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![]() प्रमुख घटनाओं पर एक नज़र वर्ष 2005 की अंतरराष्ट्रीय घटनाओं में ग़ज़ा से इसराइलियों की वापसी, इराक़ में जारी हिंसा, पूर्व इराक़ी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन पर मुकदमा, लंदन में बम धमाके, पोप जॉन पॉल का निधन, अमरीका में कैटरीना से मची तबाही और ईरान का परमाणु मुद्दा प्रमुख रहे. इसी के साथ कुछ अन्य प्रमुख घटनाएँ थी फ़्रांस में भड़के दंगे, सीआईए का विवादों में घिरना, इराक़ के तेल के बदले अनाज कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र की जाँच, सीरिया-लेबनान समस्या, बर्ड फ़्लू का ख़तरा, सूडान में शांति समझौता और जर्मनी में पहली महिला चाँस्लर का चुनाव.
इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की ग़ज़ा से हटने की योजना के तहत वहाँ बसे आठ हज़ार यहूदियों को हटाया गया. लेकिन इस पूरे घटनाचक्र के दौरान इसराइली राजनीति में, ख़ास तौर पर लिकूड पार्टी के अंदर गंभीर उथल-पुथल हुई और इस कार्रवाई ने आम इसराइलियों में भी दरार पैदा कर दी. इराक़ ने साल 2005 में तीन चुनाव देखे. जनवरी में अंतरिम सरकार चुनने के लिए चुनाव हुए तो अक्तूबर में संविधान की मंज़ूरी के लिए जनमत संग्रह. पंद्रह दिसंबर को देश की पहली पूर्णकालिक संसद के चयन के लिए चुनाव हुआ. लेकिन पूरे साल हिंसा की घटनाएँ, आत्मघाती हमले और बम धमाके जारी रहे. उधर साल इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन पर 1982 में 148 शियाओं के नरसंहार के आरोपों में राजधानी बग़दाद में मुक़दमा शुरू हुआ. ब्रिटेन की राजधानी लंदन सात जुलाई को चार आत्मघाती हमलावरों का निशाना बनी. चार अलग-अलग जगह बम धमाके हुए जिनमें 52 लोग मारे गए और 700 घायल हुए. अमरीका भी भीषण प्राकृतिक त्रासदी का शिकार बना और मिसीसिपी, एलाबामा और लुइसिआना प्रांतों में लगभग एक हज़ार लोग मारे गए और हज़ारों विस्थापित हुए. पोप जॉन पॉल द्वितीय का वैटिकन में निधन हो गया. वे 84 वर्ष के थे. उनके अंतिम संस्कार में दुनिया भर से लाखों लोग इकट्ठा हुए. इसके बाद 78 वर्षीय कार्डिनल जोज़फ़ रैत्सिंगर रोमन कैथोलिक ईसाईयों के नए धर्मगुरू चुने गए. वर्ष 2005 में ईरान में राष्ट्रपति पद के लिए चुनावों में रूढ़िवादी नेता महमूद अहमदीनेजाद ने स्पष्ट जीत हासिल की. इसके बाद, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के विरोध के बावजूद, अगस्त में ईरान ने यूरेनियम संवर्धन का काम शुरू कर दिया जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता पैदा हो गई. उधर सीरिया भी सुर्खियों में बना रहा. लेबनॉन के पूर्व राष्ट्रपति रफ़ीक़ हरीरी की हत्या के बाद संयुक्त राष्ट्र की प्रारंभिक जाँच में सीरिया का हाथ होने की बात आई. लेबनॉन में 30 साल से सीरिया की फ़ौज की मौजूदगी का भीषण विरोध हुआ और सीरिया को अपने सैनिक हटाने पड़े. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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