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परिचय
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 


 
विश्व का घटनाचक्र

हर नया साल कुछ मायनों में कोरे काग़ज़ की तरह होता है जिस पर साल भर होने वाली घटनाएँ एक नई इबारत लिख जाती हैं- ये घटनाचक्र कभी खुशी के पल छोड़ जाता हैं तो कभी ग़मगीन कर जाता है. कहीं लोग सत्ता पर काबिज़ हुकूमत को बेदखल कर देते हैं, कहीं लोकतंत्र फलफूलता है तो कहीं तानाशाही चलती है.

कभी युद्ध के बादल छाने लगते हैं तो कहीं आर्थिक मंदी की मार लोगों की कमर तोड़ जाती है जिसका असर अमीर-गरीब सब पर पड़ता है- तब एहसास होता है कि क्यों विश्व को आज ग्लोबल विलेज कहा जाता है जहाँ हर कोई किसी न किसी रूप से एक दूसरे से जुड़ा हुआ है. कहीं इस सबसे अलग विज्ञान की अपनी ही दुनिया है जो ब्रह्मंड के रहस्यों की गुत्थी सुलझाने में लगी हुई है.

कुछ ऐसा ही था वर्ष 2008 भी. नंवबर में अमरीका में लोगों ने आठ साल से सत्ता पर काबिज़ रिपब्लिकन पार्टी और जॉर्ज बुश को बाहर का रास्ता दिखाया और स्वागत किया डेमोक्रेटिक पार्टी के बराक ओबामा का जो 2009 में अमरीका के पहले काले राष्ट्रपति बनेंगे.

वहीं रूस में व्लादिमीर पुतिन अपने देश के राष्ट्रपति से प्रधानमंत्री बन गए. उनके पसंदीदा दिमित्री मेदवेदेव बने रूस के नए राष्ट्रपति. सिंतबर में जॉर्जिया को लेकर रूस और विश्व के कई अन्य देशों में तनाव की स्थिति रही. कई दिनों तक जॉर्जिया और रूस की सेनाओं के बीच भीषण लड़ाई हुई. लड़ाई के केंद्र बिंदु में था जॉर्जिया का दक्षिण ओसेतिया इलाका जहाँ 1992 में जॉर्जिया की सेनाओं की वापसी के बाद पृथकतावादियों का नियंत्रण है. लड़ाई में 200 से ज़्यादा लोग मारे गए.

ज़िम्बाब्वे भी विश्व सुर्ख़ियों में रहा. विवादास्पद चुनावों के बाद रॉबर्ट मुगाबे ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली. चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई. बाद में रॉबर्ट मुगाबे ने लंबे समय से प्रतिद्वंद्वी रहे विपक्षी नेता मार्गन चांगिरई के साथ सत्ता में हिस्सेदारी के ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किया. इनदिनों वहाँ के लोग हैजे की चपेट मे है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 900 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

थाईलैंड में भी काफ़ी उथल पुथल रही. वहाँ प्रधानमंत्री सत्ता में आते और जाते रहे और विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रहा. लेकिन जिस घटनाक्रम ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया वो है विश्व भर में छाया आर्थिक संकट. दिवालिया होते बैंक, नौकरियों में कटौती.. हर छोटा-बड़ा देश आर्थिक संकट के चपेट में है और इसका असर 2009 में भी देखने को मिलेगा.

इस सबके बीच इराक़ का मुद्दा कुछ हद तक हाशिए पर चला गया था लेकिन साल का अंत होते-होते ब्रिटेन और अमरीका ने इराक़ से सैनिक वापसी की योजनाएँ सामने रखीं. लोगों की उम्मीदें नए ओबामा प्रशासन पर लगी हैं. पूर्व राष्ट्रपति का तमगा मिलने से पहले जॉर्ज बुश ने इराक़ का दौरा भी किया. ये बात और है कि बतौर सौगात उन्हें एक इराक़ी पत्रकार से जूतों के रूप में अनोखा तोहफ़ा मिला.

विज्ञान जगत ने भी 2009 में अलग ही करिश्मा देखा- एक महाप्रयोग जिसका मकसद है ब्रह्मांड के निर्माण की परिस्थितियों को समझना.आइए विस्तार से नज़र डालते हैं वर्ष 2009 की इन सभी प्रमुख घटनाओं पर. ( संकलन- वंदना, बीबीसी संवाददाता)
 
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