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रविवार, 09 जुलाई, 2006 को 22:53 GMT तक के समाचार
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विश्व कप फ़ाइनल पर आपकी राय
ज़िदान
ज़िदान को अपने आख़िरी मैच में ग़लत व्यवहार की सज़ा मिली
विश्व कप के फ़ाइनल में फ़्रांस हार गया. इटली ने चौथी बार ख़िताब जीता. लेकिन ज़िनेदिन ज़िदान के व्यवहार की भी चर्चा रही.

ज़िनेदिन ज़िदान को आख़िरी अंतरराष्ट्रीय मैच में मैदान से बाहर जाना पड़ा. क्योंकि उनके ग़लत व्यवहार के कारण उन्हें रेड कार्ड दिखाया गया.

उनके बाहर जाने के कारण फ़्रांस पर दबाव देखा जा सकता था. फ़्रांस की टीम पेनल्टी शूट आउट में दबाव झेल नहीं पाई और हार गई. इटली ने चौथी बार ख़िताब जीता.

आपकी क्या राय है. इस विश्व कप के बारे में. ख़ासकर ज़िदान के व्यवहार पर आप क्या कहना चाहेंगे. आप अपनी राय वर्चुअल कीबोर्ड का इस्तेमाल करके हिंदी में ही भेजे.


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जिदान एक महान खिला़डी है उसने जान बूझकर ऐसा नही किया होगा इटली की यह सोची समझी चाल थी जिदान को टीम से बाहर निकालने की वैसे तो जिदान बहुत शांत भाव के खिलाड़ी है जिदान को टीम से बाहर निकाल कर रेफ़री ने ठीक नही किया जिदान मैदान से बाहर नही जाते तो फ़्रांस की जीत होती. नरिंदर, फ़्रांस

ताली दोनो हाथों से ही बजती है एवं जिदान ने कुछ गलत नहीं किया. वह एक महान खिलाड़ी के रूप में याद रखे जाएँगे. राघव, ऑस्ट्रेलिया

ज़िदान का व्यवहार ग़लत था. अमित स्वपनिल, रायपुर

क्रोध बहुत बड़ा चंडाल है बड़े बड़ों को दिन में तारे दिखाए हैं जिदान जी आपने तो क्रीड़ा क्षेत्र प्रतिस्पर्धी को ध्वस्त करना था न कि देश के गौरव को. शीला मदान, शिकागो

आपलोग अगर सबसे भेजा हुआ मैसेज दाखिल कर नहीं सकते तो यह स्तम्भ रखते ही क्यूँ हैं. मैंने भी कमेन्ट्स भेजे थे लेकिन यहाँ पर आप लोगों ने नहीं दिखाए. पक्षपात करते है या सिर्फ़ मज़ाक है यह स्तम्भ. आकाश के.सि.नागोया, जापान

मेरे लिए इटली का जीतना प्रत्याशित था. दमदार रक्षापंक्ति की बदौलत इटली ने सभी मैचों में बेहतरीन प्रदर्शन किया था. ज़िदान ने अभद्रता का जवाब अभद्रता से दिया. जिसकी अपेक्षा नहीं थी. वे संयम रखते तो फ़्रांस के लिए कुछ कर जाते. बहरहाल यह विश्वकप पहले के विश्वकपों के मुक़ाबले कम रोचक रहा. नीरज दीवान. नोएडा

ज़िदान ने जो किया उसके पीछे कोई तो राज है पर वो कया जनाब बताने को तैयार ही नहीं हैं. पर मतरात्सी ने क्यों ग़लत कहा है? मुस्कान, बेल्जियम

ज़िदान की विदाई इस तरह से होगी किसी ने ऐसा नहीं सोचा था लेकिन उनके अंत पर काला धब्बा इटली की चाल का एक हिस्सा है. सक़लैन, लखनऊ

ज़िदान प्रकरण ने इटली के शानदार खेल को दबा दिया. दरअसल इटली ने पूरे मैच में फ्रांस से बेहतर खेल दिखाया और ज़िदान की हताशा इसी का नतीजा थी. जहाँ तक बात अपशब्दों के इस्तेमाल की है, तो फुटबॉल में ये कोई नई बात नहीं है और ज़िदान को उत्तेजित नहीं होना चाहिए था, विनोद अग्रहरि, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

