| क्या कहते हैं बुद्धिजीवी | |||
![]() | कुछ लोग एक ख़ास तरह की राजनीति प्रेमचंद के साथ करना चाहते हैं. हम शुरू से ही ऐसे लोगों की भर्त्सना करते रहे हैं जो किताबें जलाते हैं, पत्रिका जलाते हैं, आर्ट गैलरीज़ पर हमला करते हैं और नाटकों को नहीं होने देते. इस प्रकार से ये लोग एक सांप्रदायिक आतंकवाद फैलाते हैं और इसीलिए प्रेमचंद के साहित्य के साथ आज कुछ लोगों द्वारा जो कुछ हुआ है, मैं समझता हूँ कि इसकी भर्त्सना होनी चाहिए. राजेंद्र यादव | ||
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