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![]() लोकसभा चुनाव 2009: पार्टियों के घोषणा पत्र घोषणा पत्र: दावे और वादे भारत में 15वीं लोकसभा के जनादेश के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समेत दूसरी पार्टियों ने अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर ली है. पार्टियों ने अपने-अपने घोषणा पत्र जारी कर दिए हैं और 'बेहतर शासन' देने के बड़े-बड़े वादे किए हैं. कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार की पाँच साल की उपलब्धियों का बखान किया है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दावा किया है कि यूपीए सरकार 2004 के घोषणा पत्र के 80 फ़ीसदी वादे पूरे करने में सफल रही है. घोषणा पत्र में कांग्रेस ने अपनी उपलब्धियों में सूचना का अधिकार, राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गांरटी योजना, भारत निर्माण, किसानों के लिए कर्ज़ माफ़ी, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन, उच्च शिक्षा का विस्तार, अल्पसंख्यकों तथा कमज़ोर वर्गों के सशक्तिकरण की कई योजनाओं का ज़िक्र किया है. उधर, भाजपा ने 11 साल बाद पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र जारी किया है. भाजपा ने कांग्रेस के दावों को झुठलाने की कोशिश की है और अपने घोषणा पत्र में सस्ते अनाज और सुरक्षा का वादा किया है. भाजपा एक बार फिर अयोध्या में राम मंदिर, समान नागरिक संहिता और धारा 370 जैसे विवादित मुद्दों पर लौटी है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने केंद्र में ग़ैर-कांग्रेस, ग़ैर-भाजपा सरकार की हिमायत की है. पार्टी का कहना है कि देश की स्वतंत्र विदेश नीति होनी चाहिए. पार्टी ने कहा है कि अगर उनकी या उनके समर्थन वाली सरकार आती है तो अमरीका के साथ असैन्य परमाणु क़रार की समीक्षा होगी. चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर कमेटी बनेगी. इस बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि वह अलग विदर्भ और तेलंगाना राज्य की मांग का समर्थन करती है. साथ ही उसने अंडमान निकोबार को राज्य का दर्जा प्रदान करने की मांग को उचित बताया है. पार्टी ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की भी मांग की है. बहुजन समाज पार्टी ने हमेशा की तरह घोषणा पत्र के मुद्दे पर अपना बयान दोहरा दिया है. पार्टी का कहना है कि वो घोषणा पत्र जारी करने में विश्वास नहीं रखती और न ही इसकी ज़रूरत समझती है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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