पंजाबी में कहावत है बड़बोलियाँ बोल मारे मेंसियां घर उजाड़े जिदान जी जोश में होश खो बैठे उनको सर्वोच्च खिलाङी घोषित भी किया गया. इसमें भी खेलनीति की राजनीति है. खेलनीति में यह कानून बनना चाहिए कि खेल के समय किसी भी प्रतिस्पर्धी को परिवारिक आलोचना नहीं हो. सभी दूध के धुले नहीं होते. गु्ड्डो, शिकागो

ज़िदान की घटना के बारे में पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए. रेफ़री ने ज़िदान को रेड कार्ड दिखाकर महान खिलाड़ी का बुरा अंत कर दिया. ज़िदान को फ़ुटबॉल प्रेमी हमेशा याद रखेंगे. शब्बीर खन्ना, रियाद, सऊदी अरब

इटली के खिलाड़ी ने कुछ बोला होगा. इसलिए ज़िदान ने ऐसा किया. शाहीन, अहमदाबाद

ज़िदान दुनिया के बेहतरीन फ़ुटबॉल खिलाड़ी हैं. लेकिन इटली के ख़िलाफ़ मैच में उनके व्यवहार ने निराश किया. जमायांग दोरजी लामा, काठमांडू, नेपाल

ज़िदान को याद तो ज़रूर किया जाएगा लेकिन बुरे बर्ताव के कारण. ज्ञानेंद्र कार्की, फ़िनलैंड

हमने बिल्कुल नहीं सोचा था कि ज़िदान ऐसा करेंगे. बहुत दुख हुआ कि ज़िदान की विदाई अच्छी नहीं रही. शमीम, गोपालगंज, भारत

ज़िदान के अच्छे खिलाड़ी होने के बावजूद जिस तरह का बर्ताव उन्होंने किया, उसके लिए ज़िदान को सज़ा मिलनी ही चाहिए. मोहन सिंह, मलेशिया

अति उत्साह, उपेक्षा, अवसाद और दबाव के कारण व्यक्ति मानसिक असंतुलन का शिकार हो जाता है और ऐसा ही कुछ ज़िदान के साथ भी हुआ. अगर फ़्रांस जीत जाता तो शायद इतना बवाल नहीं होता. सिंड्रेला, फ़िलिपींस

1998 के विश्व कप मे ज़िदान के पैरों के साथ साथ उनके सर का जादू भी देखने को मिला था. इस बार के विश्व कप में उन्होने अपने सर का प्रहार फ़ुटबाल की जगह मेतरात्ज़ी के सीने पर करके सबको हैरत मे डाल दिया. इस बात में कोई दो राय नहीं कि ज़रूर मेतरात्ज़ी ने कोई ऐसी टिप्प्णी की होगी जिसे ज़िदान बर्दाश्त नही कर पाए, और उन्होंने उस टिप्प्णी का बदला इस प्रकार लिया. बेहतर होता कि वो संयम से काम लेते और मेतरात्ज़ी की टिप्प्णीं का जवाब इटली से विश्व कप छीन कर देते. जो भी हो इस वक़्त तो हर कोई सिर्फ़ ये जानने को उत्सुक है कि आख़िर मेतरात्ज़ी ने ऐसी क्या बात कही होगी, जिससे ज़िदान इतने भड़क गए. इदरीस खान, रियाद

मेरे ख़्याल में मैतरात्सी ने जान-बूझ कर ज़िनेदिन ज़िदान को उकसाया वरना ऐसे जानदार खिलाड़ी की ऐसी विदाई न होती. आशा है कि मैतरात्सी ने उन्हें क्या कहा यह भेद भी बीबीसी ही खोलेगा. दलबीर सिंह मांगट, लुधियाना

मैं सिर्फ़ यही कहना चाहता हूँ कि ज़िदान फ्रांस ही नहीं बल्कि दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक हैं. विश्व कप फाइनल में जो घटना हुई उसे खेल का ही हिस्सा कहा जा सकता है.
प्रेम बल्लभशास्त्री, पुणे, भारत

ज़िदान को इस तरह रूसवा होता देख अच्छा नहीं लगा. माना कि गलती इटली के खिलाड़ियों की थी लेकिन किसी को इस तरह मारना भी उचित नहीं है. ज़िदान ने अपने आपको ही नहीं बल्कि फ्रांस को भी विश्व कप से दूर कर दिया. भारत और पाकिस्तान के बीच ऐसे कितने मैच होते हैं जिसमें खिलाड़ी आपस में ही ग़लत शब्दों का इस्तेमाल करते हैं लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि वे एक दूसरे को मारना पीटना शुरु कर दें. सुंदर आनंद कुमार, दुबई

