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सेमीफ़ाइनल में जूनियर हॉकी टीम हारी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय टीम हॉलैंड के रोत्रदम में हो रहे जूनियर हॉकी विश्वकप के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हार गया है और अब तीसरे स्थान के लिए उसका मुक़ाबला स्पेन से होगा. शुक्रवार को हुए रोचक मुक़ाबले में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 3-2 से हराया हालाँकि खेल के पहले हिस्से में भारत 2-0 की बढ़त लिए हुए था. वहाँ मौजूद भारतीय खेल पत्रकार अनुपम गुलाटी ने बताया कि भारतीय टीम मध्यांतर तक 2-0 की बढ़त के साथ ड्रेसिंग रूम में गई थी लेकिन मध्यांतर के बाद जब खेल शुरू हुआ तो ऑस्ट्रेलिया ने ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए. ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों का हौसला देखकर साफ़ लगने लगा था कि या तो वे बढ़त कम या फिर बिल्कुल ही ख़त्म करके बराबरी पर आ जाएंगे. भारतीय टीम के लिए अंपायरिंग के कुछ फ़ैसले निराशाजनक रहे और उससे पहले ऑस्ट्रेलिया को एक पैनल्टी कॉर्नर मिला वो नाकाम रहा. उसके बाद जब दूसरा पैनल्टी कॉर्नर मिला तो उसमें उन्होंने एक गोल उतार दिया. उसके सिर्फ़ दो मिनट बाद ही अंपायर ने भारत के ख़िलाफ़ एक पैनल्टी स्ट्रोक दिया जिसे ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने गोल में तब्दील करके 2-2 से बराबरी बना ली. तब तक लगने लगा था कि भारतीय खिलाड़ियों का हौसला पस्त पड़ने लगा है और उसके बाद तो खेल जैसे एकतरफ़ा हो गया. मध्यांतर से पहले भारतीय खिलाड़ियों का जो आक्रामक खेल देखने को मिला था वह मध्यांतर के बाद बिल्कुल ही धराशायी सा हो गया और ऑस्ट्रेलियाई टीम हावी होती चली गई. ऑस्ट्रेलिया ने जल्दी ही तीसरा गोल भी करके बढ़त ले ली जो आख़िर तक बनाए रखी और इस तरह उनकी जीत का रास्ता साफ़ हो गया. हालाँकि जब खेल के पाँच मिनट बचे थे तो भारत को आख़िरी पैनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन संदीप सिंह की पकड़ कमज़ोर थी और गेंद गोल पोस्ट में जाने के बजाय गोलकीपर के पैड से टकराकर बाहर चली गई और इस तरह वह मौक़ा बेकार चला गया. |
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