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क्या है ऐशेज़ का इतिहास? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
क्या है ऐशेज़? ऐशेज़ नाम दिया गया है इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच हर दो साल में होने वाली टेस्ट क्रिकेट शृंखला को. जो भी टीम पाँच मैचों की ये शृंखला जीतती है उसे ऐशेज़ का विजेता माना जाता है. ये सीरीज़ बारी-बारी से इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में आयोजित की जाती है. 2002-03 में ऐशेज़ सीरीज़ ऑस्ट्रेलिया में हुई थी जबकि 2005 में ये मुक़ाबला इंग्लैंड में हो रहा है. ऐशेज़ शुरू कैसे हुई? वैसे तो दोनों देशों के बीच टेस्ट मैच 1877 में शुरु हुए लेकिन ऐशेज़ की शुरुआत 1882 में हुई थी जब ऑस्ट्रेलिया ने पहली बार इंग्लैंड की धरती पर उसे हराया. इस हार से पूरा खेल जगत हैरान रह गया. इंग्लैंड के द स्पोर्टिंग टाइम्स अख़बार ने इसे डेथ ऑफ़ इंग्लिश क्रिकेट यानी इंग्लिश क्रिकेट की मौत तक कह दिया. अख़बार ने लिखा - इंग्लिश क्रिकेट का अंतिम संस्कार किया जाएगा और उसकी राख़ ऑस्ट्रेलिया भेजी जाएगी. बस यही काल्पनिक राख (अंग्रेज़ी में ऐशेज़) असल रूप में आ गई जब इंग्लैंड ने अगली बार ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया. इस दौरे पर जीत हुई इंग्लैंड की और तीन औरतों ने एक लकड़ी की छोटी सी ट्रॉफ़ी में थोड़ी सी राख़ (ऐशेज़) इंग्लैंड के कप्तान आइवो ब्लाई को भेंट की. इसी राख़ से ऐशेज़ की शुरुआत हुई, ये ऐशेज़ आज भी लॉर्ड्स मैदान पर एक शीशे के पिंजरे में सँभाल कर रखी हुई हैं. दरअसल ये ऐशेज़ आइवो ब्लाई ने मारिलिबोन क्रिकेट क्लब को दे दी और आज तक इसी क्लब की संपत्ति है. ऑस्ट्रेलिया की तरफ़ से बार-बार ये माँग होती रही है कि ये ऐशेज़, कम से कम जीतने पर तो उन्हें दी जाए लेकिन एमसीसी नहीं माना. 1998 में क्लब ने असली ऐशेज़ ट्रॉफ़ी की नकल के रूप में शीशे की एक ट्रॉफ़ी बनवा दी जो अब सीरीज़ जीतने वाली टीम को दी जाती है. हालाँकि ये अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये राख़ (ऐशेज़) एक जली हुई गेंद की है या फिर जली हुई विकेटों की एक बेल की. कुछ साल पहले ऐशेज़ को इंग्लैंड लाने वाले पूर्व कप्तान आइवो ब्लाई की बहू ने बताया कि ये ऐशेज़ तो उनकी सास यानी ब्लाई की पत्नी के नक़ाब की थी. कौन कितनी बार जीता है ऐशेज़? 1882 से 2002-03 तक इंग्लैंड ने 26 बार जबकि ऑस्ट्रेलिया ने 30 बार ऐशेज़ पर क़ब्ज़ा किया है. पाँच बार ये मुक़ाबला ड्रॉ रहा. शुरुआत में तो इंग्लैंड ने लगातार सात बार ये सीरीज़ जीती लेकिन 1891 में ऑस्ट्रेलिया ने शानदार वापसी की. इसके बाद बारी-बारी से दोनों टीमें इस ट्रॉफ़ी पर दबदबा बनाती आई हैं. आजकल इस पर ऑस्ट्रेलिया का दबदबा है, वो पिछले आठ बार से लगातार इसे जीतता आ रहा है. |
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