मैं तो रेफरी के फ़ैसले की तारीफ़ करता हूँ. चाहे कितने भी बड़े खिलाड़ी क्यों न हों अग़र इस तरह की ग़लती करेंगे तो सजा पाएँगे ही. परवेज़, जेद्दा

ज़िदान जैसे खिलाड़ी को ऐसा नहीं करना चाहिए था. उन्होंने जैसा किया उसकी सज़ा मिली. उराश धिताल, ओहायो, अमरीका

ज़िदान को रेड काडॅ दिखाना सही तो था ही मगर उस इटालियन खिलाड़ी को भी नही छोड़ा जाना चाहिए जो बार-बार ज़िदान को पकड़ कर बाधा डाल रहा था. बिमलेश बिहारी झा, दरभंगा

इस तरह के महान और अनुभवी खिलाड़ी से ऐसी दुखदाई विदाई की आशा नही थी. संदीप सिंह, भारत

फ्रांस की हार की वजह काले अक्षरों में लिखी जाएगी,फिर भी मैं ज़िदान का प्रशंसक हूँ. धीरेंद्र सिंह पपली, बहरीन

निश्चित रूप से शुरुआती मैचों में फ़्रांस ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया. लेकिन फ़्रांस को चिंता करने की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि उसके पास ज़िदान जैसे खिलाड़ी थे. 34 साल की उम्र में भी ज़िदान ने अपनी टीम को फ़ाइनल में पहुँचाने में प्रमुख भूमिका निभाई. जीवन सिंह बिष्ट, गुड़गाँव, हरियाणा

ज़िदान को सज़ा मिलनी चाहिए थी. हेतराम पुनिया, बागास, सीकर, राजस्थान

ज़िदान जी शायद विजय का सेहरा बाँधने की आशा में अपना आपा खो बैठे. आशा निराशा में बदल गई. इसे ही शायद भाग्य की विडंबना कहते हैं. बड़े-बुज़ुर्ग कहते थे कि पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब- खेलोगे-कूदोगे तो होंगे ख़राब. यहाँ को उल्टी ही गंगा बह गई. शीला मदान, शिकागो

ज़िदान महान हैं और महान रहेंगे. मैं ये मैच टीवी पर देख रहा था और इटली के मैतरात्सी ने ज़िदान को कुछ कहा था. ज़िदान बहुत बड़े खिलाड़ी हैं. उनको मालूम था कि खेल किस दिशा में जा रहा है. लेकिन अगर उन्हें कोई ग़ाली देगा तो उसको सबक सिखाना ही पड़ेगा. इक़बाल आफ़ताब, दुबई

ज़िदान दुनिया के महान खिलाड़ी हैं. ज़िदान सिर्फ़ फ़्रांस के ही नहीं दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ी हैं. खेलते समय ज़िदान की कला देखते ही बनती है. शत्रुघ्न प्रसाद यादव, चीन

जो कुछ भी हुआ वो ज़िदान के ग़ुस्से और मैतरात्सी की मक्कारी का नतीजा था. हम सभी जानते हैं कि मैतरात्सी दूसरे खिलाड़ियों से दुर्व्यवहार करते हैं. मैतरात्सी की मक्कारी ने भले ही इटली को मैच जिताया हो लेकिन वो कभी ज़िदान की बराबरी नहीं कर पाएँगे. क्योंकि ज़िदान हमेशा अपने खेल की कला के लिए जाने जाएँगे. ज़िदान के खेल जीवन के अंतिम पड़ाव पर ये दुर्भाग्यपूर्ण घटना नहीं होनी चाहिए थी. मैतरात्सी को ज़िदान के प्रति सम्मान दिखाना चाहिए था और उनके अंतिम मैच में ऐसे नहीं उलझना चाहिए था. लेकिन शायद इसलिए तो कहते हैं कि जंग और मोहब्बत में सब कुछ जायज होता है. मुकेश सकरवाल, लिवरपुल, ब्रिटेन

