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![]() रेल बजट : एक नज़र में चुनाव पर नज़र इस वर्ष का रेल बजट बिल्कुल वैसा ही रहा जैसी की संभावना जताई जा रही थी. बजट पेश करने से पहले ही ऐसा लग रहा था कि यूपीए सरकार अगले साल निर्धारित संसदीय चुनावों से पहले अपने आख़िरी रेल बजट में कुछ लोक-लुभावन घोषणाएँ कर सकते हैं. और ठीक ऐसा ही हुआ. सबकी नज़रें यात्री किरायों में होने वाली फेरबदल पर थी और लोकसभा में भारी शोर शराबे के बीच रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने यात्री किराया घटाने की घोषणा कर दी. उन्होंने समाज के सभी तबकों का इसमें ध्यान रखने की कोशिश की और सभी श्रेणियों के किराए कम कर दिए. कुलियों को भी तोहफ़ा दिया. उन्हें गैंगमैन के रुप में नियुक्त करने की घोषणा हुई. हर साल की तरह इस साल भी नई रेलगाड़ियाँ चलाने की घोषणा की गई और उस पर हंगामा भी हुआ. इस वर्ष दस नए गरीब रथ और 53 नई रेलगाड़ियाँ चलाने की घोषणा की गई. दक्षिणी राज्यों के सांसदों ने बजट के दौरान शोर शराबा किया. उनकी शिकायत यह थी उन्हें इस बजट से कुछ ख़ास हासिल नहीं हुआ है. रेल मंत्री ने सुरक्षा को सर्वोपरी बताते हुए यात्रियों के लिए 'आराम और सुविधा' को रेलवे का मूलमंत्र बताया. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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