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जटिल राजनीतिक व्यवस्था
पूरी व्यवस्था एक सर्वोच्च नेता के अधीन काम करती है जिसकी नियुक्ति हालाँकि एक निर्वाचित संस्था के ज़रिए होती है लेकिन वह नेता व्यवहार में किसी के प्रति भी जवाबदेह नहीं है. संविधान में हालाँकि जनभावनाओं और इच्छाओं को वज़न देने की बात कही गई है लेकिन एक ऐसी व्यवस्था चलन में है जिसमें निर्वाचित राष्ट्रपति और संसद सर्वोच्च नेता से सत्ता का संघर्ष करते नज़र आते हैं. सर्वोच्च नेता वास्तव में बहुत ताक़तवर होता है हालाँकि वह निर्वाचित नहीं होता है. कुछ संस्थाओं पर उसका दबदबा इस हद तक होता है कि उसे चुनौती नहीं दी जा सकती. नतीजा ये होता है कि हालाँकि संसद में सुधारवादियों का बहुमत है लेकिन फिर भी राजनीतिक व्यवस्था में मामूली सा परिवर्तन देखा गया है. यहाँ पेश है ईरान की इस जटिल राजनीतिक व्यवस्था पर एक नज़र-सिलसिलेवार, किस संस्था के पास कितनी ताक़त है और असल मे सत्ता केंद्र कहाँ है? ग़ैर निर्वाचित संस्थाएं: सर्वोच्च परामर्श परिषद, सर्वोच्च नेता, न्यायपालिका का अध्यक्ष, सशस्त्र सेनाएं निर्वाचित संस्थाएं: राष्ट्रपति, मंत्रिमंडल, संसद शूरा-ए-निगहबान, विशेषज्ञों की एसेंबली इनमें सबसे ज़्यादा ताक़तवर सर्वोच्च नेता होता है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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