![]() | |
![]() सहगल के पाँच चित्र पिछली सदी के चौथे दशक में हिंदी फ़िल्मों के महानायक गायक-अभिनेता कुंदनलाल सहगल की चारित्रिक विशेषताओं को उजागर करने वाले पाँच चित्र.
बचपन से लेकर मृत्यु तक के ये पाँच चित्र उन पाँच महत्वपूर्म पड़ावों का अंकन है जिनके माध्यम से कलाकार के संघर्ष और उसकी लोकप्रियता के साथ उसके मानवीयता के भी दर्शन होते हैं. कुंदनलाल का नामकरण करते हुए उनके माँ बाप ने सोचा भी न होगा कि यह बालक एक दिन अपने नाम को सार्थक करेगा. कुंदन दरअसल स्वर्ण का शुद्धतम रुप होता है. सामान्य सोने की चमक कुछ समय उपयोग के बाद मंद पड़ जाती है लेकिन कुंदन की आभा पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस्तेमाल के बाद भी मंद नहीं पड़ती. अनथक संघर्षों के बीच से गुज़रकर उन्होंने गायक अभिनेता का जो व्यक्तित्व अर्जित किया उसका सम्मोहन उनकी मृत्यु के 55 बरस से भी अधिक समय बाद न केवल बरकरार है बल्कि समय के साथ बढ़ता ही जा रहा है. ये फ़्लैश बैक या ये चित्र शरद दत्त की पुस्तक ‘कुंदन’ का हिस्सा हैं. जो जल्दी ही प्रकाशित होने वाली है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ^^वापस ऊपर चलें | |||