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मुरलीधरन के एक्शन पर फिर विवाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका के स्टार स्पिनर मुथैया मुरलीधरन की गेंदबाज़ी एक्शन पर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी ने इसकी पुष्टि की है कि ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ आख़िरी टेस्ट मैच के दौरान मैच रेफ़री क्रिस ब्रॉड ने मुरलीधरन के एक्शन पर संदेह व्यक्त किया है और इस बारे में आईसीसी को लिखा है. विवाद मुरलीधरन के उस नई गेंदबाज़ी एक्शन पर उठा है जिसके तहत वे ऑफ़ ब्रेक गेंद को दूसरी दिशा में स्पिन करा रहे हैं. मुरलीधरन के एक्शन पर पहले भी विवाद हो चुका है और आईसीसी उन्हें क्लीन चिट दे चुकी है. श्रीलंका क्रिकेट टीम के मैनेजर अजित जयशेखर ने बताया, "मैच रेफ़री क्रिस ब्रॉड ने मुझे बुलाकर यह बताया कि वे मुरलीधरन की उस नई गेंद के बारे में आईसीसी को रिपोर्ट कर रहे हैं जो उलटी दिशा में स्पिन हो रही है." जयशेखर ने बताया कि टेस्ट मैच ख़त्म होने के बाद उन्होंने टीम को इस बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि मुरलीधरन इससे काफ़ी निराश हैं लेकिन उन्हें लगता है कि उनकी नई गेंद को लेकर कोई समस्या नहीं होनी चाहिए. विवाद मुरलीधरन के एक्शन पर पहली बार विवाद 1995 में हुआ था जब ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर अंपायर डेरेल हेयर ने उनकी गेंद को ग़लत एक्शन के कारण नो बॉल ठहराया था.
1998 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर एक दिवसीय मैच के दौरान तो हालात और बिगड़ गए और मुरलीधरन की गेंदबाज़ी को अंपायर ने 'थ्रो बॉल' ठहरा दिया. इसके विरोध में उस समय टीम की कप्तानी कर रहे अर्जुन रणतुंगा अपनी टीम को मैदान से बाहर ले गए. मामला आईसीसी के पास गया और फिर मुरलीधरन को इस आधार पर क्लीन चिट दे दी गई कि उनका हाथ ही इस तरह है कि वे गेंदबाज़ी करते समय उसे पूरी तरह मोड़ नहीं पाते. लेकिन अब नई स्थिति में श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को मुरलीधरन के बारे में अपनी रिपोर्ट छह सप्ताह के अंदर आईसीसी को सौंपनी होगी. अगर एक साल के अंदर अगर मुरलीधरन के एक्शन पर दोबारा संदेह हुआ तो आईसीसी द्वारा नियुक्त एक समीक्षा समिति इसकी जाँच करेगी. मुरलीधरन 513 विकेट ले चुके हैं और वॉल्श के रिकॉर्ड 519 विकेट को तोड़ने से सिर्फ़ सात विकेट दूर हैं. इस विवाद के बावजूद मुरलीधरन अप्रैल के मध्य से ज़िम्बाब्वे दौरे पर जा सकेंगे. |
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