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सोमवार, 19 जनवरी, 2004 को 01:30 GMT तक के समाचार
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लिटिल मास्टर बेटे का मैदान में रंग
रोहन और सुनील गावस्कर
क्या बेटा बाप का रंग दिखा पाएगा?

क्रिकेट के मैदान में लिटिल मास्टर के नाम से मशहूर रहे सुनील गावस्कर के बेटे रोहन गावस्कर ने क्रिकेट के मैदान में क़दम रख दिया है लेकिन क्या वे उम्मीदों पर खरे उतर पाएंगे.

रोहन क्रिकेटर पिता के कोई पहले बेटे नहीं हैं जो पिता के पदचिन्हों पर चल रहे हैं.

इस क़तार में उनका 42वाँ नंबर है यानी उनसे पहले 41 ऐसे क्रिकेटर रह चुके हैं जिन्होंने अपने बाप-दादाओं के नक़्शे क़दम पर चलकर क्रिकेट में नाम कमाया.

लेकिन रोहन गावस्कर पर दबाव कुछ ज़्यादा ही महसूस किया जा रहा है क्योंकि उनसे सुनील गावस्कर के बल्ले के करिश्मे की उम्मीदें की जाने लगी हैं.

रोहन ने रविवार को ब्रिसबोन में ऑस्ट्रेलिया के एंड्रयू सायमंड का बेहतरीन कैच लपककर अपने हुनर का कुछ नमूना तो दिया है.

यह उनका पहला अंतरराष्ट्रीय मैच था. रोहन के अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने में कुछ देरी हुई है लेकिन उन्होंने इस मैच में अपनी अच्छी हाज़री दर्ज कराई है.

महान पिता

 सुनील गावस्कर का बेटा होना सचमुच एक गौरव की बात है. मैं हर रोज़ यह महसूस करता हूँ. वह सचमुच महान रहे हैं

रोहन गावस्कर

अब रोहन के सामने यही चुनौती है कि वह सिर्फ़ सुनील गावस्कर के बेटे के रूप में ही अपनी पहचान न रखें बल्कि ख़ुद की पहचान बनाएं.

27 वर्षीय इस हरफ़नमौला खिलाड़ी का कहना है, "सुनील गावस्कर का बेटा होना सचमुच एक गौरव की बात है. मैं हर रोज़ यह महसूस करता हूँ. वह सचमुच महान रहे हैं."

"लेकिन अब मुझे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी ख़ुद की पहचान बनाने का मौक़ा मिला है."

रोहन कहते हैं, "मैं सात साल से भारत में प्रथम श्रेणी का क्रिकेट खेल रहा हूँ और अब मेरी ख़ुद की क्रिकेट पहचान बन चुकी है."

रोहन का कहना है कि जब मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था तब लोगों की शायद मुझसे कुछ ज़्यादा उम्मीदें थीं लेकिन अब मेरी ख़ुद की एक पहचान बन चुकी है."

ऑस्ट्रेलिया में चल रही सिरीज़ के दौरान मोहम्मद क़ैफ़ को चोट लगने की स्थिति में रोहन गावस्कर को अंतिम समय में टीम में शामिल किया गया.

नाम का कमाल

रोहन का नाम वेस्ट इंडीज़ के पूर्व कप्तान रोहन कन्हाई के नाम पर रखा गया है.

रोहन कहते हैं, "जब उन्हें राष्ट्रीय टीम में शामिल करने की घोषणा की गई तो तीन दिन तक उनकी मुस्कुराहट बंद नहीं हुई थी.

रोहन गावस्कर
रोहन ने सायमंड का बेहतरीन कैच लपका

लेकिन आज भी रोहन अपने पिता सुनील गावस्कर के बारे में बड़ी ख़ुशी से बात करते हैं.

टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज़्यादा शतक लगाने का विश्व रिकॉर्ड आज भी सुनील गावस्कर के नाम ही है और उन्होंने 34 शतक लगाए.

इसके अलावा सबसे ज़्यादा टेस्ट रन बनाने के मामले में भी वह तीसरे स्थान पर हैं.

उन्होंने दस हज़ार 122 रन बनाए और ऑस्ट्रेलिया के एलन बॉर्डर और स्टीव वा के बाद तीसरे स्थान पर हैं.

जबकि छोटे गावस्कर ने प्रथम श्रेणी के क्रिकेट में 4913 रन बनाए हैं.

भारतीय टीम के कप्तान सौरभ गांगुली का कहना है, "रोहन जानते हैं कि वह सुनील गावस्कर नहीं बन सकते और इस मामले में उन पर ख़ासा दबाव है. लेकिन इसके बावजूद वह एक सामान्य ज़िंदगी जीते हैं.

"रोहन में अपने पिता के मुक़ाबले कुछ ज़्यादा आक्रामक होने का रुझान है. लेकिन यह स्वाभाविक है क्योंकि वह एक दिवसीय क्रिकेट खेल रहे हैं."

क्रिकेट प्रेमियों को रोहन के खेल में लिटिल मास्टर के बल्ले का जादू नज़र आए या नहीं लेकिन इतना तो लग रहा है कि उनमें सुनील गावस्कर की छवि ज़रूर नज़र आएगी क्योंकि सूरत से वह अपने पिता से काफ़ी मिलते हैं.

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