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जिंबाब्वे क्रिकेट संघ में नस्लवाद नही | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल की एक जांच से पता चला है कि जिंबाब्वे क्रिकेट संघ में नस्लवाद के कोई सबूत नहीं मिले हैं. पूर्व में जिंबाब्वे की राष्ट्रीय टीम के 15 खिलाड़ियों ने आरोप लगाया था कि क्रिकेट संघ में नस्ल के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है. इन खिलाडियों का नेतृत्व जिंबाब्वे के पूर्व कप्तान हीथ स्ट्रीक कर रहे थे जिन्हें विवादास्पद रुप से कप्तानी से हटा दिया गया था. इन खिलाड़ियों ने टीम के लिए खेलना भी बंद कर दिया जिसके बाद आईसीसी ने जांच शुरु की. जांच टीम ने यह भी कहा है कि जिंबाब्वे के टेस्ट मैच खेलने पर लगी रोक हटा दी जानी चाहिए. आईसीसी के अध्यक्ष एहसान मनी ने रविवार को कहा कि दो सदस्यीय जांच टीम को "नस्लवाद को कोई सबूत नहीं मिला" है. दक्षिण अफ्रीकी न्यायाधीश स्टीवन मैजीट और भारत के सालिसीटर जनरल गुलाम वानावती की दो सदस्यीय समिति ने अपनी 73 पृष्ठों की रिपोर्ट में इन आरोपों को खारिज़ कर दिया है. अगर जिंबाब्वे क्रिकेट संघ पर लगे आरोप सही पाए जाते तो संघ पर कई तरह की पाबंदियां लग सकती थी. संघ के अध्यक्ष पीटर चिंगोका ने आईसीसी की रिपोर्ट से प्रसन्नता जताई. उन्होंने कहा " मैं रिपोर्ट से बहुत प्रसन्न ही. संघ पर लगें बेबुनियाद आरोप गलत सिद्ध हुए." नस्लवाद के मामले पर टीम के वरिष्ठ खिलाड़ियों के हट जाने से जिंबाब्वे को पिछले दिनों बिल्कुल नयी टीम उतारनी पड़ी थी. इस टीम का प्रदर्शन इतना खराब था कि जिंबाब्वे को टेस्ट खेलने पर रोक लगा दी गई थी. इस बारे में आईसीसी के मुख्य कार्यकारी मैल्कम स्पीड का कहना था कि जिंबाब्वे के टेस्ट क्रिकेट खेलने पर लगी रोक का फैसला जिंबाब्वे क्रिकेट संघ से बातचीत के बाद लिया गया था. |
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