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![]() राष्ट्रीय दलों का प्रदर्शन अस्सी के दशक के आख़िरी चरण से गठबंधन सरकारों का जो दौर शुरु हुआ वो लोकसभा चुनाव-2004 में भी देखने को मिला.
जब कांग्रेस की अगुआई में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार बनी तो इसमें पंद्रह से ज़्यादा दल शामिल थे. हालाँकि बाद में कई हटे और नए दल इसमें शामिल हुए. लेकिन ये बात पुख़्ता हो गई कि दोनों मुख्य राष्ट्रीय दलों कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का जनाधार इतना नहीं है कि निकट भविष्य में अकेले दम पर सरकार बनाने में सक्षम हो सकें. कांग्रेस को जहां कुल मतों का लगभग 26 फ़ीसदी प्राप्त हुआ, वहीं भाजपा को लगभग 22 फ़ीसदी मत मिले. दूसरी ओर क्षेत्रीय दलों को सबसे ज़्यादा लगभग 29 फ़ीसदी मत मिले. चुनाव आयोग के मानदंडों के मुताबिक राष्ट्रीय दलों की संख्या अभी छह है जिनमें भाजपा, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी (बसपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) शामिल हैं. इन छह दलों ने लोकसभा चुनाव 2004 में कुल 364 सीटें हासिल की. कांग्रेस 145 सीटों के साथ सबसे आगे रही जबकि भाजपा को 138 सीटें मिलीं. सीपीएम-सीपीआई पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा वाम दलों का गढ़ रहा है. पिछले चुनावों में सीपीएम को इन्हीं तीनों राज्यों से 43 सीटें मिलीं.
इनमें से पश्चिम बंगाल में 26, केरल में 12, त्रिपुरा में दो, तमिलनाडु में दो और आंध्र प्रदेश में एक सीट मिली. वहीं सीपीआई को मिली दस सीटों में से पश्चिम बंगाल से तीन, केरल से तीन, झारखंड, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से एक-एक सीट आई. सीपीएम को 5.66 और सीपीआई को 1.41 फ़ीसदी मत मिले. बसपा-एनसीपी बहुजन समाज पार्टी को पिछले चुनाव में 19 सीटें मिलीं और ये सब की सब उत्तर प्रदेश से आई. हालाँकि पार्टी ने पूरे देश में 435 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे. पार्टी को कुल मतदाताओं में 5.33 फ़ीसदी मतदाताओं का वोट मिला. उधर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी को सिर्फ़ महाराष्ट्र से नौ सीटें मिली थीं. पार्टी ने 32 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे और उसे 1.8 फ़ीसदी मत मिले. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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