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बुधवार, 10 दिसंबर, 2003 को 08:56 GMT तक के समाचार
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भारतीय क्रिकेटरों की नई पीढ़ी
कुणाल लाल
कुणाल लाल भी तेज़ गेदबाज़ी करते हैं

20 साल पहले भारतीय क्रिकेट टीम ने विश्व कप जीतकर अपने देश को क्रिकेट के उन्माद से भर दिया था.

उस समय टीम में शामिल क्रिकेटरों को जैसे भगवान का ही दर्जा मिल गया था लेकिन फिर धीरे-धीरे वे जैसे इतिहास के पन्नों में खो गए.

हालाँकि कई क्रिकेटर क्रिकेट की दुनिया से जुड़े रहे और कोच जैसी भूमिका भी निभाते रहे.

लेकिन अब उन क्रिकेटरों की नई पीढ़ी मैदान में अपने प्रदर्शन का जलवा दिखा रही है और वो दिन दूर नहीं जब उन्हें राष्ट्रीय टीम में भी मौक़ा मिले.

दिल्ली क्रिकेट टीम के कोच और विश्व कप विजेता भारतीय टीम के प्रमुख सदस्य मदन लाल के बेटे कुणाल लाल ने हाल ही में रणजी ट्रॉफी में अपना पहला मैच खेला.

बाएँ हाथ के तेज़ गेंदबाज़ कुणाल ने रेलवे के ख़िलाफ़ अपने पहले रणजी मैच में पाँच विकेट चटकाए.

अपने बेटे के प्रदर्शन से ख़ुश मदन लाल कहते हैं, "कुणाल ने अभी तो शुरुआत ही की है. क्रिकेट की दुनिया उसके लिए नई है. प्रेस से बात करने से पहले उसे कुछ मैच तो खेलने दीजिए."

स्टुअर्ट बिन्नी और सादिक़ किरमानी

1983 के विश्व कप में मदन लाल ने 17 विकेट लिए थे, लेकिन सर्वोच्च सम्मान मिला रोजर बिन्नी को.

बिन्नी भी आजकल अपने 19 वर्षीय बेटे स्टुअर्ट को क्रिकेट के गुर सिखाने में लगे हैं.

अपने पिता की तरह स्टुअर्ट दाएँ हाथ से मध्यम तेज़ गेंदबाज़ी करते हैं, निचले क्रम के उपयोगी बल्लेबाज़ हैं और साथ में बेहतरीन फ़ील्डर भी.

कर्नाटक टीम के नियमित सदस्य स्टुअर्ट ने अंडर 19 विश्व कप में भारतीय टीम का भी प्रतिनिधित्व किया था.

कर्नाटक टीम में उनका साथ निभाने के लिए मौजूद हैं भारत के महान विकेटकीपर बल्लेबाज़ रहे सैयद किरमानी के सुपुत्र सादिक़ किरमानी.

1983 विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर चुने गए सैयद किरमानी फ़िलहाल राष्ट्रीय चयन समिति के अध्यक्ष हैं.

उनकी तरह सादिक़ भी विकेटकीपर बल्लेबाज़ हैं और अंडर-15 टूर्नामेंट में कर्नाटक की ओर से खेलते हैं.

रोहन गावसकर

क्रिकेटरों की नई पीढ़ी में सुनील गावसकर के बेटे रोहन गावसकर को सबसे ज़्यादा अनुभवी माना जा सकता है.

रोहन गावसकर राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं बना पाए हैं

लेकिन राष्ट्रीय टीम में अभी भी वे जगह नहीं बना पाए है.

इस समय रोहन गावसकर बंगाल के कप्तान हैं और इंडिया ए टीम में भी शामिल रहे हैं.

अपने पिता से उलट रोहन गावसकर बाएँ हाथ से बल्लेबाज़ी करते हैं.

इंडिया ए की तरफ से खेलते हुए हाल ही में रोहन ने श्रीलंका ने ख़िलाफ़ मैच जिताने वाली 173 रनों की बेमिसाल पारी खेली थी.

लेकिन अभी भी रोहन अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं और राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने की कोशिश नाकाम साबित हुई है.

सुनील गावसकर का मानना है कि उनके बेटे को मौक़े-बेमौक़े ग़लत अंपायरिंग की सज़ा भी भुगतनी पड़ी है.

हाल ही में गावसकर ने कहा था, "अंपायर यह दिखाना चाहते हैं कि वे गावसकर के नाम से प्रभावित नहीं हैं और इस कारण वे रोहन को संदेह का लाभ भी नहीं देते जो वे किसी और को आसानी से दे देते हैं."

इन खिलाड़ियों के साथ-साथ कई भूतपूर्व भारतीय क्रिकेटरों से जुड़े नई पीढ़ी के क्रिकेटर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

रेलवे के ख़िलाफ़ अपना पहला प्रथम श्रेणी मैच खेलने वाले पुरुराज सिंह राठौड़ भारतीय टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज़ चेतन चौहान के भतीजे हैं.

शिवलाल यादव के बेटे जोगराम यादव भी क्रिकेट की दुनिया में अपने पैर जमाने की कोशिश कर रहे हैं. बृजेश पटेल के बेटे उदित पटेल ऑफ़ स्पिन गेंदबाज़ी से लोगों को आकर्षित कर रहे हैं.

जहाँ तक भारतीय टीम के कप्तान रहे कपिल देव की बात है, नई पीढ़ी के खिलाड़ियों में उनका नाम इसलिए शुमार नहीं क्योंकि उनकी सिर्फ़ आठ साल की बिटिया ही है.

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