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होनहार क्रिकेटरों का अपना मैदान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लाहौर के ज़मान पार्क ने पाकिस्तान को तीन क्रिकेट कप्तान दे चुका है लेकिन अब यह अपनी शान को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है. लाहौर के बाहरी हिस्से के इस पार्क में खेलकर इमरान ख़ान, माजिद ख़ान और जावेद बर्की जैसे खिलाड़ी तैयार हुए हैं. इमरान ख़ान के रिश्ते के आठ भाई इस मैदान पर खेलकर प्रथम श्रेणी क्रिकेट में जगह बना चुके हैं लेकिन अब इस मैदान से नौजवान खिलाड़ियों का ऊपर तक पहुँचना बंद सा हो गया है. भारतीय दौरा पार्क के मैनेजर और युवा खिलाड़ियों के कोच जावेद ज़मान ख़ुद भी राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेल चुके हैं. वे पुराने दिनों को याद करते हैं, "हम सप्ताह के अंत में मैच खेलते थे और बाक़ी दिनों में अभ्यास करते थे, इमरान, माजिद और जावेद सब यहीं खेलते थे."
अब से छह वर्ष पहले इस पार्क में खेलने वाले खिलाड़ी भारत के दौरे पर भी गए, उन्होंने पंजाब में मैच खेले. ज़मान कहते हैं, "हमने पंजाब में चार मैच खेले जिनमें से दो हारे और दो जीते, बहुत मज़ा आया था." ज़मान पार्क का इतिहास लगभग 60 वर्ष पुराना है और शुरू से ही लोग यहाँ क्रिकेट खेलते रहे हैं. इस पार्क में खेलने के लिए लाहौर के सभी इलाक़ों से नौजवान आते हैं लेकिन कई दशकों से कोई सितारा नहीं उभरा. इसकी वजह बताते हुए जावेद ज़मान कहते हैं, "इन लड़कों की प्राथमिकताएँ अब बदल गई हैं, क्रिकेट वे खेलते ज़रूर हैं लेकिन उनका ध्यान अपनी पढ़ाई पर भी रहता है." लेकिन ज़माम पार्क में खेलने वाले कई लड़कों की आँखों में राष्ट्रीय टीम में खेलने का सपना है और वे कड़ी मेहनत करते हैं. सोलह वर्ष के नौजवान खिलाड़ी मोहम्मद अब्बास कहते हैं, "मैं हर रोज़ अभ्यास करता हूँ, एक दिन मैं पाकिस्तान की टीम के लिए खेलना चाहूँगा." मोहम्मद का कहना है कि उन्हें इमरान ख़ान ने भी कई क़ीमती सलाहें दी हैं जिन पर वे अमल कर रहे हैं. ज़मान पार्क अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा हासिल कर पाता है या नहीं, यह मोहम्मद अब्बास जैसे नए खिलाड़ियों की मेहनत और लगन पर निर्भर है. |
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