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बहुत बड़ी उपलब्धि - विक्रम वर्मा
भारत को 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी मिलने पर केंद्रीय खेल मंत्री विक्रम वर्मा ने कहा है कि यह भारत के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी ने कहा है कि भारत एक अरब लोगों का एक मज़बूत देश है और उसे मेज़बानी मिलना राष्ट्रमंडल आंदोलन की जीत है. जबकि फ़्लाइंग सिख मिल्खा सिंह ने कहा है कि इससे भारत में खेल की गतिविधियाँ भी बढ़ेंगी और स्तर भी सुधरेगा. बीबीसी से हुई बातचीत में खेल मंत्री विक्रम वर्मा ने मेज़बानी हासिल करने में पेश आई दिक़्क़्तों का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसके लिए सरकार पिछले एक साल से कोशिशें कर रही थी और इसी का नतीजा अब सामने आया है. खेल मंत्री ने हाल ही में हैदराबाद में अफ़्रो एशियाई खेलों के सफल आयोजन को भी इसका श्रेय दिया. उन्होंने समर्थन देने वाले देशों का आभार भी व्यक्त किया है. खेलों के लिए दिल्ली की तैयारी के बारे में खेल मंत्री का कहना था कि दिल्ली में 75 प्रतिशत बुनियादी ढाँचा तो अभी ही मौजूद है और बाक़ी अगले छह-सात वर्षों में पूरा कर लिया जाएगा. निवेश आएगा दूसरी ओर समाचार एजेंसी रॉयटर के अनुसार भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी ने कहा, ''राष्ट्रमंडल खेल संघ के लोगों को लगा कि भारत के साथ अन्याय होता रहा है और भारत को मिले 46 वोट इसके सबूत हैं.'' उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल का पचास प्रतिशत तो भारत में ही रहता है. उन्होंने आशा जताई कि इन खेलों के आयोजन से भारत में ओलंपिक खेलों की गतिविधियाँ बढ़ेंगीं और देश में पूँजी निवेश भी बढ़ेगा. 1952 में राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले और फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर मिल्खा सिंह ने इस ख़बर पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि इन आयोजनों से देश के भीतर गतिविधियाँ बढ़ेंगी और खेलों का स्तर बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में जो खेल शामिल हैं उनमें भारत का प्रदर्शन पहले से ही अच्छा है लेकिन एथलेटिक में प्रदर्शन को सुधारना होगा. पैसा कहाँ से आएगा भारतीय ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष रणधीर सिंह ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि राष्ट्रमंडल के सभी छह ज़ोन के लोगों ने भारत का साथ दिया. यह पूछने पर कि इस आयोजन का ख़र्च भारत किस तरह उठाएगा, रणधीर सिंह ने कहा, ''इन दिनों खेलों में प्रायोजन इतना मिलने लगा है कि ख़र्च की चिंता नहीं करनी चाहिए.'' उन्होंने कहा कि 2002 में मैनचेस्टर में कोई दस करोड़ डॉलर यानी चार सौ पचास करोड़ रुपयों का प्रायोजन मिला था और मेलबोर्न में खेलों का आयोजन करने वालों का दावा है कि 2006 तक उन्हें बारह या एक सौ तीस करोड़ डॉलर का प्रायोजन मिल जाएगा. उनका कहना था कि जब भारत में खेलों का आयोजन होगा तब तक भारत 15 करोड़ डॉलर छह सौ पचहत्तर करोड़ रुपयों से ज़्यादा का प्रायोजन मिल जाएगा. रणधीर सिंह के अनुसार चूंकि भारत में मजदूरी और अन्य खर्च पश्चिमी देशों की तुलना में बहुत कम है इसलिए पैसों की चिंता नहीं करना चाहिए. |
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