के बचाव में ज़ेब्रा, शेरों के सीने पर पैर से ज़बरदस्त वार करते हैं. हालांकि, इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि ज़ेब्रा की दुलत्ती से किसी शेर की मौत हो गई हो.

लात मारने की बात चली है, तो इस में शुतुरमुर्ग और जिराफ़ का नाम भी जोड़ लीजिए. इनके बारे में भी कहा जाता है कि ये दोनों बहुत ताक़त से किक मारते हैं. 2016 में एक वीडियो सामने आया था जिसमें देखा गया था कि एक जिराफ़ ने एक शेर को बहुत तेज़ किक मारकर भगा दिया था.

हालांकि शुतुरमुर्ग, ज़ेब्रा, घोड़े या जिराफ़ की दुलत्तियां, शिकारी जानवरों को डराने और ख़ुद को बचाने के लिए होती हैं.

सेक्रेटरीबर्ड

इमेज स्रोत, Laurent Geslin/naturepl.com

इमेज कैप्शन, सेक्रेटरीबर्ड

घातक हमले वाला बाज़

अगर हम शिकार पर सबसे घातक हमले की बात करें, तो इसमें पहले नंबर पर आता है अफ्रीका में पाया जाने वाला एक बाज़. इसे सेक्रेटरीबर्ड कहते हैं. रिसर्चर इसे निंजा ईगल या बेहद भयानक बाज़ कहते हैं.

ये बाज़ ज़हरीले सांपों का शिकार करता है. इसका एक ही वार सांपों के लिए जानलेवा होता है. ये अपने वज़न से छह गुनी ज़्यादा ताक़त से शिकार पर वार करते हैं. और जितनी देर में इंसान पलक झपकाता है, उसके दसवें हिस्से में इनके वार से शिकार का काम तमाम हो चुका होता है.

इसी तरह दक्षिण अमरीका में एक परिंदे के कंकाल मिले हैं. इसे टेरर बर्ड नाम दिया गया है. वैज्ञानिकों ने इसके कंकाल की बुनियाद पर अंदाज़ा लगाया है कि टेरर बर्ड इतनी तेज़ी से किक मारती थी कि इसके एक वार से शिकार की रीढ़ की हड्डी टूट जाती थी. क्योंकि ये टेरर बर्ड अपने शिकार जानवरों की बोन मैरो या अस्थि मज्जा खाया करती थी, जो हड्डियों के बीच में मिलता है. इससे बहुत से पोषक तत्व मिल जाते हैं.

तो, देखा आपने! क़ुदरत ने कितने ज़बरदस्त मुक्केबाज़ दिए हैं. जिनका एक ही वार शिकार या दुश्मन का काम तमाम कर देता है.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी अर्थ पर उपलब्ध है.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)