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![]() मंदी का असर अंतरिम बजट भाषण में प्रणब मुखर्जी ने वैश्विक मंदी के ख़तरों से आगाह किया लेकिन भरोसा जताया भारत का आर्थिक विकास दर सात फ़ीसदी के आस-पास बनी रहेगी.
मंदी का ज़िक्र करते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा, "वैश्विक मंदी का असर अभी ख़त्म नहीं हुआ है. विकासशील देश इस संकट से जूझ रहे हैं और वर्ष 2009 में स्थिति और ख़राब होने का अंदेशा है." उन्होंने माना कि भारत में औद्योगिक उत्पादन में कमी आई है लेकिन इसके बावजूद 7.1 फ़ीसदी विकास दर हासिल करने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा. प्रणब मुखर्जी ने कहा कि मंदी के बावजूद अप्रैल-नवंबर 2008 के बीच 23 अरब डॉलर से ज़्यादा का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भारत में आया है. उन्होंने कहा कि आर्थिक मंदी के असर से निपटने के लिए जो भी उपाय ज़रूरी हैं वो किए जाएंगे और इसकी ज़िम्मेदारी नई सरकार पर होगी. अप्रैल से दिसंबर 2008 के बीच निर्यात में 17 फ़ीसदी की कमी आई है. दिसंबर में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक दो फ़ीसदी गिरा है. बजट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने के लिए लगभग 70 हज़ार करोड़ रूपए की 54 योजनाएँ शुरु की गई है जिनमें निजी क्षेत्र की भागीदारी भी है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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