![]() | ||
![]() कहाँ हो सकता है सत्ता के गणित में गुणात्मक बदलाव? राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव की क़लम से जब मैं इस चुनाव के बारे में सोचता हूँ तो सिर्फ़ इतना भर नहीं कि किस राज्य के पास ज़्यादा सीटें हैं. मैं ये भी सोचता हूँ कि कौन सा राज्य इस चुनाव में सत्ता के गणित में गुणात्मक बदलाव ला सकता है. यानी, ऐसे कौन से राज्य हैं जहां के चुनाव परिणाम दिल्ली में सत्ता के समीकरण में बुनियादी रूप से उलटफेर कर सकते हैं. और हां,बुनियादी से मतलब 10 से 20 सीट से है, क्योंकि ये चुनाव 10 से 20 सीट का चुनाव है. जहाँ 10 से 20 सीट इधर से उधर गईं, वहीं दिल्ली का तख्त भी खिसक जाएगा. दस से बीस सीटों का चुनाव
मेरी समझ में नौ बड़े राज्य ऐसे हैं जिनके परिणाम 2004 की तुलना में बुनियादी रूप से बदल सकते हैं - कम से कम 10 सीटों का नफ़ा या नुक़सान किसी एक पक्ष को हो सकता है, और यही वो आंकड़ा है जो बाज़ी पलट सकता है. इन नौ राज्यों में उत्तर और पश्चिम भारत के बहुत ज़्यादा राज्य शामिल नहीं है. चुनावी समीकरण कुछ ऐसा बन पड़ा है कि इन राज्यों में कुल मिलाकर बहुत नफ़ा नुक़सान नहीं होगा. 2004 की तरह ये चुनाव भी देश के पूर्वी तट पर लड़ा जाएगा - केरल से शुरू होकर तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और फिर उड़ीसा से होकर पश्चिम बंगाल तक की पट्टी पर. इसके अलावा इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान को भी शामिल किया जा सकता है. पश्चिम से महाराष्ट्र में कुछ बड़ा बदलाव हो सकता है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ^^पिछले लेख पर वापस जाएँ | |||