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भारत बनाम इंडिया
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भारत बनाम इंडिया
 
 
 
 
 
 
 
भारत बनाम इंडिया
एक देश, एक सीमा रेखा, एक सरकार, एक संविधान, एक जैसे अधिकार... पर 60 बरसों के सफ़र के बाद भी भारत में एक मंच पर सब एक साथ नहीं पहुँच सके हैं.

कुछ ने विकास के पंख लगाकर अंतरिक्ष तक की यात्रा की है. संचार क्रांति के विशेषज्ञ बनकर दुनिया में झंडे गाड़े हैं. सपेरों के देश के दीन-हीन का थैला छोड़ सुविधाओं के लैपटॉप थाम लिए. पहाड़ों से ऊँची इमारतें खड़ी कर ली हैं... इसे इंडिया कहते हैं.

उधर एक बहुमत समुदाय अभी भी साफ़ पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोटी, कपड़ा, एक अदद पक्की छत और मूलभूत अधिकारों के लिए रात-दिन सपने बुन रहा है. टकटकी लगाए बैठा है. कंप्यूटर का नाम उसने नहीं सुना, उसे इंतज़ार है अपने गाँव तक बिजली के खंभों के आने का ताकि रात ढले घर में रोशनी हो, दिन में चिड़ियों की क़तारें इन तारों पर झूलें. किताबों और पाठशाला तक हर बच्चे का हाथ हो, दवा के बिना कोई न मरे और भूख से कोई मरने को मजबूर न हो... इसे भारत कहते हैं.

सुनिए

हमने तय किया कि इस इंडिया और भारत को एक-दूसरे से रूबरू होने का मौका दिया जाए ताकि दोनों एक-दूसरे को समझ सकें, सपने गढ़ सकें, हाथ बढ़ा सकें.

बीबीसी संवाददाता रेणु अगाल ने इसके लिए दिल्ली की पारुल को भारत देखने और बाड़मेर के खारीगांव की सोनी को इंडिया देखने का अवसर दिया. आप भी जानें कि एक-दूसरे से रूबरू भारत और इंडिया यानी सोनी और पारुल ने पहली बार गांव से शहर और शहर से गांव की यात्रा करके क्या देखा और समझा.
 
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