मैं ज़िदान का बहुत बड़ा फ़ैन हूँ. मुझे अफ़सोस है कि ज़िदान अपने आख़िरी मैच में ऐसा व्यवहार करेंगे. कल का मैच बहुत रोमांचक था. लेकिन ज़िदान जैसे सीनियर खिलाड़ी ने अपने आख़िरी मैच में ऐसा कर दिया. फ़ुटबॉल और ज़िदान के बारे में जब भी चर्चा होगी, इसे याद रखा जाएगा. सतीश कुमार सिंह, भारत

ज़िदान का व्यवहार दबाव का परिणाम था. ज़िदान को शांत खिलाड़ी माना जाता है. फ़ाइनल का दबाव शायद ज़िदान झेल नहीं पाए. उनका अंतिम विश्व कप दुखद रहा. अखिलेश चंद्रा, यमुना विहार, दिल्ली

ज़िदान ने जिस तरह अपने सिर के टक्कर से मैतरात्सी को गिराया, वह काफ़ी ख़राब था. उन्हें याद रखना चाहिए था कि यह विश्व कप का फ़ाइनल मैच था. उन्होंने जो कुछ भी पाया था, सब गँवा दिया. ज़ोरावर, संयुक्त अरब अमीरात

माना कि फ़्रांस के स्टार ने ग़लती की थी. लेकिन इतने बड़े फ़ुटबॉल खिलाड़ी को रेड कार्ड नहीं दिखाना चाहिए था. ज़िदान का सारा जीवन एक सच्चे खिलाड़ी के तौर पर गुजरा है. ऐसे खिलाड़ी को सम्मानपूर्वक विदाई देनी चाहिए. ताकि दूसरे ये समझे कि अच्छे खिलाड़ी के लिए हमेशा ही पूरी दुनिया में सम्मान होता है. नागेश्वर यादव, यमुना विहार, दिल्ली

ज़िदान इस साल के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी है. इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि उन्हें रेड कार्ड दिखाया गया. दरअसल उन्हें इटली के खिलाड़ियों ने उकसाया. इस्माईल ख़ान

ज़िदान मेरे चहेते खिलाड़ी है. उनसे ऐसे व्यवहार की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. लेकिन ये एक सच्चाई है कि उन्हें अब इस कलंक के साथ जीना होगा. उनकी विदाई इस तरह होगी- शायद किसी ने सोचा नहीं होगा. ज़िदान को ये शोभा नहीं देता. हो सकता है कि ग़लती मैतरात्सी की हो, लेकिन उन्हें संयम बरतना चाहिए था. गिरीश, नई दिल्ली

ज़िदान दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक हैं. लेकिन आप इसे क़ायम रखना चाहते हैं तो आपको अपने ग़ुस्से पर क़ाबू रखना सिखना होगा. मेरे विचार से ज़िदान ने अच्छा नहीं किया. अमित उपाध्याय, टोरंटो, कनाडा

ये ज़िदान के फ़ुटबॉल करियर का दुखद अंत था. रमाकांत, न्यूयॉर्क, अमरीका

मुझे ज़िदान बहुत पसंद हैं. वे इस साल के विश्व कप के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी थे. सैफ़ मलिक, जॉर्डन

ज़िदान जैसे विश्व स्तरीय खिलाड़ी तारीफ़ के क़ाबिल हैं लेकिन उन्होंने जो हरकत की, वो अच्छा नहीं था. फ़िरोज़ हुसैन लालजी, डुंगरपुर, राजस्थान

इतने बड़े खिलाड़ी से ऐसे बर्ताव की अपेक्षा नहीं थी. उनका ये बर्ताव इतिहास में काले अक्षरों में लिखा जाएगा. कल्याणराव आनंदराव पाटिल, धुले, महाराष्ट्र

माना कि ज़िदान ने ग़लती की थी, लेकिन उन्हें ऐसी सज़ा नहीं देना चाहिए थी. ज़िदान दुनिया के महान खिलाड़ी हैं. नागेश्वर नागेश, भारत

मैं कहना चाहती हूँ कि महान ज़िदान के साथ जो हुआ वह बहुत बुरा हुआ. रेड कार्ड तो मैतरात्सी को मिलना चाहिए था. क्योंकि उन्होंने ज़िदान को ग़ाली दी थी. इसके बाद भी ज़िदान ने अपना आपा खो दिया. फिर भी ज़िदान को संयम से काम लेना चाहिए था और मैच के बार इस पर सोचना चाहिए था. अर्चना नौटियाल, जर्मनी

