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बँटवारे का दर्द
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लोगों की ज़बानी...
 
 
 
 
 
 
 

साठ साल पहले भारत और पाकिस्तान के आज़ाद होने पर उत्तर भारत की आम जनता को विभाजन और उसके साथ बड़े पैमाने पर हुए सांप्रदायिक दंगे भी झेलने पड़े. जहाँ एक ओर हिंदुओं-सिखों को जान-माल का भारी नुकसान हुआ वहीं मुसलमानों को भी भारी क्षति का सामना करना पड़ा.

हालाँकि इतिहासकारों में इस बारे में आम राय नहीं है कि असल में कितने लोग मारे गए, लेकिन अनुमान लगाया जाता है कि मृतकों की संख्या पाँस से दस लाख के बीच थी.

जिन लोगों को विभाजन और दंगों के पीड़ा झेलनी पड़ी और अपने घरों को छोड़कर पलायन करना पड़ा, उनमें से अधिकतर वृद्धावस्था में हैं और अनेक की मृत्यु हो चुकी है. बीबीसी हिंदी डॉटकॉम ने बात की भारत और पाकिस्तान में बसे कुछ ऐसे लोगों से जिन्होंने उन घटनाओं को क़रीब से देखा. इनमें से कुछ लोगों के परिवार तो दंगों की चपेट में आते-आते बचे.

प्रस्तुत हैं इन लोगों के अनुभव और यादें, इन्ही लोगों की ज़बानी...
 
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