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![]() दुनिया भर में फैले भारतीय दुनिया भर में भारतीय मूल के क़रीब दो करोड़ लोग रहते हैं.
इनमें से ज़्यादातर लोग उन्नीसवीं शताब्दी में आर्थिक कारणों से भारत छोड़ कर गए थे. शुरुआत हुई अफ़्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया, फ़िजी और कैरिबियाई द्वीपों से, जहाँ अँगरेज़ों को अपने उपनिवेशों में सस्ते मज़दूरों की ज़रुरत थी. बीसवीं शताब्दी के दौरान भारतीयों ने पश्चिमी देशों और खाड़ी के देशों का रुख किया, लेकिन कारण वही था - बेहतर ज़िंदगी की तलाश. आज दुनिया का शायद ही कोई हिस्सा होगा जहाँ भारतीय न रहते हों. खाड़ी के देश सबसे ज़्यादा भारतीय खाड़ी के देशों में रहते हैं.
इनमें से लगभग आधे लोग केवल केरल से आते हैं. एक मोटे अंदाज़ के हिसाब से खाड़ी के देशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों में सत्तर प्रतिशत, यानि इक्कीस लाख लोग, मेहनत-मज़दूरी करते हैं. बाक़ी नौ लाख लोग डॉक्टर, बैंकर, चार्टर्ड अकाउंटेट जैसे पेशों में हैं. आप मानें या न मानें, इसके बाद सबसे ज़्यादा भारतीय मूल के लोग बर्मा में रहते हैं! जी हाँ, यहाँ रहनेवाले भारतीय मूल के लोगों की संख्या 29 लाख है. इसके अलावा दक्षिण पूर्व एशिया में भारतीय मूल के लगभग 20 लाख लोग रहते हैं. इनमें सबसे अधिक यानि 16 लाख केवल मलेशिया में रहते हैं. अमरीका अमरीका मे लगभग 17 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं. ये अमरीका की आबादी का लगभग 0.6 प्रतिशत हिस्सा है. लेकिन यहाँ रहनेवाले भारतीय बहुत ज़्यादा पढ़े-लिखे, बहुत ज़्यादा जागरूक और बहुत ज़्यादा कमाने वाले लोग हैं. पिछले कुछ सालों में ये लोग एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत के रुप में भी उभरे हैं. इसके अलावा उत्तरी अमरीका के देश कनाडा में भारतीय मूल के डेढ़ लाख लोग हैं और केरिबियाई द्वीप के देशों में दस लाख लोग. अफ़्रीकी महाद्वीप पर भारतीय मूल के लगभग 14 लाख लोग रहते हैं. इनमें से दस लाख लोग केवल दक्षिण अफ़्रीका में रहते हैं. लगभग दो लाख लोग मॉरिशस और रियूनियन द्वीप पर और दो लाख अफ़्रीका के पूर्वी देशों में. यूरोप के ज़्यादातर देशों के विदेशियों के आने पर कड़े प्रतिबंधों के कारण बहुत ज़्यादा भारतीय नहीं रहते. लेकिन केवल ब्रिटेन में भारतीय मूल के क़रीब दस लाख लोग हैं और ये आर्थक और राजनीतिक रूप से बहुत मज़बूत हैं. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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