इसकी किसी ने भी कल्पना नहीं की थी. इटली के खिलाड़ी ने ज़िदान को ज़रूर कुछ कहा होगा. जिसके कारण ज़िदान इतने ग़ुस्से में आ गए. हो सकता है कि इटली के खिलाड़ियों ने रंगभेद वाली टिप्पणी की होगी, क्योंकि वे ऐसा करने के लिए मशहूर हैं. ज़िदान दरअसल अल्जीरिया मूल के हैं और फ़्रांस के ज़्यादातर खिलाड़ी भी काले है. इस घटना के पीछे कोई न कोई गंभीर बात रही होगी. मयूर बरदोलिया, स्टैफ़ोर्ड, ब्रिटेन

ज़िदान ने बहुत ग़लत किया. रेड कार्ड दिखाने का फ़ैसला शत-प्रतिशत ठीक था. कृष्णा, दुबई

वास्तव में ज़िदान ने जैसा किया, उन्हें उसकी सज़ा मिली. सभी की नज़र फ़्रांस के विश्व कप जीतने की तरफ़ थी. लेकिन ज़िदान के बाहर होने के साथ ही उनके सपने पर भी पानी फिर गया. कल तक जो ज़िदान को अपना आदर्श मानते थे- वे आज उनकी आलोचना कर रहे हैं. प्रह्लाद गिरी, काठमांडू, नेपाल

ज़िदान के साथ जो कुछ भी हुआ, वह ठीक हुआ. क्योंकि ग़लती ज़िदान की थी. रवि रंजन, नई दिल्ली

ज़िदान दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फ़ुटबॉल खिलाड़ी हैं. तबिश अहमद, दिल्ली

मुझे उम्मीद नहीं थी कि इटली विश्व कप जीत जाएगा. मैं ब्राज़ील और इंग्लैंड की फ़ैन हूँ. मेरा मानना है कि इस विश्व कप में रेफ़रियों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया. निर्मला, नेपाल

ज़िदान वाली घटना से बहुत दुख हुआ. उन्हें रेड कार्ड नहीं दिखाना चाहिए था. पटेल याकूब अब्बास, शारजाह, संयुक्त अरब अमीरात

मुझे ज़िदान को लेकर काफ़ी अफ़सोस है. सुनील मनकोटिया, वसंत कुंज, नई दिल्ली

ज़िदान ने फ़ाइनल मैच में जो ग़लती की, वह स्वीकार नहीं की जा सकती. ज़िदान के करियर पर ये काला धब्बा है. शेख़ सफ़ीरुल, सऊदी अरब

मैं इस बात की वजह जानना चाहूँगा कि ज़िदान ने ऐसा व्यवहार क्यों किया. सुनील मंकोटिया, नई दिल्ली, भारत.

बहुत आघात लगा. ऐसे महान खिलाड़ी को ऐसा बर्ताव शोभा नहीं देता है. नितिन पटेल, गुजरात, भारत.

ज़िदान एक महान खिलाड़ी हैं. उसने जान-बूझकर यह नहीं किया होगा. यह जानते हुए कि यह उसका आख़िरी मैच है, रेफ़री को यह व्यवहार नहीं करना चाहिए था. रेहान, दुबई.

ज़िदान मेरे चेहते खिलाड़ी हैं और उनसे ऐसे व्यवहार की कल्पना भी नहीं
की जा सकती, लेकिन ये एक सच्चाई है कि अब उन्हें इस कलंक के साथ जीना होगा. उनकी विदाई इस तरह होगी ये शायद ही किसी ने सौचा होगा. ज़िदान को ये शोभा नहीं देता. हो सकता है गलती मैटराज़ी
की हो लेकिन उन्हे संयम बरतना चाहिये था. गिरीश बूबना, नई दिल्ली, भारत

ज़िदान जैसे खिलाड़ी की इस तरह की हरकत करना मूर्खता है. उनके प्रति आदर ख़त्म हो गया है. गोमेश्वर मेहतो, जर्मनी

इतना महान खिलाड़ी होकर ऐसा नहीं करना चाहीए था. लक्ष्मण पौडेल, नेपाल

मैं ज़िदान का फ़ैन था मगर जिस तरह उन्होंने फ़ाइनल में घिनौनी हरकत की, उससे मैं चकित रह गया. बुरहान बद्री, कुवैत


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ज़िदानसोची न थी ऐसी विदाई
अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल से ज़िदान की ऐसी विदाई होगी, सोचा न था.
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