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भारत 2008
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एक नज़र
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
एक नज़र

एक नज़र

 

वक़्त बीतते पता नहीं चलता. कभी-कभी लगता है कि बस चंद माह पहले की ही बात है कि लोग तहे दिल से वर्ष 2008 का स्वागत कर रहे थे.

लेकिन पिछले एक साल के घटनाचक्र को देखें तो अहसास होता है कि लम्हा-लम्हा इस दौरान दुनिया नित नई शक़्ल अख़्तियार करती गई.

वर्ष 2008 बीतने को है. हर साल की तरह इस साल भी भारत में कई घटनाएँ हुईं जिनकी गूंज अगले साल भी सुनाई देगी.

भारत में पिछले एक वर्ष में बहुत बदलाव आए हैं और आने वाले दिनों में भी, ज़ाहिर है तरह-तरह की घटनाओं के हम सब गवाह बनेंगे.

भारत के लिए वर्ष 2008 धमाकों और आपदाओं का साल रहा लेकिन बीच में कुछ ऐतिहासिक उपलब्धियों की चमक भी नज़र आई.

मुंबई हमलों ने जहाँ भारत को झकझोर कर रख दिया वहीं चंद्रयान की यात्रा की शुरुआत के साथ ही भारत अंतरिक्ष अनुसंधान की नई पीढ़ी में प्रवेश कर गया.

वर्ष 2008 भारत में जिन बातों के लिए ख़ास तौर पर याद किया जाएगा, उनमें अमरीका से परमाणु क़रार, विभिन्न स्थानों पर बम धमाके, विश्वासमत में धन की भूमिका, राज्यों के चुनाव, बिहार की जलप्रलय, साध्वी की गिरफ़्तारी और हिंदीभाषियों के ख़िलाफ़ हिंसा प्रमुख हैं.

साथ ही भारतीय राजनीति और जनजीवन को प्रभावित करनेवाले कुछ अहम लोगों का अवसान भी हुआ.

भारतीय राजनीति में सामाजिक क्रांति के जनक माने जानेवाले वीपी सिंह का निधन हो गया.

साथ ही कामरेड हरकिशन सिंह सुरजीत, गांधीवादी विचारधारा के स्तंभ बाबा आम्टे, निर्मला देशपांडे और मानेकशॉ भी पंचतत्व में विलीन हो गए.

ऐसी कितनी ही घटनाएँ हैं इस बीते साल की.

आइए, करते हैं एक पड़ताल कुछ अहम घटनाओं, सवालों और मुद्दों की आशुतोष चतुर्वेदी के साथ.
 
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