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मंगलवार, 21 अक्तूबर, 2003 को 02:22 GMT तक के समाचार
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क्या खोया क्या पाया भारत ने

वीवीएस लक्ष्मण
लक्ष्मण भारतीय मध्यक्रम बल्लेबाज़ी की रीढ़ साबित हुए

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच टेस्ट सिरीज़ बिना हार-जीत के ख़त्म हो गई है. भारत के लिए आकाश चोपड़ा को इस सिरीज़ की खोज कहा जा सकता है. तो वीवीएस लक्ष्मण को भारतीय मध्यक्रम बल्लेबाज़ी की रीढ़.

लेकिन अगर ये कहा जाए कि न्यूज़ीलैंड ने भारत को उसकी धरती पर ही मात देने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी तो अतिश्योक्ति नहीं होगी.

दूसरे टेस्ट में एकबारगी ऐसा लगा कि भारत के हाथ से ये टेस्ट ही निकल जाएगा.

लेकिन वीवीएस लक्ष्मण एक बार फिर भारतीय मध्यक्रम की रीढ़ साबित हुए और अपनी संतुलित बल्लेबाज़ी से उन्होंने भारत को एक शर्मनाक हार से बचा लिया.

सिरीज़ ड्रा होने के बाद हो सकता है कि अहमदाबाद के बाद मोहाली की पिच को भी दोष दिया जाए और साथ में कई और बहाने भी ढूँढ़े जाएँ.

लेकिन भारत को ऑस्ट्रेलिया के दौरे के पहले वाकई एक अच्छी टेस्ट टीम की शक्ल लेनी है, तो इस सिरीज़ से सीखना होगा.

गेंदबाज़ी

कुंबले की गेंदबाज़ी भारत को नहीं जिता पाई

इस सिरीज़ में अगर सबसे ज़्यादा निराश किया, तो वह भारतीय तेज़ गेंदबाज़ों ने.

अहमदाबाद में पहले दिन को छोड़ दिया जाए, तो भारतीय तेज़ गेंदबाज़ एक-एक विकेट को तरसते रहे.

ख़ैर अहमदाबाद में पहली पारी में चार विकेट चटकाने वाले ज़हीर ख़ान दूसरी पारी में कुछ ख़ास नहीं कर पाए.

और एल बालाजी को तो दो टेस्ट में सिर्फ़ एक विकेट मिले.

मोहाली टेस्ट में तो तेज़ गेंदबाज़ों ने इतना निराश किया कि पूछिए मत.

जहाँ न्यूज़ीलैंड के तेज़ गेंदबाज़ डेरेल टफ़ी ने सात विकेट चटकाकर मैन ऑफ़ द मैच का पुरस्कार हासिल किया, वहीं ज़हीर ख़ान और बालाजी एक-एक विकेट को तरसते रहे.

हालात तो ये थे कि पहले तीन दिन तक न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ों ने भारतीय गेंदबाज़ों की बखिया उधेड़ दी.

अगर थोड़े बहुत चले भी तो स्पिनर. पहले टेस्ट में अनिल कुंबले और हरभजन सिंह ने दबाव तो बनाया.

लेकिन आख़िरी दिन वे नाथन एस्टल और मैकमिलन की दीवार को नहीं तोड़ पाए.

बल्लेबाज़ी

भारतीय बल्लेबाज़ी का आकलन करें, तो पहले टेस्ट में उनकी चली इसमें कोई दो मत नहीं.

लेकिन घूम-फिर कर बात वहीं आती है कि ज़रूरत के समय भारतीय बल्लेबाज़ी बिखर जाती है.

आकाश चोपड़ा ने प्रभावित किया

अहमदाबाद में जहाँ भारतीय बल्लेबाज़ों ने अपना कमाल दिखाया, तो मोहाली में वे बिखरते नज़र आए.

राहुल द्रविड़ की 222 रनों की पारी यादगार रही और उन्होंने वाकई साबित भी किया कि वे अभी भी मिस्टर भरोसेमंद हैं.

कप्तान सौरभ गांगुली ने भी सैकड़ा लगाया. वीवीएस लक्ष्मण के साथ नए सलामी बल्लेबाज़ आकाश चोपड़ा ने भी अच्छी पारियाँ खेली.

आकाश चोपड़ा ने मोहाली में भी अच्छी पारी खेली और वीरेंद्र सहवाग के साथ उनकी जोड़ी जमती नज़र आ रही है.

अब बात करें मोहाली टेस्ट की. न्यूज़ीलैंड के विशाल 630 रनों का पीछा कर रही भारतीय टीम ने शुरुआत तो अच्छी की, लेकिन एक बार फिर वही मुश्किल जिसने सालों से भारत का पीछा नहीं छोड़ा है.

एक समय अच्छी स्थिति में नज़र आ रही भारतीय टीम बाद में ऐसी बिखरी की फॉलोऑन करना पड़ा.

और जब दूसरी पारी शुरू हुई, तो एक समय 18 रन पर तीन विकेट.

वो तो आकाश चोपड़ा और वीवीएस लक्ष्मण ने संतुलन बनाए रखा, नहीं तो भारत के लिए मैच बचाना मुश्किल हो जाता.

देखा जाए तो इस सिरीज़ में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने निराश किया.

55 रनों की साधारण और धीमी पारी के अलावा उनके लिए कुछ ख़ास नहीं रहा.

मोहाली की दूसरी पारी में तो उनका आउट होना काफ़ी निराशाजनक रहा.

सभी खिलाड़ियों का अच्छा-बुरा समय तो चलता रहता है, लेकिन एक-दो खिलाड़ी को छोड़कर सबका बिखर जाना टीम के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं.

पहला टेस्ट खेल रहे युवराज सिंह के पास भी अपने को साबित करने का मौक़ा था, लेकिन वे चूक गए.

ख़ैर टेस्ट और सिरीज़ ड्रा होने से भारत ने राहत की साँस तो ज़रूर ली होगी, लेकिन त्रिकोणीय सिरीज़ और फिर ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए गंभीरता से विचार करना होगा.

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