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इतिहास बनाने का मौक़ा है: बेदी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान बिशन सिंह बेदी ने कहा है कि भारत की टीम अपने प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को उसी की धरती पर हरा कर इतिहास बना सकती है. बीबीसी हिंदी सेवा के फ़ोन-इन कार्यक्रम 'आपकी बात बीबीसी के साथ' में श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने सौरभ गांगुली के फ़ॉर्म को लेकर चिंता जताई. बेदी ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए विदेशी कोच की व्यवस्था पर अपनी नाख़ुशी ज़ाहिर की. बेदी ने भारतीय टीम के पाकिस्तान दौरे के बारे में कहा, "भारतीय खिलाड़ियों के पास पाकिस्तान को पाकिस्तान में ही हरा कर इतिहास बनाने का अवसर है." उन्होंने कहा, "मेरे मन में कोई संदेह नहीं है कि भारतीय टीम प्रतिद्वन्द्वी पाकिस्तानी टीम से बेहतर है." न्यूट्रल अंपायर बेदी ने पिछले दौरों के समय पाकिस्तान में अंपायरिंग की स्थिति पर चुटकी लेते हुए कहा, "इस सिरीज़ में न्यूट्रल अंपायरों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है." उन्होंने कहा कि पहले दो एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच अहम होंगे और उनसे यह तय होगा कि सिरीज़ किसके हाथ लगेगी.
बेदी ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों को पाकिस्तान के दर्शकों पर ध्यान नहीं देना होगा क्योंकि ज़ाहिर है घरेलू दर्शक अपनी टीम को बढ़ावा दे रहे होंगे. भारतीय गेंदबाज़ी को अपेक्षाकृत कमज़ोर बताते हुए उन्होंने कहा, "गेंदबाज़ी हमेशा एक कमज़ोर कड़ी रही है. इस बारे में कोई संदेह नहीं रहना चाहिए.... ऑस्ट्रेलिया दौरे पर सिडनी टेस्ट में हम इसलिए हारे क्योंकि टीम में एक गेंदबाज़ कम था." बेदी ने कहा, "एक और कमज़ोर कड़ी विकेटकीपिंग की है. राहुल द्रविड़ से विकेटकीपिंग और बल्लेबाज़ी दोनों कराना क्या ज़्यादा नहीं हो जाता है?" लेकिन इन सब कमियों के बावजूद भारतीय टीम पर अपने भरोसे के बारे में उन्होंने कहा, "टीम पर मेरे विश्वास का कारण है हमारे पास तीन गेंदबाज़ों राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण और सचिन का होना, जो कि पाकिस्तानी गेंदबाज़ों की नींद हराम कर सकते हैं." भारतीय कप्तान सौरभ गांगुली के बारे में बेदी ने एक श्रोता की इस राय से सहमति जताई कि उन्हें शॉर्ट-पिच गेंदों को खेलने में अब भी परेशानी होती है, तीन साल पहले भी परेशानी होती थी. उन्होंने भारतीय टीम के लिए विदेशी कोच रखे जाने की परंपरा के प्रति अपना विरोध जारी रखा. बेदी के अनुसार तीन साल से एक विदेशी कोच होने के बावजूद भारतीय क्रिकेट टीम को इससे कोई ख़ास फ़ायदा नहीं मिला है. |
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